Vakeel Sahab - India's Legal Network
← Back to Insights

DRT (Debt Recovery Tribunal) क्या है और यह कैसे काम करता है? (एक शुरुआती गाइड)

June 09, 2026

आज के समय में बैंकिंग और लोन से जुड़ी कानूनी प्रक्रियाएं आम आदमी के लिए काफी उलझी हुई हो सकती हैं। यदि आपने लोन लिया है और किसी कारणवश उसे नहीं चुका पा रहे हैं, तो आपने अक्सर DRT (डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल) का नाम सुना होगा।

एक एडवोकेट के तौर पर, मैं अक्सर देखता हूँ कि लोग 'DRT' शब्द से डर जाते हैं, जबकि सही जानकारी और कानूनी समझ से इस स्थिति को संभाला जा सकता है। आइए, इसे आसान भाषा में समझते हैं।

DRT क्या है?
DRT का पूरा नाम 'डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल' (Debt Recovery Tribunal) है, जिसे हिंदी में 'ऋण वसूली न्यायाधिकरण' कहा जाता है। इसकी स्थापना 'बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बकाया ऋण वसूली अधिनियम, 1993' के तहत की गई थी।

आसान शब्दों में, यह बैंकों के लिए एक विशेष 'फास्ट-ट्रैक' कोर्ट है। इसे इसलिए बनाया गया ताकि लोन न चुकाने वालों से बैंक अपना पैसा तेजी से वसूल सकें और सिविल कोर्ट में लंबे समय तक चलने वाले मुकदमों से बचा जा सके।

DRT कब काम करता है?
यह ट्रिब्यूनल हर लोन केस में हस्तक्षेप नहीं करता। इसके लिए मुख्य शर्तें हैं:

₹20 लाख से अधिक का बकाया: DRT में बैंक तभी केस कर सकते हैं जब लोन की बकाया राशि ₹20 लाख या उससे अधिक हो।

विशेष क्षेत्राधिकार: यह निकाय केवल बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों के लोन रिकवरी मामलों के लिए ही बना है।

SARFAESI एक्ट का लिंक: अक्सर बैंक DRT जाने से पहले SARFAESI एक्ट (2002) का उपयोग करते हैं, जिसके तहत वे बिना कोर्ट के हस्तक्षेप के आपकी संपत्ति को कुर्क या नीलाम कर सकते हैं। DRT इसी प्रक्रिया में एक 'न्यायिक चेक' (Judicial Check) की भूमिका निभाता है।

DRT की कार्यप्रणाली (Process)
बैंक का आवेदन (OA): जब कोई कर्जदार लोन डिफॉल्ट करता है, तो बैंक DRT में 'Original Application' (OA) दायर करता है।

नोटिस और सुनवाई: ट्रिब्यूनल कर्जदार को नोटिस भेजकर अपना पक्ष रखने का मौका देता है।

रिकवरी सर्टिफिकेट (RC): यदि बैंक का दावा सही पाया जाता है, तो ट्रिब्यूनल 'रिकवरी सर्टिफिकेट' जारी करता है।

रिकवरी ऑफिसर (RO): सर्टिफिकेट मिलते ही मामला 'रिकवरी ऑफिसर' के पास जाता है। उनके पास देनदार की संपत्ति को कुर्क करने, नीलामी करने या बैंक खातों को फ्रीज करने का पूरा अधिकार होता है।

क्या आप DRT के सामने अपना बचाव कर सकते हैं?
जी हाँ, एक वकील के माध्यम से आप निम्नलिखित तरीके से अपना बचाव कर सकते हैं:

गलत गणना: यदि बैंक ने ब्याज या पेनल्टी गलत तरीके से जोड़ी है।

सेटलमेंट (OTS): आप बैंक के साथ 'वन टाइम सेटलमेंट' (OTS) की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

प्रक्रियात्मक खामियां: यदि बैंक ने रिकवरी की कानूनी प्रक्रिया (जैसे नोटिस अवधि या नियमों का पालन) का पालन नहीं किया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. क्या DRT नोटिस मिलने पर जेल हो सकती है?
नहीं, DRT एक 'सिविल' प्रक्रिया है। यहाँ बात केवल आपकी संपत्ति और लोन की वसूली की होती है, न कि आपकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता की।

Q2. क्या बिना वकील के DRT में पैरवी की जा सकती है?
कानूनी रूप से आप स्वयं उपस्थित हो सकते हैं, लेकिन बैंकिंग कानून और प्रक्रियात्मक तकनीकीताओं को देखते हुए एक अनुभवी वकील का साथ होना अनिवार्य है ताकि आपकी संपत्ति सुरक्षित रहे।

Q3. अगर फैसला खिलाफ हो तो क्या करें?
आप DRAT (Debt Recovery Appellate Tribunal) में अपील कर सकते हैं। ध्यान रखें कि अपील के लिए विवादित राशि का एक निश्चित हिस्सा जमा करना पड़ सकता है।

एडवोकेट की सलाह
DRT से नोटिस मिलने पर घबराएं नहीं और न ही इसे नजरअंदाज करें। समय पर कानूनी जवाब दाखिल करना आपकी संपत्ति को नीलामी से बचाने की पहली सीढ़ी है।

क्या आप या आपका कोई जानने वाला DRT केस या संपत्ति की नीलामी से जुड़ी समस्या का सामना कर रहे हैं?
देरी आपकी संपत्ति को खतरे में डाल सकती है। आज ही VakeelSahab.in के माध्यम से हमसे संपर्क करें और अपने कानूनी अधिकारों को सुरक्षित करें।

लेखक / परामर्शदाता

Amardeep Jaiswal, Advocate High Court of Madhya Pradesh

यदि आप इस विषय पर अधिक जानकारी चाहते हैं या किसी कानूनी समस्या का सामना कर रहे हैं, तो आप नीचे दिए गए Link के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं।

View My VakeelSahab Profile Connect on Google

Disclaimer: This article is for educational purposes only and should not be considered legal advice.

अस्वीकरण: यह लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और इसे कानूनी सलाह नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी कानूनी मामले के लिए कृपया उचित परामर्श लें।