आपसी सहमति न होने पर भी लागू कानून में उपलब्ध आधार पर contested divorce माँगा जा सकता है। दूसरे पक्ष का इनकार अकेले याचिका रोकता नहीं, लेकिन कानूनी आधार और साक्ष्य आवश्यक हैं।
हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 में cruelty, desertion और अन्य निर्धारित आधार हैं। Desertion जैसे आधार में अवधि और आवश्यक तत्व मायने रखते हैं। केवल अनबन या अलग रहने की इच्छा हर अदालत में अपने आप तलाक का पर्याप्त आधार नहीं है। अन्य personal laws की शर्तें अलग हो सकती हैं।
अब क्या करें?
- विवाह कानून के अनुसार उपलब्ध आधार और घटनाओं की तारीखें पहचानें।
- Messages, medical record और अन्य वैध साक्ष्य जुटाएँ।
- याचिका, service, जवाब और evidence की प्रक्रिया के साथ interim जरूरतें भी रखें।
कौन-से दस्तावेज रखें?
विवाह विवरण, घटनाक्रम, निवास, संबंधित संवाद और पूर्व आदेश।
यह गलती न करें
झूठे आरोप जोड़ना या निजी रिकॉर्ड गैरकानूनी तरीके से हासिल करना मामले को नुकसान पहुँचा सकता है।
एक काल्पनिक उदाहरण
एक spouse कहता है कि वह कभी consent नहीं देगा। दूसरा, यदि लागू कानून का आधार और साक्ष्य रखता है, contested petition पर विचार कर सकता है। परिणाम केवल विरोध या सहमति के एक वाक्य से तय नहीं होता।
क्या दूसरा पक्ष अदालत न आए तो तुरंत तलाक मिलेगा?
नहीं। उचित service और अदालत की प्रक्रिया के बाद भी याचिकाकर्ता को अपना आधार सिद्ध करना होता है।
कानूनी आधार और उपयोगी स्रोत
यह सामान्य कानूनी जानकारी है। आपके तथ्य, लागू कानून और राज्य के नियमों के अनुसार सलाह अलग हो सकती है।