CoC की मंज़ूरी के बाद Resolution Plan, CoC और SRA पर बाध्यकारी है। CoC द्वारा स्वीकृत योजना को NCLT के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के बाद Section 12-A के जरिए वापस नहीं लिया जा सकता। NCLT का परीक्षण Sections 30(2) और 31 के वैधानिक मानदंडों तक सीमित है; वह योजना में एकतरफा बदलाव नहीं कर सकता।
Court: The Supreme Court of India
Case Name: BANK OF INDIA VS. S.M KAMAL PASHA
Case Number: Civil Appeal No. 12045 of 2026
Bench: माननीय न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और माननीय न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन
Neutral Citation: 2026 INSC 1154
Decision Date: 2026-10-26
मामला क्या था?
CoC ने Resolution Plan को मंज़ूरी दी थी, लेकिन उसके बाद Corporate Debtor की वित्तीय स्थिति में सुधार और योजना के क्रियान्वयन में देरी का हवाला देकर CoC ने योजना वापस लेने तथा नया Form-G जारी करने की मांग की। Corporate Debtor की holding company ने अलग से One-Time Settlement (OTS) के आधार पर CIRP समाप्त करने की मांग की। NCLAT ने CoC को योजना वापस लेने का अधिकार न मानते हुए, योजना की पुष्टि और holding company की अर्जी पर NCLT द्वारा विचार का निर्देश दिया।
मुख्य कानूनी प्रश्न
क्या Committee of Creditors (CoC), Resolution Plan को बहुमत से मंज़ूरी देकर उसे Adjudicating Authority के समक्ष पुष्टि के लिए प्रस्तुत करने के बाद, Corporate Debtor की वित्तीय स्थिति सुधरने या देरी होने के आधार पर उस मंज़ूरी को वापस ले सकती है?
माननीय सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
माननीय सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि CoC द्वारा Resolution Plan की मंज़ूरी के बाद, उसे Adjudicating Authority के समक्ष प्रस्तुत किए जाने पर न तो CIRP आवेदन और न ही स्वीकृत योजना वापस ली जा सकती है। Resolution Plan, CoC और Successful Resolution Applicant (SRA) के बीच बाध्यकारी है। फिर भी, NCLT को Section 30(2) की शर्तों के अनुपालन की जांच कर Section 31 के तहत निर्णय करना है। केवल Corporate Debtor की बेहतर लाभप्रदता योजना की मंज़ूरी अस्वीकार करने का आधार नहीं है। अपील निस्तारित हुई और संबंधित अर्जियों पर NCLT द्वारा साथ में विचार करने का निर्देश दिया गया।
न्यायालय की प्रमुख reasoning
न्यायालय ने Ebix Singapore के सिद्धांत को CoC पर भी लागू माना: IBC में CoC द्वारा स्वीकृत योजना से पीछे हटने का कोई प्रावधान नहीं है। Section 12-A के तहत CIRP से वापसी की व्यवस्था, CoC की योजना-मंज़ूरी के बाद स्वीकृत Resolution Plan वापस लेने का रास्ता नहीं देती। Sections 30(2) और 31 को साथ पढ़ते हुए, न्यायालय ने कहा कि NCLT को योजना की वैधानिक शर्तों और उचित वितरण की जांच करनी है; वह CoC की व्यावसायिक समझ को अपने विचार से प्रतिस्थापित नहीं कर सकता। CoC का योजना लागू होने तक हित बना रह सकता है, लेकिन इससे योजना वापस लेने का अधिकार नहीं मिलता।
निर्णय के मुख्य बिंदु
- CoC की मंज़ूरी के बाद Resolution Plan, CoC और SRA पर बाध्यकारी है।
- CoC द्वारा स्वीकृत योजना को NCLT के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के बाद Section 12-A के जरिए वापस नहीं लिया जा सकता।
- NCLT का परीक्षण Sections 30(2) और 31 के वैधानिक मानदंडों तक सीमित है; वह योजना में एकतरफा बदलाव नहीं कर सकता।
- Corporate Debtor की सुधरी हुई लाभप्रदता अकेले योजना की मंज़ूरी अस्वीकार करने का आधार नहीं है।
- NCLT को योजना-पुष्टि और holding company की OTS अर्जी पर साथ में विचार करना होगा।
इस निर्णय का व्यावहारिक प्रभाव
CoC और SRA को योजना की मंज़ूरी के बाद केवल बदली हुई वित्तीय परिस्थितियों या देरी के आधार पर उससे हटने का अधिकार नहीं है। NCLT को योजना की पुष्टि पर Section 30(2) के अनुपालन के आधार पर निर्णय करना होगा; बेहतर वित्तीय स्थिति अपने-आप में अस्वीकृति का कारण नहीं है। holding company की OTS अर्जी पर भी NCLT को साथ में विचार करना है।