कानून और न्याय पर जानकारी
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आपसी सहमति से तलाक कैसे होता है और कितना समय लगता है?
आपसी सहमति का तलाक अदालत की decree से होता है। केवल समझौता लिखने या अलग रहने से विवाह समाप्त नहीं होता। प्रक्रिया उस कानून पर निर्भर है जिसके तहत विवाह और तलाक का मामला चलता है।
लेखक
Advocate Amardeep Jaiswal
Advocate, High Court of Madhya Pradesh, Jabalpur
मुख्य बातें
- आपसी सहमति का तलाक अदालत की decree से होता है।
- केवल समझौता लिखने या अलग रहने से विवाह समाप्त नहीं होता।
- प्रक्रिया उस कानून पर निर्भर है जिसके तहत विवाह और तलाक का मामला चलता है।हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13B में कम-से-कम एक वर्ष अलग रहने, साथ न रह पाने और विवाह समाप्त करने की सहमति जैसी शर्ते…
विस्तृत विवेचना
कानून और प्रक्रिया की समझ
आपसी सहमति का तलाक अदालत की decree से होता है। केवल समझौता लिखने या अलग रहने से विवाह समाप्त नहीं होता। प्रक्रिया उस कानून पर निर्भर है जिसके तहत विवाह और तलाक का मामला चलता है।
हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13B में कम-से-कम एक वर्ष अलग रहने, साथ न रह पाने और विवाह समाप्त करने की सहमति जैसी शर्तें हैं। दोनों motions के बीच छह महीने की अवधि को उपयुक्त परिस्थितियों में माफ किया जा सकता है; waiver अपने आप नहीं मिलता। भरणपोषण, बच्चों और संपत्ति पर स्पष्ट समझौता प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाता है।
अब क्या करें?
- लागू विवाह कानून और सक्षम Family Court की पहचान करें।
- आर्थिक भुगतान, स्त्रीधन, बच्चों की व्यवस्था और लंबित मामलों पर स्पष्ट शर्तें लिखें।
- संयुक्त याचिका, statements और आवश्यक अगली कार्यवाही के बाद decree की प्रति लें।
कौन-से दस्तावेज रखें?
विवाह प्रमाण, पहचान, निवास, फोटो, बच्चों के दस्तावेज और settlement।
यह गलती न करें
एक निश्चित रकम देकर guaranteed सात दिन या एक दिन में तलाक का वादा सभी मामलों पर लागू नहीं है।
एक काल्पनिक उदाहरण
पति-पत्नी divorce पर सहमत हैं लेकिन बच्चे की छुट्टियों और settlement payment की तारीख पर नहीं। केवल ‘mutual’ लिखना पर्याप्त नहीं। इन शर्तों को स्पष्ट करना और decree तक आवश्यक प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है।
क्या consent बाद में वापस ली जा सकती है?
Decree से पहले सहमति का बने रहना महत्वपूर्ण है; किसी वापसी की स्थिति में कानूनी परिणाम जाँचें।
कानूनी आधार और उपयोगी स्रोत
यह सामान्य कानूनी जानकारी है। आपके तथ्य, लागू कानून और राज्य के नियमों के अनुसार सलाह अलग हो सकती है।
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लेखक के बारे में
Advocate Amardeep Jaiswal
Advocate, High Court of Madhya Pradesh, Jabalpur।
भारतीय कानून, न्यायिक निर्णय और व्यावहारिक कानूनी विषयों पर जानकारीपूर्ण लेख प्रकाशित करते हैं।
संपादकीय टिप्पणी: विश्लेषण और टिप्पणियाँ लेखक की समझ तथा राय दर्शाती हैं। कानून, तथ्य और न्यायिक स्थिति में बदलाव संभव है; किसी कदम से पहले मूल स्रोत और अपने मामले की स्थिति की जाँच करें।