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28 October 2026
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क्या बिना penetration के bad touch पर भी POCSO लगता है?

हाँ, बिना penetration के भी संबंधित तथ्यों में POCSO लागू हो सकता है। धारा 7 लैंगिक आशय वाले निर्धारित शारीरिक संपर्क को sexual assault के रूप में संबोधित करती है। धारा 8 उसकी सजा बताती है। इसलिए शिकायत को केवल यह कहकर नकारना कि कोई प्रवेश नहीं हुआ या मामला सिर्फ छूने का है, कानून की अधूरी समझ होगी। घटना के तथ्य और आवश्यक आशय महत्वपूर्ण हैं।
मुख्य बातें
  • कानूनी संदर्भ तारीख: 28 October 2026 प्रवेश न होने से कानून बाहर नहीं हो जाता हाँ, बिना penetration के भी संबंधित तथ्यों में POCSO लागू हो सकता है।
  • धारा 7 लैंगिक आशय वाले निर्धारित शारीरिक संपर्क को sexual assault के रूप में संबोधित करती है।
  • इसलिए शिकायत को केवल यह कहकर नकारना कि कोई प्रवेश नहीं हुआ या मामला सिर्फ छूने का है, कानून की अधूरी समझ होगी।

विस्तृत विवेचना

कानून और प्रक्रिया की समझ

कानूनी संदर्भ तारीख: 28 October 2026

प्रवेश न होने से कानून बाहर नहीं हो जाता

हाँ, बिना penetration के भी संबंधित तथ्यों में POCSO लागू हो सकता है। धारा 7 लैंगिक आशय वाले निर्धारित शारीरिक संपर्क को sexual assault के रूप में संबोधित करती है। धारा 8 उसकी सजा बताती है। इसलिए शिकायत को केवल यह कहकर नकारना कि कोई प्रवेश नहीं हुआ या मामला सिर्फ छूने का है, कानून की अधूरी समझ होगी। घटना के तथ्य और आवश्यक आशय महत्वपूर्ण हैं। [1]

साथ ही हर संपर्क अपराध नहीं है। दुर्घटनावश स्पर्श, सामान्य देखभाल और किसी खास घटना में लैंगिक आशय वाले व्यवहार के बीच तथ्यात्मक अंतर होता है। bad touch सामान्य जागरूकता का शब्द है; अदालत संबंधित कानूनी परिभाषा और साक्ष्य देखती है। बच्चे की बात को महत्व देते हुए बिना जाँच हर साधारण गतिविधि को अपराध घोषित करना भी उचित नहीं है।

कपड़ों के ऊपर संपर्क का प्रश्न

Attorney General for India बनाम Satish के निर्णय में Supreme Court ने धारा 7 के लिए skin-to-skin संपर्क को अनिवार्य मानने वाला संकीर्ण दृष्टिकोण अस्वीकार किया। कपड़ों के ऊपर संपर्क होने के कारण अकेले POCSO से छूट नहीं मिलती। संबंधित लैंगिक आशय और घटना का स्वरूप जाँचा जाता है। इस नियम का उद्देश्य संरक्षण को केवल सीधे त्वचा संपर्क तक सीमित होने से रोकना है। [3]

परिवार को बच्चे के कपड़े या घटना के किसी छोटे हिस्से के आधार पर निश्चित कानूनी निष्कर्ष नहीं देना चाहिए। बच्चा जो बताता है उसे उसके शब्दों में सुनें। ऐसा हुआ था न जैसे निर्देशित प्रश्नों से बचें। यदि संबंधित वस्तु या कपड़े उपलब्ध हैं तो उन्हें बदलने, धोने या अलग तरीके से प्रस्तुत करने के बजाय जाँच अधिकारी से सुरक्षित संरक्षण का मार्गदर्शन लें।

aggravated sexual assault और सजा

धारा 7 के अपराध के लिए धारा 8 में तीन से पाँच वर्ष का कारावास और जुर्माना है। यदि धारा 9 की कोई निर्धारित aggravated परिस्थिति मौजूद और साबित हो तो धारा 10 में पाँच से सात वर्ष तथा जुर्माने का प्रावधान है। आरोपी की विशेष भूमिका और बच्चे की उम्र जैसी परिस्थितियों को संबंधित उपधारा के अनुसार देखना होगा। हर मामले में सभी aggravated प्रावधान नहीं लगते। [1]

बिना प्रवेश वाले इस वर्गीकरण को penetrative sexual assault की धाराएँ 3 से 6 के साथ न मिलाएँ। FIR में कौन सा आरोप लिखा गया और उसके समर्थन में क्या सामग्री है, यह स्पष्ट करें। किसी गंभीर शब्द या शुरुआती धाराओं के कारण अंतिम सजा तय नहीं मानी जा सकती। अदालत में अपराध के तत्व और पूरे साक्ष्य की जाँच आवश्यक रहती है।

बिना छुए भी उत्पीड़न संभव

POCSO केवल शारीरिक संपर्क तक सीमित नहीं है। धारा 11 में लैंगिक आशय वाले कुछ शब्द, संकेत, इलेक्ट्रॉनिक संपर्क और अन्य निर्धारित व्यवहार sexual harassment हो सकते हैं। धारा 12 में उसके लिए तीन वर्ष तक कारावास और जुर्माना है। बिना संपर्क की हर अप्रिय बातचीत अपने आप इस धारा में नहीं आती; आवश्यक आशय और विशिष्ट तथ्य स्पष्ट होने चाहिए। [1]

ऑनलाइन आरोप में मूल संदेश, अकाउंट की उपलब्ध जानकारी, तारीख और बातचीत का पूरा संदर्भ सुरक्षित रखें। बच्चे से खाते में जाकर और संदेश मँगवाने या आरोपी को उकसाकर नया सबूत बनवाने की कोशिश न करें। डिजिटल जाँच प्राधिकरण का कार्य है। अनावश्यक तस्वीरें या निजी संदेश सार्वजनिक करके जागरूकता फैलाना बच्चे की गोपनीयता को नुकसान पहुँचा सकता है।

रिपोर्टिंग और सहायता के व्यावहारिक कदम

अपराध की जानकारी या आशंका हो तो स्थानीय पुलिस या SJPU को तथ्य दें। बच्चा घायल हो या उपचार की जरूरत हो तो चिकित्सा सहायता में देरी न करें। रिपोर्ट करने के लिए परिवार को पहले स्वयं सटीक कानूनी धारा चुनना आवश्यक नहीं है। अधिकारी को घटना का स्वरूप, स्थान, समय और बच्चे की तत्काल सुरक्षा संबंधी चिंता बताना अधिक उपयोगी है। [1][2]

बच्चे को यह समझाएँ कि सहायता माँगना गलत नहीं है। बार बार परीक्षा लेने जैसा प्रश्न न करें और सामान्य दिनचर्या में सुरक्षित सहयोग दें। शिकायत की प्राप्ति, उपलब्ध रिकॉर्ड और संपर्क अधिकारी का विवरण रखें। सही कानूनी प्रश्न केवल कितना संपर्क हुआ नहीं, बल्कि क्या व्यवहार हुआ, किस आशय से हुआ और संबंधित धारा के आवश्यक तथ्य क्या हैं, यह है।

स्रोत

  1. Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012, amended text — NCPCR / Government of India. Definitions, offences, reporting, safeguards, Special Courts and presumptions; 2019 amendments included.
  2. POCSO Rules, 2020 — Gazette notification G.S.R. 165(E) — Ministry of Women and Child Development / NCPCR. Rules 3, 4, 6, 7 and 9: institutions, care, support, medical aid, legal aid and compensation.
  3. Attorney General for India v. Satish — judgment dated 18 November 2021 — Supreme Court of India. Paragraphs 33 and 43: section 7 does not require skin-to-skin contact; sexual intent remains material.

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Advocate Amardeep Jaiswal
लेखक के बारे में

Advocate Amardeep Jaiswal

Advocate, High Court of Madhya Pradesh, Jabalpur। भारतीय कानून, न्यायिक निर्णय और व्यावहारिक कानूनी विषयों पर जानकारीपूर्ण लेख प्रकाशित करते हैं।

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