FIR संज्ञेय अपराध की प्रारंभिक सूचना से जुड़ी है। NCR सामान्यतः असंज्ञेय अपराध की रिपोर्ट है। सामान्य लिखित या ऑनलाइन शिकायत इनमें से किसी प्रक्रिया की शुरुआत हो सकती है।
संज्ञेय मामले में पुलिस को कानून के अनुसार बिना मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति जाँच की शक्ति होती है। असंज्ञेय अपराध में सामान्यतः जाँच के लिए मजिस्ट्रेट का आदेश चाहिए। BNSS की धाराएँ 173 और 174 इन प्रक्रियाओं का आधार हैं। किसी दस्तावेज पर complaint number लिखा होने भर से उसकी कानूनी श्रेणी तय नहीं होती।
अब क्या करें?
- मिली पावती पर FIR, NCR, diary entry या petition जैसी श्रेणी देखें।
- अपराध की प्रकृति और आगे की कार्रवाई के बारे में लिखित जानकारी माँगें।
- यदि मामला असंज्ञेय बताया गया है तो मजिस्ट्रेट के समक्ष उपलब्ध प्रक्रिया समझें।
कौन-से दस्तावेज रखें?
दर्ज रिपोर्ट की प्रति, शिकायत संख्या, तारीख और संबंधित दस्तावेज।
यह गलती न करें
NCR को अदालत का अंतिम निर्णय या FIR को दोष सिद्ध होने का प्रमाण न मानें।
एक काल्पनिक उदाहरण
शिकायत की पर्ची पर एक reference number है, लेकिन FIR number नहीं। उस नंबर को FIR समझकर अगली प्रक्रिया मान लेना गलत हो सकता है। दर्ज report की category और उससे मिलने वाली कार्रवाई स्पष्ट कराएँ।
क्या FIR दर्ज होने से व्यक्ति अपराधी साबित हो जाता है?
नहीं। जाँच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही दोष का निर्णय होता है।
कानूनी आधार और उपयोगी स्रोत
यह सामान्य कानूनी जानकारी है। आपके तथ्य, लागू कानून और राज्य के नियमों के अनुसार सलाह अलग हो सकती है।