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26 October 2026
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बिजली चोरी के आरोप में आपूर्ति बहाली: आकलन, अपील और विशेष न्यायालय की नागरिक देयता

चोरी के मामलों में बहाली हेतु “assessed amount” सामान्यतः Section 126 और लागू Supply Code की प्रक्रिया से तय होगा। उपभोक्ता को provisional assessment पर आपत्ति और उचित सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए। अंतिम आकलन के विरुद्ध Section 127 की अपील उपलब्ध है; अपील में तय रकम बहाली के प्रयोजन तक सीमित है। Court: The Supreme Court of India Case Name: DAKSHIN GUJARAT VIJ COMPANY LIMITED VS. VAIBHAV METAL CRUSHER Case Number: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 17868/2024 और Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 8778/2025 Case-number verification: निर्णय में दोनों Civil Appeal के नंबर रिक्त हैं और केवल संबंधित SLP नंबर दिए गए हैं। मेटाडेटा का C.A. No. 13894/2026 निर्णय के पाठ में नहीं है, इसलिए उ…
legal.courtThe Supreme Court of India
legal.caseDAKSHIN GUJARAT VIJ COMPANY LIMITED VS. VAIBHAV METAL CRUSHER Case Number: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 17868/2024 और Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 8778/2025
legal.benchमाननीय न्यायमूर्ति Manoj Misra और माननीय न्यायमूर्ति K.V. Viswanathan
legal.citation2026 INSC 1157 Decision
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  • चोरी के मामलों में बहाली हेतु “assessed amount” सामान्यतः Section 126 और लागू Supply Code की प्रक्रिया से तय होगा।
  • उपभोक्ता को provisional assessment पर आपत्ति और उचित सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए।
  • अंतिम आकलन के विरुद्ध Section 127 की अपील उपलब्ध है; अपील में तय रकम बहाली के प्रयोजन तक सीमित है।

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चोरी के मामलों में बहाली हेतु “assessed amount” सामान्यतः Section 126 और लागू Supply Code की प्रक्रिया से तय होगा। उपभोक्ता को provisional assessment पर आपत्ति और उचित सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए। अंतिम आकलन के विरुद्ध Section 127 की अपील उपलब्ध है; अपील में तय रकम बहाली के प्रयोजन तक सीमित है।

Court: The Supreme Court of India

Case Name: DAKSHIN GUJARAT VIJ COMPANY LIMITED VS. VAIBHAV METAL CRUSHER

Case Number: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 17868/2024 और Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 8778/2025

Case-number verification: निर्णय में दोनों Civil Appeal के नंबर रिक्त हैं और केवल संबंधित SLP नंबर दिए गए हैं। मेटाडेटा का C.A. No. 13894/2026 निर्णय के पाठ में नहीं है, इसलिए उसे शामिल नहीं किया गया।

Bench: माननीय न्यायमूर्ति Manoj Misra और माननीय न्यायमूर्ति K.V. Viswanathan

Neutral Citation: 2026 INSC 1157

Decision Date: 2026-10-26

मामला क्या था?

दोनों अपीलें गुजरात में बिजली चोरी के आरोपों के बाद जारी supplementary bills और बिजली आपूर्ति बहाली से जुड़े उच्च न्यायालय के आदेशों से उत्पन्न हुईं। एक मामले में उच्च न्यायालय ने उपभोक्ता को 50 प्रतिशत राशि जमा करने पर आपूर्ति बहाल करने और आकलन पर आपत्ति देने की अनुमति दी। दूसरे मामले में मामला एकल न्यायाधीश के पास नए सिरे से निर्णय के लिए भेजा गया। वितरण लाइसेंसियों ने तर्क दिया कि चोरी के मामलों में Section 126 की आपत्ति और Section 127 की अपील की प्रक्रिया लागू नहीं होती तथा नागरिक देयता केवल विशेष न्यायालय तय कर सकता है।

मुख्य कानूनी प्रश्न

बिजली चोरी के आरोप में Section 135(1A) के तहत काटी गई आपूर्ति बहाल कराने के लिए देय “assessed amount” किस प्रक्रिया से तय होगा; क्या उपभोक्ता को आकलन पर आपत्ति और Section 127 के तहत अपील का अवसर है; तथा इन निर्धारणों का Section 154(5) के तहत विशेष न्यायालय द्वारा तय नागरिक देयता से क्या संबंध है?

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि Supply Code में बिजली चोरी के लिए अलग आकलन-प्रक्रिया न होने पर, Section 135(1A) के तीसरे proviso के तहत आपूर्ति बहाली के लिए जमा की जाने वाली राशि, Section 126 और लागू Supply Code की प्रक्रिया के अनुसार तय होगी। उपभोक्ता को provisional assessment पर आपत्ति देने और अंतिम आकलन के विरुद्ध Section 127 में अपील करने का अवसर है। Section 127 का निर्धारण आपूर्ति बहाली के उद्देश्य तक सीमित है; अभियोजन होने पर विशेष न्यायालय Section 154(5) के तहत नागरिक देयता तय कर सकता है और अतिरिक्त जमा राशि Section 154(6) के अनुसार लौटाई जाएगी। दोनों अपीलें खारिज की गईं; पहले मामले में उच्च न्यायालय के आदेश के संबंध में यह स्पष्टीकरण जोड़ा गया।

न्यायालय की प्रमुख reasoning

न्यायालय ने पाया कि Electricity Act में चोरी के मामलों के आकलन के लिए Section 126 से अलग कोई स्पष्ट प्रक्रिया नहीं है और गुजरात Supply Code भी आकलन के लिए एक साझा सूत्र देता है। Section 135(1A) का तीसरा proviso आपूर्ति शीघ्र बहाल कराने का उपाय है; विशेष न्यायालय के अंतिम नागरिक-देयता निर्धारण की प्रतीक्षा करना इस उद्देश्य को निष्फल कर सकता है। इसलिए provisional assessment, आपत्ति और सुनवाई की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। Section 127 की अपील का अंतिम प्रभाव केवल बहाली के लिए आवश्यक राशि पर है; वह विशेष न्यायालय की Section 154(5) वाली शक्ति को समाप्त नहीं करता। न्यायालय ने यह भी कहा कि बहाली की मांग पर उच्च न्यायालय को चोरी के आरोप की गंभीरता और मामले के तथ्यों को देखते हुए सतर्कता बरतनी चाहिए।

निर्णय के मुख्य बिंदु

  • चोरी के मामलों में बहाली हेतु “assessed amount” सामान्यतः Section 126 और लागू Supply Code की प्रक्रिया से तय होगा।
  • उपभोक्ता को provisional assessment पर आपत्ति और उचित सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए।
  • अंतिम आकलन के विरुद्ध Section 127 की अपील उपलब्ध है; अपील में तय रकम बहाली के प्रयोजन तक सीमित है।
  • अभियोजन होने पर विशेष न्यायालय Section 154(5) के तहत नागरिक देयता का स्वतंत्र निर्धारण कर सकता है।
  • विशेष न्यायालय द्वारा तय देयता से अधिक जमा रकम Section 154(6) के अनुसार वापस की जानी है।

इस निर्णय का व्यावहारिक प्रभाव

बिजली चोरी के आरोप में कनेक्शन कटने पर उपभोक्ता बहाली के लिए Section 126 और लागू Supply Code के अनुसार तय राशि जमा कर सकता है तथा आकलन को चुनौती दे सकता है। अपील में तय राशि बहाली के प्रयोजन के लिए लागू होगी, लेकिन अभियोजन की स्थिति में विशेष न्यायालय की नागरिक-देयता संबंधी शक्ति बनी रहेगी। यदि विशेष न्यायालय की तय देयता जमा राशि से कम हो, तो अतिरिक्त रकम लौटाई जानी है। उच्च न्यायालय prima facie मनमाने provisional assessment के मामले में कारण दर्ज करके, मांग की कम-से-कम 50 प्रतिशत राशि जमा कराने पर बहाली का आदेश दे सकता है; यह स्वतः मिलने वाला अधिकार नहीं है।

Source check: निर्णय 26 अक्टूबर 2026 का है और स्वयं REPORTABLE अंकित है। इसमें दो संबंधित अपीलें हैं; निर्णय का पाठ उनके Civil Appeal नंबर रिक्त रखता है।
Advocate Amardeep Jaiswal
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Advocate Amardeep Jaiswal

Advocate, High Court of Madhya Pradesh, Jabalpur। भारतीय कानून, न्यायिक निर्णय और व्यावहारिक कानूनी विषयों पर जानकारीपूर्ण लेख प्रकाशित करते हैं।

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