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28 October 2026
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झूठा POCSO केस दर्ज कराने पर क्या कार्रवाई हो सकती है? धारा 22 समझें

POCSO Act की धारा 22 जानबूझकर झूठी शिकायत या गलत जानकारी की कुछ स्थितियों में दंड का प्रावधान करती है। लेकिन आरोपी का बरी हो जाना, गवाह के बयान में अंतर या अभियोजन का आरोप साबित न कर पाना अपने आप शिकायत को जानबूझकर झूठा सिद्ध नहीं करता। कमजोर साक्ष्य, संदेह का लाभ और दुर्भावनापूर्ण गढ़ी हुई शिकायत अलग कानूनी स्थितियाँ हैं।
मामलाspecific assessment. यह सामान्य कानूनी जानकारी है। किसी विशेष मामले में दस्तावेज, लागू कानून और वर्तमान न्यायिक निर्णय देखकर सलाह लें।
मुख्य बातें
  • कानूनी संदर्भ तारीख: 28 October 2026 झूठी शिकायत और साबित न हुआ आरोप अलग हैं POCSO Act की धारा 22 जानबूझकर झूठी शिकायत या गलत जानकारी की कुछ स्थितियों में दंड का प्रावधान करती है।
  • लेकिन आरोपी का बरी हो जाना, गवाह के बयान में अंतर या अभियोजन का आरोप साबित न कर पाना अपने आप शिकायत को जानबूझकर झूठा सिद्ध नहीं करता।
  • कमजोर साक्ष्य, संदेह का लाभ और दुर्भावनापूर्ण गढ़ी हुई शिकायत अलग कानूनी स्थितियाँ हैं।

विस्तृत विवेचना

कानून और प्रक्रिया की समझ

कानूनी संदर्भ तारीख: 28 October 2026

झूठी शिकायत और साबित न हुआ आरोप अलग हैं

POCSO Act की धारा 22 जानबूझकर झूठी शिकायत या गलत जानकारी की कुछ स्थितियों में दंड का प्रावधान करती है। लेकिन आरोपी का बरी हो जाना, गवाह के बयान में अंतर या अभियोजन का आरोप साबित न कर पाना अपने आप शिकायत को जानबूझकर झूठा सिद्ध नहीं करता। कमजोर साक्ष्य, संदेह का लाभ और दुर्भावनापूर्ण गढ़ी हुई शिकायत अलग कानूनी स्थितियाँ हैं। [1]

इसलिए किसी अंतिम आदेश में दर्ज वास्तविक कारण पढ़ना आवश्यक है। अदालत ने उम्र साबित नहीं मानी, पहचान संदिग्ध पाई या घटना को झूठा और दुर्भावनापूर्ण माना, इन निष्कर्षों का अर्थ एक जैसा नहीं है। केवल सोशल मीडिया पर शिकायत झूठी बताने से धारा 22 का अपराध स्थापित नहीं होता। संबंधित प्रावधान के आवश्यक तथ्य और मंशा की जाँच जरूरी है।

धारा 22(1) की मुख्य शर्तें

धारा 22(1) में धाराएँ 3, 5, 7 और 9 से संबंधित झूठी शिकायत या जानकारी का उल्लेख है। उसे केवल अपमानित करने, धन ऐंठने, धमकाने या बदनाम करने के आशय से देना आवश्यक तत्व है। सजा छह महीने तक कारावास, जुर्माना या दोनों हो सकती है। इसे किसी भी असफल POCSO शिकायत पर अपने आप लागू होने वाली सजा न समझें। [1]

व्यवहार में आरोपित व्यक्ति को पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखना चाहिए। शिकायत की प्रति, पहले के विवाद, प्रमाणित संदेश, संबंधित वित्तीय माँग और अंतिम आदेश की भूमिका परिस्थिति के अनुसार हो सकती है। संदेश का अधूरा screenshot या सुनी हुई बात पर्याप्त निष्कर्ष नहीं है। रिकॉर्ड की प्रामाणिकता और संदर्भ को उचित कानूनी प्रक्रिया में दिखाना होगा, न कि निजी धमकी देकर स्वीकार करवाना।

बच्चे और वयस्क के लिए अलग सुरक्षा

धारा 22(2) के अनुसार बच्चे द्वारा झूठी शिकायत या जानकारी देने पर उस बच्चे को इस प्रावधान के अंतर्गत सजा नहीं दी जाएगी। इसका उल्लेख हटाकर यह कहना कि शिकायत करने वाले प्रत्येक बच्चे को जेल हो सकती है, गलत और डराने वाला होगा। बच्चे के कथन की विश्वसनीयता की जाँच और बच्चे को दंड देने का प्रश्न अलग हैं। [1]

धारा 22(3) उस वयस्क की स्थिति संबोधित करती है जो जानबूझकर किसी बच्चे के विरुद्ध झूठी शिकायत या जानकारी देकर उसे अधिनियम के अपराध में पीड़ित करता है। उसमें एक वर्ष तक कारावास, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। किसी नाबालिग आरोपी से जुड़े विवाद में उम्र, शिकायतकर्ता की जानकारी और झूठ की वास्तविक प्रकृति स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा।

सद्भावना में रिपोर्ट करने वाला व्यक्ति

धारा 19(7) सद्भावना में सूचना देने वाले व्यक्ति को नागरिक या आपराधिक दायित्व से सुरक्षा देती है। उपलब्ध जानकारी ईमानदारी से बताना और अपनी ओर से जानते हुए झूठ गढ़ना अलग बात है। परिवार, शिक्षक या अन्य रिपोर्टकर्ता को अपनी जानकारी का स्रोत स्पष्ट रखना चाहिए। जो बात स्वयं नहीं देखी उसे प्रत्यक्ष अनुभव की तरह लिखना उचित नहीं है। [1]

रिपोर्ट करने से पहले निजी जाँच के नाम पर बच्चे से बार बार पूछताछ या आरोपी से सौदेबाजी करने की जरूरत नहीं है। वहीं तथ्य ज्ञात न होने पर निश्चित आरोप बनाकर प्रसारित न करें। वास्तविक आशंका और उपलब्ध सूचना सही रूप में प्राधिकरण को देना उपयोगी है। कानून की इस सुरक्षा को जानबूझकर झूठ बोलने की छूट भी नहीं कहा जा सकता।

कार्रवाई का सही रास्ता

यदि रिकॉर्ड से दुर्भावनापूर्ण झूठ की ठोस सामग्री दिखाई दे तो वकील को FIR, संबंधित बयान, डिजिटल रिकॉर्ड और अदालत के आदेश दें। किस प्रावधान में किस सक्षम प्राधिकारी या अदालत के सामने कार्रवाई हो सकती है, यह मामले की स्थिति और लागू प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। न्यायालय में दिए साक्ष्य से जुड़े आरोपों में विशेष procedural requirements भी प्रासंगिक हो सकती हैं। [1][2]

बच्चे या गवाह से संपर्क करके शिकायत वापस लेने, भुगतान करने या बयान बदलने का दबाव न डालें। जमानत की शर्तों और गोपनीयता का पालन करें। कानूनी प्रतिक्रिया का उद्देश्य वास्तविक झूठ और उसकी आवश्यक मंशा का प्रमाण देना है। शिकायत को चुप कराने की धमकी, सार्वजनिक नामकरण या हर बरी होने को स्वतः false case बताना निष्पक्ष कानूनी उपाय का विकल्प नहीं है। किसी कार्रवाई से पहले आदेश की प्रमाणित प्रति और घटनाओं की पूरी chronology की समीक्षा कराएँ।

स्रोत

  1. Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012, amended text — NCPCR / Government of India. Definitions, offences, reporting, safeguards, Special Courts and presumptions; 2019 amendments included.
  2. Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 — India Code / Government of India. Sections 173, 183, 184, 482, 483, 528 and 531; applicable procedure and savings require case-specific assessment.

यह सामान्य कानूनी जानकारी है। किसी विशेष मामले में दस्तावेज, लागू कानून और वर्तमान न्यायिक निर्णय देखकर सलाह लें।

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Advocate Amardeep Jaiswal
लेखक के बारे में

Advocate Amardeep Jaiswal

Advocate, High Court of Madhya Pradesh, Jabalpur। भारतीय कानून, न्यायिक निर्णय और व्यावहारिक कानूनी विषयों पर जानकारीपूर्ण लेख प्रकाशित करते हैं।

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