कानूनी संदर्भ तारीख: 28 October 2026
सहमति से उम्र की सीमा नहीं बदलती
POCSO में अठारह वर्ष से कम व्यक्ति बच्चा है। इस उम्र के बच्चे की कथित सहमति लैंगिक अपराध के आरोप को केवल सहमति के आधार पर समाप्त नहीं करती। यह तर्क कि बच्चा तैयार था या दोनों एक दूसरे से प्रेम करते थे, अपने आप कानूनी बचाव नहीं बनता। अपराध के संबंधित तत्व और उम्र सहित आवश्यक तथ्य फिर भी जाँचे जाते हैं। [1][3]
इस बात को इतना व्यापक भी न समझें कि हर दोस्ती, बातचीत या साथ घूमना POCSO अपराध है। कानून विशेष लैंगिक व्यवहार और निर्धारित आशय को संबोधित करता है। किसी मामले में क्या हुआ, किस उम्र में हुआ और कौन सी धारा लागू है, यह देखना जरूरी है। कथित सहमति का प्रश्न वास्तविक घटना के प्रमाण की आवश्यकता को खत्म नहीं करता।
प्रेम संबंध और विवाह के दावे
किशोर संबंधों में परिवार की आपत्ति के बाद शिकायत हो सकती है। ऐसे मामले में जन्मतिथि, घटना की तारीख, बयान और परिस्थितियों की निष्पक्ष जाँच आवश्यक है। लेकिन पारिवारिक विरोध की मौजूदगी से हर शिकायत झूठी नहीं हो जाती। उसी प्रकार संबंध के संदेश दिखाने से यह स्वतः सिद्ध नहीं होता कि घटना कानून के बाहर थी या आरोपी को निश्चित राहत मिलनी चाहिए।
बाद में विवाह कर लेना, साथ रहना या बच्चे के माता पिता की सहमति प्राप्त करना पिछली घटना को अपने आप वैध नहीं बनाता। मुकदमे का समाधान केवल विवाह प्रमाणपत्र जमा करने से नहीं होता। बाल विवाह, अन्य अपराध और संबंधित प्रक्रिया के अलग प्रश्न भी उठ सकते हैं। किसी बच्चे या परिवार पर विवाह अथवा बयान बदलने का दबाव डालना समाधान नहीं है। [1]
दोनों व्यक्ति नाबालिग हों तो
यदि आरोपी भी घटना के समय अठारह वर्ष से कम था तो Juvenile Justice Act की प्रक्रिया प्रासंगिक हो सकती है। पीड़ित और आरोपी की उम्र अलग अलग प्रमाणित करनी होगी। दो किशोरों की निकट उम्र अपने आप पूरे भारत में लागू कोई सामान्य POCSO छूट नहीं बनाती। वास्तविक भूमिका, आरोप और लागू बाल न्याय प्रावधानों की जाँच आवश्यक है। [1][2]
किसी सुधार की चर्चा, आयोग की सिफारिश या समाचार में प्रकाशित टिप्पणी को लागू कानून में संशोधन न मानें। फरवरी 2026 की सरकारी जानकारी भी अठारह वर्ष की सीमा बनाए रखने की स्थिति स्पष्ट करती है। किसी विशेष निर्णय में मिली राहत को सभी किशोर संबंधों के लिए सामान्य अनुमति बताना गलत होगा। प्रकाशन के बाद कानून बदलने पर नवीन प्रावधान दोबारा जाँचने होंगे। [3]
सहमति और बयान की स्वतंत्रता अलग बातें हैं
शारीरिक संबंध के लिए कानूनी सहमति और पुलिस या अदालत में अपनी बात स्वतंत्र रूप से बताना अलग विषय हैं। बच्चे की इच्छा, सुरक्षा, संचार जरूरत और सम्मान प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हैं। नाबालिग की सहमति बचाव नहीं होने का अर्थ यह नहीं कि बच्चे को बोलने का अवसर ही न मिले या परिवार उसकी जगह अपनी कहानी दर्ज करा दे। [1]
परिवार बच्चे का स्वाभाविक विवरण सुनकर सही रूप में बताए। संदेशों को काटकर, संदर्भ हटाकर या नई चैट बनाकर प्रस्तुत न करें। जाँच में अनुकूल और प्रतिकूल दोनों सामग्री की भूमिका हो सकती है। अगर किसी बयान के संबंध में दबाव की शिकायत है तो उसे सक्षम अधिकारी और वकील के सामने रखें। सोशल मीडिया पर निजी चैट और पहचान प्रकाशित करना उचित रास्ता नहीं है।
जमानत, समझौता और quashing का अंतर
जमानत मुकदमे के दौरान स्वतंत्रता का प्रश्न है; वह आरोप को समाप्त करने का आदेश नहीं है। निजी समझौते से POCSO मामला स्वतः compound नहीं होता। High Court में quashing अलग कानूनी कसौटी पर माँगी जाती है। किसी विशेष मामले की असाधारण परिस्थितियाँ अदालत के सामने रखी जा सकती हैं, लेकिन केवल कथित सहमति या बाद के विवाह से राहत की गारंटी नहीं मिलती। [1][4]
सलाह लेते समय FIR, उम्र के प्रमाण, मूल संदेश, संबंधित बयान और वर्तमान court orders साथ दें। घटना की तारीख तथा लागू प्रक्रिया के अनुसार याचिका और राहत तय होगी। सबसे उपयोगी तैयारी तथ्य साफ रखना है: कानून से असहमति, संबंध की भावनात्मक वास्तविकता और अपराध के कानूनी तत्व तीन अलग प्रश्न हैं, जिन्हें एक ही दलील में मिला देना अक्सर भ्रम पैदा करता है।
स्रोत
- Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012, amended text — NCPCR / Government of India. Definitions, offences, reporting, safeguards, Special Courts and presumptions; 2019 amendments included.
- Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 — India Code / Government of India. Child accused, applicable juvenile justice framework and section 94 age determination.
- Protection of Children from Sexual Offences Act: age of consent, 6 February 2026 — Ministry of Women and Child Development / PIB. Government explanation of the retained eighteen-year threshold; the Act governs.
- Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 — India Code / Government of India. Sections 173, 183, 184, 482, 483, 528 and 531; applicable procedure and savings require case-specific assessment.
यह सामान्य कानूनी जानकारी है। किसी विशेष मामले में दस्तावेज, लागू कानून और वर्तमान न्यायिक निर्णय देखकर सलाह लें।