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यदि DRT का फैसला आपके खिलाफ हो, तो क्या करें? आगे की कानूनी राह

June 09, 2026

यदि DRT का फैसला आपके खिलाफ आया है, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन देरी करना बेहद खतरनाक हो सकता है। DRT का adverse order अंतिम सत्य नहीं होता; कानून इसके विरुद्ध आगे की अपीलीय और संवैधानिक remedies उपलब्ध कराता है।

सबसे पहला और मुख्य उपाय DRAT (Debt Recovery Appellate Tribunal) में appeal दाखिल करना है। Recovery of Debts and Bankruptcy Act, 1993 की Section 20 के अनुसार, DRT के आदेश के खिलाफ appeal सामान्यतः 45 दिनों के भीतर दायर की जाती है। पर्याप्त कारण होने पर delay condonation की प्रार्थना की जा सकती है, लेकिन limitation को हल्के में लेना उचित नहीं है।

DRAT appeal का सबसे महत्वपूर्ण पहलू pre-deposit है। Section 21 के तहत appeal तब तक entertained नहीं की जाएगी जब तक appellant debt की 50% राशि जमा न करे; हालांकि Appellate Tribunal recorded reasons के आधार पर इसे घटाकर 25% तक कर सकता है। इसलिए appeal की तैयारी के साथ-साथ वित्तीय तैयारी भी समय रहते शुरू कर देनी चाहिए।

कुछ मामलों में litigant यह भी सोचते हैं कि क्या उसी DRT के समक्ष review या rectification संभव है। यह उपाय हर मामले में उपलब्ध या सफल नहीं होता। यदि order में apparent error, procedural defect, या रिकॉर्ड की स्पष्ट त्रुटि हो, तभी इस विकल्प पर सावधानीपूर्वक विचार किया जाना चाहिए। review को नियमित appellate remedy की तरह नहीं देखना चाहिए।

यदि DRT या DRAT की कार्यवाही में natural justice का गंभीर उल्लंघन हुआ हो, jurisdictional error हो, या आदेश में manifest illegality हो, तब Article 226 के तहत High Court में writ petition दायर की जा सकती है। हालांकि, जहाँ वैधानिक वैकल्पिक remedy उपलब्ध हो, वहाँ High Court सामान्यतः writ jurisdiction का उपयोग असाधारण परिस्थितियों में ही करती है।

ऐसी स्थिति में litigant को तुरंत कुछ सावधानियाँ बरतनी चाहिए—order की certified copy लें, सभी pleadings और annexures व्यवस्थित करें, counsel के साथ appeal grounds तैयार करें, limitation diary बनाएं और pre-deposit की व्यवस्था पर तुरंत काम शुरू करें। DRT matters में कई बार मामला merits से पहले procedure पर हार जाता है; इसलिए समय पर उठाया गया कदम ही सबसे बड़ी कानूनी सुरक्षा होता है।

DRT का प्रतिकूल आदेश अंत नहीं है, बल्कि सही रणनीति के साथ अगला कानूनी मोर्चा है। अनुभवी विधिक सलाह, समय-सीमा का पालन, और दस्तावेज़ी तैयारी—ये तीनों मिलकर आपके मामले को मजबूत बना सकते हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य कानूनी जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। प्रत्येक मामला उसके तथ्यों, दस्तावेजों, लागू अधिनियम और प्रक्रिया पर निर्भर करता है; अतः कोई भी appeal, review, rectification या writ petition दाखिल करने से पहले योग्य अधिवक्ता से व्यक्तिगत कानूनी सलाह अवश्य लें।

लेखक / परामर्शदाता

Amardeep Jaiswal, Advocate High Court of Madhya Pradesh

यदि आप इस विषय पर अधिक जानकारी चाहते हैं या किसी कानूनी समस्या का सामना कर रहे हैं, तो आप नीचे दिए गए Link के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं।

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Disclaimer: This article is for educational purposes only and should not be considered legal advice.

अस्वीकरण: यह लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और इसे कानूनी सलाह नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी कानूनी मामले के लिए कृपया उचित परामर्श लें।