क्या गवाह को दोबारा Cross-Examine कर सकते हैं? Supreme Court का फैसला | Order 18 Rule 17 CPC
August 07, 2026
⚖️ क्या गवाह को दोबारा बुलाकर Cross-Examination की जा सकती है? Supreme Court का बड़ा फैसला – Order XVIII Rule 17 CPC की पूरी कानूनी स्थिति
क्या किसी Civil Suit में गवाह की Examination और Cross-Examination पूरी हो जाने के बाद उसे दोबारा Court में बुलाया जा सकता है?
यह सवाल Civil Litigation में काफी महत्वपूर्ण है। कई बार किसी पक्ष को लगता है कि गवाह से कुछ महत्वपूर्ण सवाल पूछना रह गया, कोई तथ्य ठीक से सामने नहीं आया या Cross-Examination में कोई कमी रह गई। ऐसी स्थिति में पक्षकार अक्सर Order XVIII Rule 17 CPC के तहत गवाह को Recall करने की Application दाखिल करता है।
लेकिन क्या Order XVIII Rule 17 CPC किसी पक्ष को गवाह को दोबारा बुलाकर Further Examination, Cross-Examination या Re-Examination करने का अधिकार देता है?
Supreme Court ने इस प्रश्न पर महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट की है।
Shubhkaran Singh v. Abhayraj Singh & Ors., 2025 INSC 628, में Supreme Court ने स्पष्ट किया कि Order XVIII Rule 17 CPC के तहत Witness Recall की शक्ति मुख्यतः Court की है और इसका उद्देश्य Court को किसी ambiguity या doubt को स्पष्ट करने में सहायता देना है। यह provision parties को अपने आप witness को दोबारा बुलाकर examination या cross-examination करने का अधिकार नहीं देता।
🔴 Supreme Court का महत्वपूर्ण फैसला
Case: Shubhkaran Singh vs. Abhayraj Singh & Ors.
Citation: 2025 INSC 628
SLP (Civil) Nos.: 12012-12013/2025
Decision Date: 5 May 2025
Bench: Hon'ble Justice J.B. Pardiwala एवं Hon'ble Justice R. Mahadevan
यह मामला Madhya Pradesh High Court, Jabalpur के आदेश से Supreme Court पहुँचा था। Trial Court ने Order XVIII Rule 17 CPC के अंतर्गत witness recall की application स्वीकार नहीं की थी। Madhya Pradesh High Court ने भी 7 January 2025 को Trial Court के आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया। इसके बाद Review Petition भी 27 February 2025 को reject हो गई और मामला Supreme Court पहुँचा।
📖 Order XVIII Rule 17 CPC क्या कहता है?
Order XVIII Rule 17 CPC का मूल उद्देश्य Court को यह शक्ति देना है कि यदि किसी stage पर Court को पहले से examined witness के बयान में कोई ambiguity, doubt या clarification चाहिए, तो Court उस witness को Recall कर सकती है।
इस provision के अनुसार Court किसी भी stage पर पहले examined witness को Recall कर सकती है और उससे ऐसे questions पूछ सकती है जिन्हें Court आवश्यक समझे।
सरल भाषा में समझें तो:
Witness Recall का उद्देश्य मुकदमे में नई कहानी या नई evidence लाना नहीं, बल्कि Court के सामने मौजूद evidence को समझने और स्पष्ट करने में सहायता करना है।
⚖️ क्या Party खुद Witness को दोबारा बुला सकती है?
सामान्यतः — नहीं।
Supreme Court ने स्पष्ट किया कि Order XVIII Rule 17 CPC के तहत witness को Recall करने की power Court में vested है।
इसका अर्थ यह है कि कोई party केवल इस provision को आधार बनाकर यह दावा नहीं कर सकती कि उसे witness को दोबारा बुलाकर:
Further Examination करनी है,
Further Cross-Examination करनी है,
Re-Examination करनी है,
कोई छूटी हुई बात record पर लानी है,
या अपनी previous mistake सुधारनी है।
Supreme Court ने कहा कि Rule 17 को इस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
🔍 Supreme Court ने "Cross-Examination" के बारे में क्या कहा?
यह judgment का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Court ने स्पष्ट किया कि जब witness को Order XVIII Rule 17 के तहत Court द्वारा Recall किया जाता है, तो मुख्य उद्देश्य Court द्वारा clarification लेना है।
Party को उस recalled witness का automatically फिर से Cross-Examination करने का अधिकार नहीं मिल जाता।
ऐसी स्थिति में Court की permission आवश्यक हो सकती है।
इसलिए केवल यह कहना कि:
"Witness Recall हो गया है, इसलिए अब हमें पूरा Cross-Examination करने का अधिकार है"
कानून की सही स्थिति नहीं है।
🚨 क्या Witness को कभी भी दोबारा Cross-Examine नहीं किया जा सकता?
ऐसा कहना भी सही नहीं होगा।
यही इस Supreme Court judgment की सबसे महत्वपूर्ण nuance है।
Supreme Court ने यह नहीं कहा कि किसी भी परिस्थिति में witness को दोबारा examine/cross-examine नहीं किया जा सकता।
Court ने स्पष्ट किया कि exceptional circumstances में Court अपनी inherent powers under Section 151 CPC का उपयोग करके party को witness को Recall करने और आवश्यक examination/cross-examination की अनुमति दे सकती है।
अर्थात कानूनी स्थिति को इस प्रकार समझा जा सकता है:
Order XVIII Rule 17 CPC
मुख्यतः Court की clarification power
Section 151 CPC
Exceptional circumstances में ends of justice के लिए inherent power
🧑⚖️ Section 151 CPC की भूमिका क्या है?
Section 151 CPC Court को उसकी inherent powers सुरक्षित रखता है ताकि Court:
ends of justice के लिए आवश्यक आदेश दे सके,
और abuse of process of Court को रोक सके।
Supreme Court ने माना कि यदि परिस्थितियाँ वास्तव में warrant करती हैं, तो Court Section 151 CPC के तहत witness को Recall करके examination, cross-examination या re-examination का अवसर दे सकती है।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि Section 151 CPC का इस्तेमाल हर गलती के लिए automatic second chance के रूप में किया जा सकता है।
📌 किन परिस्थितियों में Recall की Application स्वीकार हो सकती है?
Court सामान्यतः निम्न बातों पर विचार कर सकती है:
1. Application Bona Fide है या नहीं?
यदि Application genuine reason से दाखिल की गई है और इसका उद्देश्य केवल मुकदमा लटकाना नहीं है, तो Court उस पर विचार कर सकती है।
2. पहले evidence क्यों नहीं लाई गई?
यदि कोई महत्वपूर्ण evidence पहले stage पर record नहीं हो पाई, तो party को उसका उचित और पर्याप्त कारण बताना पड़ सकता है।
3. क्या इससे Court को न्यायपूर्ण निर्णय लेने में सहायता मिलेगी?
यदि proposed evidence या questioning से Court को किसी महत्वपूर्ण issue को समझने में वास्तविक सहायता मिल सकती है, तो यह एक relevant consideration हो सकता है।
4. क्या Opposite Party को prejudice होगा?
Court यह भी देख सकती है कि Recall की अनुमति देने से दूसरी party को unfair prejudice तो नहीं होगा।
5. क्या Application केवल Lacuna भरने के लिए है?
यदि Application का उद्देश्य केवल पहले की गलत Cross-Examination की कमी को सुधारना या case की कमजोरी को भरना है, तो Court इसे reject कर सकती है।
❌ कब Witness Recall की Application Reject हो सकती है?
Supreme Court ने procedural provisions के misuse के विरुद्ध स्पष्ट चेतावनी दी है।
यदि Application:
केवल delay करने के लिए है,
frivolous है,
mischievous है,
party की negligence को cover करने के लिए है,
evidence में मौजूद lacuna को भरने के लिए है,
या Trial को unnecessarily prolong करने के लिए है,
तो Court उसे reject कर सकती है और appropriate/heavy costs भी लगा सकती है।
⚖️ "Lacuna in Evidence" का क्या मतलब है?
Lacuna का सामान्य अर्थ है—किसी case में ऐसी कमी या gap जिसे party बाद में भरना चाहती है।
उदाहरण के लिए:
मान लीजिए Plaintiff ने अपने witness का examination और cross-examination पूरा कर लिया।
बाद में Plaintiff को पता चलता है कि Cross-Examination में एक बहुत महत्वपूर्ण सवाल पूछना भूल गया।
अब वह केवल इसी वजह से witness को Recall करवाकर उस छूटे हुए सवाल को पूछना चाहता है।
ऐसी स्थिति में Court यह देखेगी कि क्या यह genuine आवश्यकता है या केवल पहले की litigation strategy/neglect की कमी को पूरा करने का प्रयास।
Order XVIII Rule 17 को routine "second chance" के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
Supreme Court ने इसी principle को reaffirm किया है।
📚 Supreme Court ने पुराने महत्वपूर्ण फैसलों को भी दोहराया
इस मामले में Supreme Court ने अपने पुराने judgments पर भी भरोसा किया, जिनमें विशेष रूप से:
1. Vadiraj Naggappa Vernekar v. Sharadchandra Prabhakar Gogate
Supreme Court ने कहा कि Order XVIII Rule 17 की power का उपयोग sparingly और appropriate cases में किया जाना चाहिए।
केवल इस आधार पर कि witness को दोबारा examine करने से opposite party को prejudice नहीं होगा, Recall को सामान्य नियम नहीं बनाया जा सकता।
2. K.K. Velusamy v. N. Palanisamy
यह इस विषय का एक अत्यंत महत्वपूर्ण precedent है।
Supreme Court ने स्पष्ट किया कि Order XVIII Rule 17 का उद्देश्य parties को witness के further examination-in-chief या cross-examination के लिए automatic opportunity देना नहीं है।
इस provision का primary purpose Court को evidence में मौजूद किसी doubt या issue को clarify करने में सहायता देना है।
📝 एक आसान उदाहरण से समझिए
मान लीजिए किसी Property Suit में एक witness ने कहा:
"यह document वर्ष 2015 में मेरे सामने execute हुआ था।"
लेकिन Court को evidence से यह स्पष्ट नहीं है कि:
document कहाँ execute हुआ?
कौन-कौन उपस्थित था?
witness ने execution स्वयं देखा था या किसी अन्य व्यक्ति से जानकारी मिली?
ऐसी स्थिति में Court witness को Recall करके clarification के लिए questions पूछ सकती है।
लेकिन दूसरी स्थिति देखिए:
Party कहती है:
"Cross-Examination में मेरे advocate से तीन सवाल छूट गए थे, इसलिए witness को दोबारा बुलाकर मैं वे तीनों सवाल पूछना चाहता हूँ।"
यह केवल Order XVIII Rule 17 CPC के आधार पर एक automatic right नहीं है।
Court को पूरी परिस्थिति देखकर निर्णय करना होगा और exceptional case में Section 151 CPC की inherent power का प्रश्न उठ सकता है।
🔥 Supreme Court Judgment का सबसे बड़ा संदेश
इस judgment का practical message बहुत साफ है:
"Trial is not a rehearsal."
Civil trial में evidence और Cross-Examination को गंभीरता से तैयार करना आवश्यक है।
Order XVIII Rule 17 CPC को दूसरा मौका पाने का सामान्य रास्ता नहीं बनाया जा सकता।
Court ने procedural law और speedy trial के बीच संतुलन पर भी जोर दिया है। यदि Recall की अनुमति दी जाती है, तो Court delay को रोकने के लिए conditions और costs जैसी safeguards लगा सकती है।
📊 Order XVIII Rule 17 और Section 151 CPC में अंतर
आधार Order XVIII Rule 17 CPC Section 151 CPC
मुख्य उद्देश्य Court द्वारा clarification Ends of justice / abuse of process रोकना
Power Court में vested Court की inherent power
Witness Recall Court कर सकती है Exceptional circumstances में party के request पर भी संभव
Further Cross-Examination Automatic right नहीं Court अनुमति दे सकती है
Lacuna भरना ❌ नहीं ❌ सामान्यतः नहीं
नई Evidence इसका उद्देश्य नहीं Exceptional circumstances में Court discretion
उपयोग Sparingly केवल उचित circumstances में .
👨⚖️ Advocates के लिए Practical Points
यदि किसी Civil Suit में witness Recall की आवश्यकता वास्तव में उत्पन्न होती है, तो Application drafting करते समय केवल यह लिखना पर्याप्त नहीं होगा कि:
"Witness को न्यायहित में Recall किया जाना आवश्यक है।"
Application में स्पष्ट रूप से बताना बेहतर होगा:
Witness कौन है?
उसकी evidence किस date को record हुई?
Recall की आवश्यकता क्यों उत्पन्न हुई?
पहले संबंधित question/evidence क्यों record नहीं हो पाई?
Proposed questioning किस specific issue से संबंधित है?
इससे Court को किस प्रकार सहायता मिलेगी?
Application bona fide क्यों है?
Opposite party को होने वाले prejudice को कैसे minimize किया जा सकता है?
क्या costs/conditions स्वीकार करने के लिए party तैयार है?
Recall से Trial unnecessarily delay क्यों नहीं होगा?
ऐसी detailed application Court को वास्तविक आवश्यकता समझने में अधिक सहायता कर सकती है।
⚠️ एक महत्वपूर्ण सावधानी
Order XVIII Rule 17 CPC की Application को केवल इसलिए file नहीं करना चाहिए कि:
"Cross-Examination अच्छी नहीं हुई, इसलिए एक और मौका चाहिए।"
यदि Court को यह प्रतीत होता है कि party अपनी negligence, omission या कमजोर litigation strategy को बाद में सुधारने के लिए Rule 17 का उपयोग कर रही है, तो Application reject हो सकती है।
Supreme Court ने विशेष रूप से कहा है कि Rule 17 को lacuna filling mechanism नहीं बनाया जा सकता।
⚖️ क्या यह फैसला Criminal Cases पर भी लागू होता है?
यह judgment Civil Procedure Code, 1908 के Order XVIII Rule 17 से संबंधित है और इसका तत्काल संदर्भ civil proceedings है।
इसलिए इसे सीधे यह कहकर लागू नहीं किया जाना चाहिए कि:
"हर criminal case में witness को कभी Recall नहीं किया जा सकता।"
Criminal proceedings में witness recall से संबंधित provisions और procedural framework अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी criminal case में अलग से applicable law और facts को देखना आवश्यक है।
🔎 2026 में भी इस Principle का महत्व
यह principle केवल 2025 के judgment तक सीमित नहीं है। बाद के judicial decisions में भी Courts ने Shubhkaran Singh के principle को refer किया है और यह दोहराया गया है कि Order XVIII Rule 17 की power का उद्देश्य clarification है तथा इसका इस्तेमाल evidence की कमी भरने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
इससे स्पष्ट है कि Witness Recall के applications में procedural discipline और genuine necessity पर Court का ध्यान लगातार बना हुआ है।
🏛️ निष्कर्ष
Shubhkaran Singh v. Abhayraj Singh & Ors. (2025 INSC 628) में Supreme Court ने Order XVIII Rule 17 CPC के scope को स्पष्ट करते हुए यह महत्वपूर्ण principle दोहराया कि witness recall Court की power है और इसका मुख्य उद्देश्य evidence में ambiguity या doubt को clarify करना है।
किसी party को इस Rule के आधार पर witness को automatically दोबारा बुलाकर further examination, cross-examination या re-examination करने का अधिकार नहीं है।
हालाँकि, exceptional circumstances में Court अपनी inherent power under Section 151 CPC का प्रयोग करके उचित अवसर दे सकती है।
इसलिए किसी भी Witness Recall Application में केवल "न्यायहित" का सामान्य उल्लेख पर्याप्त नहीं है। Court को यह दिखाना आवश्यक है कि Recall वास्तव में क्यों आवश्यक है, पहले यह बात क्यों नहीं लाई जा सकी और proposed questioning/evidence से न्यायपूर्ण निर्णय में किस प्रकार सहायता मिलेगी।
सीधी भाषा में:
🔴 Order XVIII Rule 17 CPC कोई "Second Chance" provision नहीं है।
🟢 इसका मुख्य उद्देश्य Court को evidence clarify करने में सहायता देना है।
⚖️ Exceptional cases में Section 151 CPC के तहत Court further examination/cross-examination की अनुमति दे सकती है।
⚠️ Legal Disclaimer
यह लेख केवल general legal information और educational purpose के लिए है। किसी specific case में Order XVIII Rule 17 CPC अथवा Section 151 CPC के अंतर्गत application दाखिल करने से पहले संबंधित case की facts, evidence, previous orders और procedural stage का कानूनी परीक्षण आवश्यक है। केवल इस blog के आधार पर किसी मामले में legal action लेने का निर्णय न करें।
लेखक / परामर्शदाता
Amardeep Jaiswal, Advocate High Court of Madhya Pradesh
यदि आप इस विषय पर अधिक जानकारी चाहते हैं या किसी कानूनी समस्या का सामना कर रहे हैं, तो नीचे दिए गए विकल्पों से संपर्क कर सकते हैं।
Disclaimer: This article is for educational purposes only and should not be considered legal advice.
अस्वीकरण: यह लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और इसे कानूनी सलाह नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी कानूनी मामले के लिए कृपया उचित परामर्श लें।