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26 October 2026
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कानून और न्याय पर जानकारी
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Stop payment करा देने से cheque bounce case रुक जाता है क्या?

नहीं, stop-payment instruction अपने आप धारा 138 की liability समाप्त नहीं करता। यदि enforceable debt और अन्य कानूनी शर्तें मौजूद हों तो मामला बन सकता है।
मुख्य बातें
  • नहीं, stop-payment instruction अपने आप धारा 138 की liability समाप्त नहीं करता।
  • यदि enforceable debt और अन्य कानूनी शर्तें मौजूद हों तो मामला बन सकता है।Cheque गुम होने, चोरी, misuse या disputed transaction में बैंक को रोक का निर्देश उपयोगी हो सकता है, लेकिन उसका वास्तव…
  • भुगतान रोकना और मूल debt का न होना अलग बातें हैं।

विस्तृत विवेचना

कानून और प्रक्रिया की समझ

नहीं, stop-payment instruction अपने आप धारा 138 की liability समाप्त नहीं करता। यदि enforceable debt और अन्य कानूनी शर्तें मौजूद हों तो मामला बन सकता है।

Cheque गुम होने, चोरी, misuse या disputed transaction में बैंक को रोक का निर्देश उपयोगी हो सकता है, लेकिन उसका वास्तविक कारण और समय का record रखें। भुगतान रोकना और मूल debt का न होना अलग बातें हैं। Notice मिलने पर उसे अनदेखा करने से महत्वपूर्ण defence समय पर सामने नहीं आएगा।

अब क्या करें?

  1. बैंक को stop-payment का सही कारण लिखित में दें और acknowledgement लें।
  2. मूल transaction, repayments और dispute के documents जुटाएँ।
  3. Notice या summons पर उपयुक्त जवाब तथा court response दें।

कौन-से दस्तावेज रखें?

Stop-payment request, bank record, agreement, payment proof और notice।

यह गलती न करें

ऋण से बचने के लिए cheque खोने की झूठी रिपोर्ट करना अलग कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है।

एक काल्पनिक उदाहरण

Drawer ने genuine debt का cheque दिया और फिर payment रोक दी। Bank में रोक दर्ज होने से underlying liability गायब नहीं होती। दूसरी स्थिति में debt पहले चुका दिया गया हो तो उसका प्रमाण अलग defence बन सकता है।

क्या बैंक रोक लगा दे तो मामला जीत गए?

नहीं। बैंक का payment रोकना और अदालत में liability तय होना अलग प्रक्रियाएँ हैं।

कानूनी आधार और उपयोगी स्रोत

यह सामान्य कानूनी जानकारी है। आपके तथ्य, लागू कानून और राज्य के नियमों के अनुसार सलाह अलग हो सकती है।

कानूनी अस्वीकरण

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Advocate Amardeep Jaiswal
लेखक के बारे में

Advocate Amardeep Jaiswal

Advocate, High Court of Madhya Pradesh, Jabalpur। भारतीय कानून, न्यायिक निर्णय और व्यावहारिक कानूनी विषयों पर जानकारीपूर्ण लेख प्रकाशित करते हैं।

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