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04 November 2026
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Cheque bounce में धारा 143A का 20% आदेश: जवाब और चुनौती कैसे तैयार करें?

धारा 143A में 20% भुगतान हर मामले में अनिवार्य नहीं है। कोर्ट को प्रथमदृष्टया मामला, संभावित बचाव और रकम पर कारण देने चाहिए; कंपनी के authorized signatory और drawer का अंतर भी महत्वपूर्ण है।
मुख्य बातें
  • सीधा जवाब NI Act की Section 138 के cheque-bounce मुकदमे में धारा 143A के अंतर्गत trial court अंतरिम मुआवजा देने का आदेश कर सकती है।
  • अधिकतम सीमा cheque amount का बीस प्रतिशत है; यह हर आरोपी पर स्वतः लगने वाला fixed deposit नहीं है।
  • आदेश मिलने पर समय-सीमा और वसूली का असर समझें, application/reply का रिकॉर्ड लें और कानूनी आधार पर उचित चुनौती या राहत माँगें।

विस्तृत विवेचना

कानून और प्रक्रिया की समझ

सीधा जवाब

NI Act की Section 138 के cheque-bounce मुकदमे में धारा 143A के अंतर्गत trial court अंतरिम मुआवजा देने का आदेश कर सकती है। अधिकतम सीमा cheque amount का बीस प्रतिशत है; यह हर आरोपी पर स्वतः लगने वाला fixed deposit नहीं है। आदेश मिलने पर समय-सीमा और वसूली का असर समझें, application/reply का रिकॉर्ड लें और कानूनी आधार पर उचित चुनौती या राहत माँगें। आदेश को केवल गलत समझकर नजरअंदाज करना सुरक्षित नहीं।

आदेश किस चरण में दिया जा सकता है?

Summary trial या summons case में accused के not guilty plea के बाद, और दूसरे प्रकार के trial में charge frame होने पर provision लागू होता है। यह अंतिम दोषसिद्धि से पहले की व्यवस्था है। इसलिए यह धारा 138 में अंतिम fine/compensation या appeal के दौरान Section 148 की deposit व्यवस्था से अलग है। ‘दोनों में 20% है’ कहकर दोनों का एक ही test लगाना गलत होगा।

Supreme Court ने क्या स्पष्ट किया?

Rakesh Ranjan Shrivastava v. State of Jharkhand, 15 मार्च 2024, 2024 INSC 205 में Supreme Court ने धारा 143A की power को discretionary माना। खासकर paragraphs 14–16 और 19 में बताया गया कि complainant के प्रथमदृष्टया मामले और accused के reply में उठे बचाव को देखना होगा। केवल Section 139 की rebuttable presumption अपने आप interim compensation का पर्याप्त कारण नहीं है।

अगर prima facie plausible defence दिखता है तो court आदेश न देने का विवेक इस्तेमाल कर सकती है। Transaction की प्रकृति, parties का संबंध, financial distress और paying capacity जैसे तथ्य प्रासंगिक हो सकते हैं। राहत दी जाए तब भी मात्रा पर अलग विचार और संक्षिप्त कारण चाहिए। इसका अर्थ mini-trial कराना या guilt का अंतिम निर्णय करना नहीं है।

Reply में क्या लिखें?

  1. आवेदन की maintainability और सही trial stage पर अपना स्पष्ट पक्ष रखें।
  2. वास्तविक लेनदेन, बकाया, भुगतान, goods return या disputed liability का संक्षिप्त chronology दें।
  3. जिन documents से बचाव प्रथमदृष्टया मजबूत होता है, उन्हें annexure number के साथ जोड़ें।
  4. Financial hardship का दावा हो तो आय, देनदारी और आवश्यक खर्च का विश्वसनीय रिकॉर्ड दें।
  5. मुख्य रूप से application अस्वीकार करने, या वैकल्पिक रूप से कम उचित रकम तय करने का कारणयुक्त अनुरोध रखें।

केवल ‘security cheque था’ लिखना हर मामले में पूरा बचाव नहीं है। Presentation के समय legally enforceable liability थी या नहीं, उसका वास्तविक रिकॉर्ड देखें। Signature admission, payment entries और लिखित communications के बारे में विरोधाभासी बयान न दें।

कंपनी के cheque में अलग महत्वपूर्ण प्रश्न

Shri Gurudatta Sugars Marketing Pvt. Ltd. v. Prithviraj Sayajirao Deshmukh, 24 जुलाई 2024, 2024 INSC 551 के paragraphs 28–35 के अनुसार company का authorized signatory धारा 143A के लिए केवल हस्ताक्षर करने से drawer नहीं बन जाता। Company की legal identity और signatory की identity अलग हैं। Section 141 के तहत criminal responsibility की संभावना को धारा 143A में निजी interim payment की जिम्मेदारी के बराबर न मानें।

इसलिए cheque किस account से जारी हुआ, drawer कौन है और order किस व्यक्ति को payment के लिए कह रहा है—यह शुरू में ही जाँचें। दूसरी ओर किसी व्यक्ति का अपना cheque हो तो company-case वाला सिद्धांत बिना तथ्य देखे लागू नहीं होगा।

भुगतान, अतिरिक्त समय और refund

Act के अनुसार रकम आदेश से साठ दिन में चुकानी है; sufficient cause पर अधिकतम तीस दिन का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है। यह विस्तार अपने आप नहीं मिलता। निर्देश का पालन कठिन हो तो अवधि के भीतर उचित application दें। Non-payment में fine की तरह recovery का प्रावधान है; Rakesh निर्णय का paragraph 12 यह भी स्पष्ट करता है कि non-payment से prosecution का बचाव करने का अधिकार समाप्त नहीं होता।

अंत में acquittal होने पर complainant से paid interim compensation और Act में निर्धारित RBI bank-rate आधारित interest वापस कराने की दिशा होती है। अंतिम fine/compensation में पहले paid/recovered amount का समायोजन भी देखा जाना चाहिए। Refund practically recover करने के लिए order, payment receipt और आगे की compliance का रिकॉर्ड जरूरी है।

चुनौती किस प्रकार तैयार करें?

Certified order, complaint, 143A application, अपना reply और relevant documents लें। देखें कि आदेश ने discretion, defence और quantum पर कारण दिए या सिर्फ बीस प्रतिशत लिख दिया। आदेश की प्रकृति, स्थानीय precedent और लागू procedure देखकर revision/inherent jurisdiction या दूसरे उपयुक्त उपाय की maintainability जाँचें। हर आदेश पर एक जैसी appeal उपलब्ध मानना गलत है। Challenge दाखिल होते ही payment deadline या recovery अपने आप नहीं रुकती; जरूरत हो तो interim protection अलग माँगें।

पुराने मामले और एक उदाहरण

G.J. Raja v. Tejraj Surana, 30 जुलाई 2019, paragraph 22 में Section 143A को prospective बताया गया है। Offence कब complete हुआ, यह पुराने मामलों में महत्वपूर्ण है; केवल cheque पर लिखी तारीख से निष्कर्ष न निकालें।

मान लें ₹10 लाख के cheque पर court ने बिना reply पर चर्चा किए ₹2 लाख का आदेश किया। ₹2 लाख अधिकतम बीस प्रतिशत है, लेकिन maximum होना reasoned discretion का विकल्प नहीं। Plausible payment dispute और hardship रिकॉर्ड के साथ order की reasoning पर चुनौती तैयार की जा सकती है; नतीजा facts और court के विवेक पर निर्भर करेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या हर cheque case में 20% देना ही पड़ेगा?

नहीं। धारा 143A में discretion और अधिकतम सीमा है; Section 148 की appellate व्यवस्था अलग है।

क्या order मिलने से मैं दोषी सिद्ध हो गया?

नहीं। यह interim stage है; trial में defence और evidence के अधिकार बने रहते हैं।

सबसे जरूरी सावधानी?

Deadline, payer की सही पहचान, reasoned order और पहले हुए भुगतान—इन चारों को साथ जाँचें।

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स्रोत-जाँच: 3 नवंबर 2026।

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Advocate Amardeep Jaiswal
लेखक के बारे में

Advocate Amardeep Jaiswal

Advocate, High Court of Madhya Pradesh, Jabalpur। भारतीय कानून, न्यायिक निर्णय और व्यावहारिक कानूनी विषयों पर जानकारीपूर्ण लेख प्रकाशित करते हैं।

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