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1930 पर शिकायत के बाद साइबर फ्रॉड का पैसा कैसे वापस मिलेगा? 2026 Money Restoration प्रक्रिया

1930 पर शिकायत के बाद साइबर फ्रॉड का पैसा कैसे वापस मिलेगा? 2026 Money Restoration प्रक्रिया

September 06, 2026

संक्षिप्त परिचय (Excerpt): साइबर फ्रॉड की शिकायत दर्ज होने और ठगी की रकम किसी खाते में Hold होने के बाद भी वह पैसा पीड़ित के खाते में अपने आप वापस नहीं आता। वर्ष 2026 में लागू Money Restoration Module ने इस प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया है। जानिए शिकायत से लेकर रकम की अंतरिम वापसी तक की पूरी कानूनी प्रक्रिया।

1930 पर साइबर फ्रॉड की शिकायत करने के बाद पैसा कब और कैसे वापस मिलेगा? जानिए 2026 की नई Money Restoration प्रक्रिया

UPI Fraud, Digital Arrest, Fake Investment App, WhatsApp Trading Group, APK Fraud, Credit Card Fraud और नकली Customer Care के माध्यम से होने वाली ठगी तेजी से बढ़ी है। ऐसे मामलों में पीड़ित अक्सर सबसे पहले 1930 पर फोन करता है या National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करता है। इसके बाद उसके मन में एक ही प्रश्न रहता है—“मेरा पैसा कब और कैसे वापस मिलेगा?”

यह समझना आवश्यक है कि 1930 पर शिकायत दर्ज होना, ठगी की रकम का किसी खाते में Hold/Lien होना और उस रकम का पीड़ित को वापस मिलना—ये तीन अलग-अलग चरण हैं। रकम Hold हो जाने का अर्थ केवल इतना है कि उपलब्ध धन को आगे निकलने से रोक दिया गया है। वह रकम अपने आप शिकायतकर्ता के बैंक खाते में वापस नहीं आती। रकम की वापसी के लिए पहचान, सत्यापन, Money Restoration request और परिस्थितियों के अनुसार पुलिस अधिकारी या सक्षम न्यायालय की विधिक प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है।

भारत सरकार ने 2 जनवरी 2026 को NCRP–CFCFRMS के लिए एक व्यापक Standard Operating Procedure जारी की। इसके बाद अप्रैल 2026 से Money Restoration Module और बैंक खाते के Hold, Lien या Freeze से संबंधित Grievance Redressal Module कार्यशील किए गए। इसका उद्देश्य पीड़ित का पैसा शीघ्र वापस दिलाना और निर्दोष खाताधारकों के खातों पर अनावश्यक प्रतिबंध की समस्या को कम करना है।

साइबर फ्रॉड की स्थिति कितनी गंभीर है?

गृह मंत्रालय द्वारा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार 30 जून 2026 तक CFCFRMS के माध्यम से 32.80 लाख से अधिक शिकायतों में लगभग ₹11,158 करोड़ की राशि को ठगों तक पहुँचने से बचाया गया। इसी अवधि तक लाखों संदिग्ध identifiers और Layer-1 mule accounts की जानकारी बैंकों तथा संबंधित संस्थाओं के साथ साझा की जा चुकी थी।

ये आँकड़े बताते हैं कि साइबर फ्रॉड केवल पुलिस शिकायत का विषय नहीं रह गया है; इसमें बैंक, Payment Gateway, UPI service provider, e-commerce company, crypto exchange और विभिन्न राज्यों की पुलिस के बीच तत्काल coordination आवश्यक होता है।

1930 और NCRP क्या काम करते हैं?

Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System अर्थात CFCFRMS को इस उद्देश्य से बनाया गया है कि ठगी की सूचना मिलते ही संबंधित बैंक और financial intermediary तक transaction की जानकारी पहुँचाई जा सके और उपलब्ध रकम को आगे जाने से रोका जा सके।

पीड़ित शिकायत दर्ज करने के लिए:

राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर फोन कर सकता है;

सीधे www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कर सकता है; अथवा

अपने पुलिस स्टेशन या संबंधित बैंक को घटना की सूचना दे सकता है।

1930 पर शिकायत करने पर शिकायतकर्ता को SMS से 14 अंकों का acknowledgement number मिलता है। इसके बाद उस acknowledgement number का उपयोग करके Cyber Crime Portal पर शिकायत की पूरी जानकारी, transaction details और प्रमाण अपलोड करना आवश्यक है। I4C के FAQ के अनुसार 1930 से प्राप्त शिकायत को portal पर 24 घंटे के भीतर पूर्ण किया जाना चाहिए।

ठगी होते ही सबसे पहले क्या करें?

साइबर फ्रॉड में देरी का अर्थ यह हो सकता है कि रकम कई खातों से होते हुए ATM, crypto wallet या किसी अन्य माध्यम से financial system से बाहर निकल जाए। इसलिए घटना के तुरंत बाद निम्न कार्रवाई करें:

1930 पर तुरंत फोन करें।

Cyber Crime Portal पर complaint complete करें।

अपने बैंक के fraud reporting number पर सूचना देकर transaction dispute दर्ज कराएँ।

UPI ID, transaction ID/UTR, रकम, तारीख, समय और beneficiary details दें।

WhatsApp chat, SMS, email, call details, website URL, app details और screenshots सुरक्षित रखें।

debit/credit card या net banking compromise हुआ हो तो password बदलें और संबंधित service block कराएँ।

किसी तथाकथित recovery agent या “पैसा वापस दिलाने” वाले अज्ञात व्यक्ति को advance payment न दें।

केवल बैंक को फोन करना या card block कराना NCRP complaint का विकल्प नहीं है। इसी प्रकार केवल NCRP complaint करने के बाद आवश्यक documents अपलोड न करना भी कार्रवाई में देरी कर सकता है।

शिकायत के बाद Money Trail कैसे बनती है?

शिकायत CFCFRMS पर पहुँचने के बाद पुलिस अधिकारी प्राथमिक रूप से यह देखते हैं कि cyber-enabled financial offence बनता है या नहीं। मामला prima facie सही पाए जाने पर संबंधित banks और financial intermediaries को सूचना भेजी जाती है।

यदि ठगी की रकम beneficiary account में उपलब्ध है, तो reported amount की सीमा तक रकम Hold की जा सकती है। यदि रकम अगले खाते में चली गई है, तो transaction chain आगे track की जाती है। इसीलिए किसी cyber fraud में Layer-1, Layer-2 या आगे के कई accounts सामने आ सकते हैं।

SOP का सामान्य सिद्धांत यह है कि उपलब्ध disputed amount की सीमा तक कार्रवाई की जाए। पूरे खाते को अनिश्चितकाल तक बंद रखना और केवल संबंधित राशि को Hold करना एक समान बात नहीं है। किसी account पर बार-बार complaints हों या वैधानिक निर्देश प्राप्त हों तो बैंक digital banking services suspend करने अथवा account seize करने जैसी अतिरिक्त कार्रवाई कर सकता है।

यदि आपका अपना बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति की cyber complaint के कारण Hold या Freeze हुआ है, तो उसकी अलग कानूनी प्रक्रिया है। इस विषय पर हमारा संबंधित लेख पढ़ें: “साइबर क्राइम में बैंक अकाउंट पर Hold/Freeze क्यों लगता है और उसे Unfreeze कैसे कराएँ?”

Hold, Lien और Refund में क्या अंतर है?

Hold: संदिग्ध transaction से संबंधित उपलब्ध रकम को आगे transfer या withdraw होने से रोकना।

Lien Marking: बैंक द्वारा किसी निश्चित रकम पर प्रतिबंध अंकित करना, जिससे वह रकम उपयोग में न लाई जा सके।

Account Freeze/Seizure: परिस्थितियों और lawful direction के अनुसार खाते के संचालन पर व्यापक प्रतिबंध।

Money Restoration/Interim Custody: सत्यापन और विधिक प्रक्रिया के बाद Hold या seizure में उपलब्ध रकम को अंतिम trial समाप्त होने से पहले पीड़ित को शर्तों सहित सौंपना।

इस प्रकार “रकम Hold हो गई” का संदेश मिलना सकारात्मक संकेत है, लेकिन यह अंतिम refund confirmation नहीं है। पीड़ित को restoration के लिए आगे आवेदन करना चाहिए।

2026 में Money Restoration के लिए आवेदन कैसे करें?

शिकायतकर्ता सबसे पहले NCRP/CFCFRMS पर अपनी complaint का status देखे। यदि status में पूरी या आंशिक रकम provisionally put on hold दिखाई देती है, तो वह अधिकृत Money Restoration Module के माध्यम से interim custody के लिए request कर सकता है। वर्तमान सरकारी portal है: https://mrm-ncrp.mha.gov.in/

आवेदन करते समय complaint acknowledgement number, registered mobile number, PAN और मांगी गई banking/identity details की आवश्यकता पड़ सकती है। सही विवरण भरने के बाद request ID सुरक्षित रखें। यह request संबंधित police station और investigating officer तक भेजी जाती है।

यदि online request में तकनीकी समस्या आए, status स्पष्ट न हो या complaint संबंधित police station को assign हो चुकी हो, तो acknowledgement number के साथ उस police station, Investigating Officer तथा State/District NCRP nodal officer से लिखित संपर्क करें।

Single Victim वाले मामले में रकम कैसे वापस मिल सकती है?

जहाँ किसी suspect account में Hold रकम केवल एक शिकायत और एक स्पष्ट पीड़ित से संबंधित हो, वहाँ SOP के अनुसार निम्न प्रक्रिया अपनाई जा सकती है:

शिकायतकर्ता Money Restoration Module से interim custody का आवेदन करता है।

IO यह सत्यापित करता है कि Hold रकम उसी शिकायत से संबंधित है और investigation के लिए उसे रोके रखना आवश्यक नहीं है।

IO सामान्यतः सात calendar days के भीतर suspect account holder को verification के लिए notice जारी करता है। जहाँ संभव हो, verification video conference से किया जा सकता है।

account holder को disputed transaction समझाने के लिए अधिकतम 15 calendar days दिए जा सकते हैं।

रकम पीड़ित की पाई जाने पर IO, jurisdictional Superintendent of Police या Deputy Commissioner of Police की approval लेकर Section 106(3) BNSS के अंतर्गत बैंक को interim custody देने का निर्देश दे सकता है।

पीड़ित को indemnity bond/undertaking देना पड़ सकता है कि न्यायालय के निर्देश पर आवश्यकता होने पर वह रकम प्रस्तुत करेगा और अंतिम आदेश का पालन करेगा।

वैध निर्देश मिलने के बाद बैंक को सामान्यतः 15 calendar days के भीतर रकम पीड़ित के verified account में भेजकर NCRP पर status update करना होता है।

IO अपनी report, indemnity bond और restoration की जानकारी jurisdictional court को भेजता है।

SOP में ₹50,000 से कम Hold रकम और ₹50,000 से अधिक रकम के लिए प्रक्रिया का उल्लेख अलग प्रकार से किया गया है। ₹50,000 से अधिक रकम के मामले में FIR से जुड़ी प्रक्रिया और Section 106(3) BNSS की शर्तें विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाती हैं। इसलिए बड़ी रकम के मामले में complaint status, FIR/e-FIR और IO की report की स्थिति अवश्य जाँचें।

Multiple Victims हों तो पैसा किसे मिलेगा?

कई बार एक ही mule या beneficiary account में अलग-अलग राज्यों के अनेक पीड़ितों की रकम पहुँचती है। उपलब्ध balance सभी claims को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होता। ऐसी स्थिति में “पहले शिकायत करने वाले को पूरा पैसा” मिलना आवश्यक नहीं है।

IOs संबंधित bank statements, transaction timestamps, money trail और CFCFRMS पर दर्ज competing claims की जाँच करते हैं। यदि रकम किसी विशेष पीड़ित से स्पष्ट रूप से जोड़ी जा सकती है, तो उसी के अनुसार interim custody दी जा सकती है। लेकिन अलग-अलग पीड़ितों की रकम आपस में मिल गई हो और स्पष्ट attribution संभव न हो, तो SOP equitable या pro-rata distribution का सिद्धांत अपनाने की अनुमति देती है।

ऐसे मामले अधिक समय ले सकते हैं, क्योंकि विभिन्न पुलिस अधिकारियों, बैंकों और राज्यों के बीच consensus आवश्यक हो सकता है। मतभेद होने पर jurisdictional court से निर्देश लिया जा सकता है।

क्या FIR के बिना पैसा वापस मिल सकता है?

इस प्रश्न का एक शब्द में उत्तर देना उचित नहीं होगा। प्रारंभिक Hold कार्रवाई CFCFRMS पर शिकायत के आधार पर बहुत तेजी से शुरू हो सकती है, लेकिन रकम की वापसी का वैधानिक आधार, रकम की मात्रा और account seizure की स्थिति महत्वपूर्ण हैं।

SOP के Process 1 में ₹50,000 से कम Hold amount की interim custody के लिए Section 106(3) BNSS का मार्ग बताया गया है; वहीं ₹50,000 से अधिक Hold या seized amount की interim custody को FIR से जोड़कर वर्णित किया गया है। इसके अतिरिक्त सक्षम न्यायालय BNSS की धाराओं 497, 498 या 503 के अंतर्गत उचित आदेश दे सकता है। इसलिए यह मानना गलत होगा कि हर complaint में FIR के बिना स्वतः refund हो जाएगा, या इसके विपरीत FIR दर्ज न होने तक कोई उपाय ही उपलब्ध नहीं है। प्रत्येक मामले की procedural स्थिति अलग से देखनी होगी।

पुलिस प्रक्रिया आगे न बढ़ाए तो न्यायालयीन उपाय क्या है?

यदि रकम Hold होने के बावजूद Money Restoration request पर कार्रवाई नहीं हो रही, competing claims हैं, suspect account holder ownership dispute कर रहा है या पुलिस रकम लौटाने का निर्णय नहीं ले पा रही, तो पीड़ित jurisdictional court में आवेदन कर सकता है।

SOP के अनुसार Hold या seized amount की release के लिए सक्षम न्यायालय में Sections 497, 498 या 503 BNSS के अंतर्गत आवेदन किया जा सकता है। न्यायालय IO से money trail, bank transactions, अन्य complaints और investigation की स्थिति पर report माँग सकता है। आदेश पारित होने पर वह संबंधित बैंक को भेजा जाता है और बैंक restoration/disposal की जानकारी NCRP पर update करता है।

ऐसी property जिसे अपराध से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त माना गया हो, उसके attachment, forfeiture और restoration के लिए Section 107 BNSS की प्रक्रिया भी परिस्थितियों के अनुसार अपनाई जा सकती है। सही provision इस बात पर निर्भर करेगा कि रकम केवल Hold है, formally seized है, FIR दर्ज है या नहीं, कितने claimants हैं और मामला किस न्यायालय के territorial jurisdiction में आता है।

Money Restoration के लिए कौन-कौन से दस्तावेज रखें?

पीड़ित को निम्न documents की साफ और क्रमबद्ध file बनानी चाहिए:

NCRP/1930 का acknowledgement number और complaint copy;

portal पर complaint status और Hold amount का screenshot;

bank statement जिसमें fraudulent transaction स्पष्ट हो;

UTR/transaction ID, UPI ID और beneficiary details;

बैंक को भेजी गई complaint तथा bank acknowledgement;

FIR/e-FIR या police complaint की copy, यदि उपलब्ध हो;

SMS, email, WhatsApp/Telegram chat और call details;

fake website, app, social media profile या advertisement के screenshots;

identity proof, PAN और उस bank account का cancelled cheque जिसमें रकम वापस चाहिए;

Money Restoration request ID;

IO, police station, district और State nodal officer के साथ किया गया correspondence;

chronology अर्थात घटना से लेकर आवेदन तक तारीखवार संक्षिप्त विवरण।

Screenshots को edit या crop करके आवश्यक metadata नष्ट न करें। मूल mobile, email और electronic records सुरक्षित रखना आगे की investigation तथा Evidence Act/Bharatiya Sakshya Adhiniyam के संदर्भ में उपयोगी हो सकता है।

शिकायतकर्ता आमतौर पर कौन-सी गलतियाँ करते हैं?

1. केवल 1930 पर फोन करके रुक जाना

Acknowledgement मिलने के बाद portal पर complete details और documents भरना आवश्यक है।

2. देर से शिकायत करना

रकम जितनी अधिक transaction layers पार कर लेती है, recovery उतनी कठिन हो सकती है।

3. “Hold” को “Refund” मान लेना

Hold के बाद restoration request और verification की प्रक्रिया अलग है।

4. अलग-अलग जगह विरोधाभासी जानकारी देना

बैंक, NCRP और पुलिस को transaction की रकम, समय और कारण के संबंध में एक समान एवं सही तथ्य दें।

5. सबूत delete कर देना

शर्म, भय या घबराहट में chat, app या email delete न करें। ये money trail और आरोपी की पहचान में उपयोगी हो सकते हैं।

6. Recovery के नाम पर दूसरी ठगी का शिकार होना

सरकारी अधिकारी, बैंक या न्यायालय के नाम पर “processing fee” माँगने वाले अनजान व्यक्ति को भुगतान न करें। अधिकृत portal का domain ध्यान से जाँचें।

रकम वापस आने में कितना समय लगता है?

हर मामले के लिए एक निश्चित कुल समय बताना संभव नहीं है। समय इस पर निर्भर करेगा कि:

पैसा अभी financial system में उपलब्ध है या निकल चुका है;

रकम एक account में है या कई layers में गई है;

एक पीड़ित है या अनेक competing claimants;

beneficiary account holder transaction स्वीकार करता है या contest करता है;

FIR, verification और bank response की स्थिति क्या है;

police route पर्याप्त है या court order आवश्यक है।

SOP ने विभिन्न चरणों के लिए 7 और 15 calendar days जैसी समय-सीमाएँ दी हैं, लेकिन इन्हें जोड़कर “इतने दिनों में refund guaranteed” नहीं कहा जा सकता। दस्तावेज अधूरे हों, inter-state coordination हो या multiple victims हों तो अधिक समय लग सकता है।

क्या पूरी रकम वापस मिलने की गारंटी है?

नहीं। 1930 या NCRP पर शिकायत करना recovery की संभावना बढ़ाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, पर पूरी रकम की गारंटी नहीं देता। यदि पैसा cash withdrawal, cryptocurrency, goods purchase या किसी अन्य माध्यम से financial system से बाहर जा चुका हो, suspect account में balance न हो अथवा उपलब्ध रकम पर अनेक पीड़ितों के वैध claims हों, तो पूरी recovery संभव नहीं भी हो सकती।

फिर भी त्वरित शिकायत का बड़ा लाभ यह है कि उपलब्ध रकम को उसी समय Hold किया जा सकता है और money trail के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

निष्कर्ष

वर्ष 2026 की नई SOP और Money Restoration Module ने cyber fraud victims के लिए रकम वापस पाने का अधिक स्पष्ट रास्ता बनाया है। अब आवश्यक है कि पीड़ित केवल complaint दर्ज करके प्रतीक्षा न करे, बल्कि complaint status देखे, Hold amount की पुष्टि करे, Money Restoration request लगाए, आवश्यक documents प्रस्तुत करे और IO से लिखित follow-up करे। जहाँ administrative प्रक्रिया पर्याप्त न हो, वहाँ सक्षम न्यायालय से interim custody या restoration का आदेश माँगा जा सकता है।

साइबर फ्रॉड में सबसे महत्वपूर्ण मंत्र है—तुरंत शिकायत, सही transaction details, सुरक्षित electronic evidence और लगातार विधिक follow-up।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. क्या 1930 पर शिकायत करते ही पैसा वापस आ जाता है?

नहीं। 1930 complaint से transaction trace और Hold की कार्रवाई शुरू हो सकती है। वास्तविक वापसी के लिए restoration और verification की अलग प्रक्रिया है।

2. 1930 से acknowledgement मिलने के बाद क्या करना चाहिए?

उस acknowledgement number से cybercrime.gov.in पर complaint की पूरी जानकारी और documents भरें। I4C के अनुसार यह formal complaint 24 घंटे के भीतर complete की जानी चाहिए।

3. Portal पर रकम Hold दिखाई दे तो अगला कदम क्या है?

Money Restoration Module पर interim custody/refund request करें और request ID सुरक्षित रखें।

4. क्या आंशिक रकम भी वापस मिल सकती है?

हाँ। यदि fraud amount का केवल कुछ भाग Hold हुआ है, तो सत्यापन और विधिक प्रक्रिया के बाद उपलब्ध भाग की interim custody दी जा सकती है।

5. एक खाते पर कई पीड़ितों के claims हों तो क्या होगा?

Money trail से स्पष्ट attribution किया जाएगा। ऐसा संभव न होने पर उपलब्ध रकम का equitable या pro-rata distribution किया जा सकता है।

6. क्या दूसरे राज्य की पुलिस के सामने व्यक्तिगत रूप से जाना जरूरी है?

हर मामले में नहीं। SOP verification के लिए यथासंभव video conference और स्थानीय पुलिस की सहायता का विकल्प देती है। लेकिन FIR की investigation में व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक पाए जाने पर IO वैधानिक notice दे सकता है।

7. Police refund process आगे न बढ़ाए तो क्या करें?

IO और supervisory officers को written representation दें। परिस्थितियों के अनुसार jurisdictional court में Sections 497, 498 या 503 BNSS के अंतर्गत आवेदन किया जा सकता है।

लेखक

Adv. Amardeep Jaiswal
Advocate, High Court of Madhya Pradesh, Jabalpur

यदि आप cyber fraud, bank account freeze, lien removal या ठगी की रकम की Money Restoration प्रक्रिया में कानूनी सहायता चाहते हैं, तो अपने complaint acknowledgement, bank statement, transaction details और police/bank correspondence के साथ किसी अनुभवी अधिवक्ता से परामर्श लें।

आधिकारिक संदर्भ

Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C), SOP for NCRP–CFCFRMS: Custody, Restoration of Money and Grievance Redressal.

Ministry of Home Affairs, Lok Sabha Unstarred Question No. 4118, answered on 17 March 2026.

Ministry of Home Affairs, Lok Sabha Unstarred Question No. 1431, answered on 28 July 2026.

National Cyber Crime Reporting Portal — https://cybercrime.gov.in/

Money Restoration Module — https://mrm-ncrp.mha.gov.in/

अस्वीकरण: यह लेख सामान्य कानूनी जानकारी और जन-जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसे किसी विशेष मामले की कानूनी सलाह न माना जाए। Cyber fraud की प्रक्रिया, jurisdiction और उपलब्ध remedy प्रत्येक मामले के तथ्यों एवं नवीनतम सरकारी/न्यायालयीन निर्देशों पर निर्भर करती है।

लेखक / परामर्शदाता

Amardeep Jaiswal, Advocate High Court of Madhya Pradesh

यदि आप इस विषय पर अधिक जानकारी चाहते हैं या किसी कानूनी समस्या का सामना कर रहे हैं, तो नीचे दिए गए विकल्पों से संपर्क कर सकते हैं।

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Disclaimer: This article is for educational purposes only and should not be considered legal advice.

अस्वीकरण: यह लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और इसे कानूनी सलाह नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी कानूनी मामले के लिए कृपया उचित परामर्श लें।