सामान्य संवैधानिक और आपराधिक प्रक्रिया के अनुसार गिरफ्तार व्यक्ति को अनावश्यक देरी के बिना और यात्रा का आवश्यक समय छोड़कर 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होता है।
इसका अर्थ 24 घंटे बाद स्वतः रिहाई नहीं है। मजिस्ट्रेट कानून के अनुसार remand दे सकता है। Police custody और judicial custody अलग हैं। BNSS की remand व्यवस्था में आरोप और सजा के अनुसार अलग सीमाएँ व शर्तें हैं; पुराने CrPC की बातें बिना तुलना लागू करना सही नहीं है।
अब क्या करें?
- गिरफ्तारी का वास्तविक समय और स्थान परिवार को नोट कराएँ।
- अधिवक्ता या विधिक सहायता तथा स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों की जानकारी दें।
- पेशी और remand order की प्रति लेकर आगे के उपाय समझें।
कौन-से दस्तावेज रखें?
Arrest memo, medical record, remand order और उपलब्ध FIR details।
यह गलती न करें
हिरासत की तारीखें अनुमान से बताने के बजाय लिखित रिकॉर्ड से मिलाएँ; जमानत के आधार पर असर पड़ सकता है।
एक काल्पनिक उदाहरण
गिरफ्तारी के अगले दिन magistrate ने custody का आदेश दिया। यह 24 घंटे के नियम का अपने आप उल्लंघन नहीं है। वास्तविक arrest time, पेशी और न्यायिक remand का record देखकर स्थिति समझी जाती है।
क्या मजिस्ट्रेट के सामने पेश होना bail मिलना है?
नहीं। पेशी, remand और bail अलग न्यायिक प्रश्न हैं।
कानूनी आधार और उपयोगी स्रोत
यह सामान्य कानूनी जानकारी है। आपके तथ्य, लागू कानून और राज्य के नियमों के अनुसार सलाह अलग हो सकती है।