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26 October 2026
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The A.P. State Wakf Board बनाम Syed Masood Ahmed: अधिसूचित Wakf भूमि पर निषेधाज्ञा बहाल

Wakf Act, 1954 के अंतर्गत सर्वेक्षण के बाद जारी Gazette notification को भूमि के Wakf स्वरूप के समर्थन में महत्वपूर्ण माना गया। निर्णय में Section 5(2) के तहत सूची प्रकाशित होने के बाद विवाद उठाने की एक वर्ष की अवधि का उल्लेख है; अवधि की गणना को न्यायिक व्याख्या के अनुसार जानकारी की तारीख से जोड़ा गया। कथित विक्रेताओं ने अधिसूचना को समय-सीमा में चुनौती नहीं दी थी और प्रतिवादियों ने बाद में जानकारी मिलने का तर्क भी नहीं उठाया। Court: The Supreme Court of India Case Name: THE A.P. STATE WAKF BOARD, (NOW TELANGANA STATE WAKF BOARD) VS. SYED MASOOD AHMED Case Number: Civil Appeal No. 2804 of 2024 Bench: माननीय न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और माननीय न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन Neutral Citation:…
legal.courtThe Supreme Court of India
legal.caseTHE A.P. STATE WAKF BOARD, (NOW TELANGANA STATE WAKF BOARD) VS. SYED MASOOD AHMED Case Number: Civil Appeal No. 2804 of 2024
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legal.citation2026 INSC 1152 Decision
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  • Wakf Act, 1954 के अंतर्गत सर्वेक्षण के बाद जारी Gazette notification को भूमि के Wakf स्वरूप के समर्थन में महत्वपूर्ण माना गया।
  • निर्णय में Section 5(2) के तहत सूची प्रकाशित होने के बाद विवाद उठाने की एक वर्ष की अवधि का उल्लेख है; अवधि की गणना को न्यायिक व्याख्या के अनुसार जानकारी की तारीख से जोड़ा गया।
  • कथित विक्रेताओं ने अधिसूचना को समय-सीमा में चुनौती नहीं दी थी और प्रतिवादियों ने बाद में जानकारी मिलने का तर्क भी नहीं उठाया।

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Wakf Act, 1954 के अंतर्गत सर्वेक्षण के बाद जारी Gazette notification को भूमि के Wakf स्वरूप के समर्थन में महत्वपूर्ण माना गया। निर्णय में Section 5(2) के तहत सूची प्रकाशित होने के बाद विवाद उठाने की एक वर्ष की अवधि का उल्लेख है; अवधि की गणना को न्यायिक व्याख्या के अनुसार जानकारी की तारीख से जोड़ा गया। कथित विक्रेताओं ने अधिसूचना को समय-सीमा में चुनौती नहीं दी थी और प्रतिवादियों ने बाद में जानकारी मिलने का तर्क भी नहीं उठाया।

Court: The Supreme Court of India

Case Name: THE A.P. STATE WAKF BOARD, (NOW TELANGANA STATE WAKF BOARD) VS. SYED MASOOD AHMED

Case Number: Civil Appeal No. 2804 of 2024

Bench: माननीय न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और माननीय न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन

Neutral Citation: 2026 INSC 1152

Decision Date: 2026-10-26

मामला क्या था?

Telangana State Wakf Board ने मस्जिद, दरगाह और कब्रिस्तान से जुड़ी भूमि पर अपने कब्जे में हस्तक्षेप रोकने के लिए स्थायी निषेधाज्ञा का वाद दायर किया था। ट्रायल कोर्ट ने निषेधाज्ञा दी, लेकिन हाई कोर्ट ने उसे निरस्त कर दिया। रिकॉर्ड में Survey Commissioner की रिपोर्ट, Wakf अधिसूचना और पुराने pahanis शामिल थे; प्रतिवादियों का दावा उनके विक्रेताओं से प्राप्त agreement for sale और power of attorney पर आधारित था।

मुख्य कानूनी प्रश्न

क्या Wakf के रूप में अधिसूचित भूमि पर प्रबंधन कर रहे Wakf Board को निषेधाज्ञा मिल सकती है, और क्या प्रतिवादी पक्ष के विक्रेताओं द्वारा अधिसूचना के विरुद्ध समय-सीमा में विवाद न उठाने का महत्व था?

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट का आदेश निरस्त कर ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई निषेधाज्ञा को पूर्ण रूप से बहाल किया। दोनों contempt petitions खारिज की गईं।

न्यायालय की प्रमुख reasoning

न्यायालय ने पाया कि संबंधित भूमि के Wakf होने और उसके धार्मिक संस्थानों के रखरखाव के लिए सौंपे जाने के समर्थन में Survey Commissioner की रिपोर्ट तथा Gazette notification मौजूद थे। कथित विक्रेताओं ने अधिसूचना के बाद निर्धारित अवधि में विवाद नहीं उठाया था; प्रतिवादियों ने भी समय-सीमा के भीतर चुनौती या बाद में पहली बार जानकारी मिलने का दावा नहीं किया। न्यायालय के अनुसार, इस मामले में न तो स्वामित्व पर ऐसा cloud था जिसके लिए घोषणा का वाद आवश्यक हो, न ही कब्जे के विवाद की ऐसी स्थिति थी जो निषेधाज्ञा से राहत रोकती।

निर्णय के मुख्य बिंदु

  • Wakf Act, 1954 के अंतर्गत सर्वेक्षण के बाद जारी Gazette notification को भूमि के Wakf स्वरूप के समर्थन में महत्वपूर्ण माना गया।
  • निर्णय में Section 5(2) के तहत सूची प्रकाशित होने के बाद विवाद उठाने की एक वर्ष की अवधि का उल्लेख है; अवधि की गणना को न्यायिक व्याख्या के अनुसार जानकारी की तारीख से जोड़ा गया।
  • कथित विक्रेताओं ने अधिसूचना को समय-सीमा में चुनौती नहीं दी थी और प्रतिवादियों ने बाद में जानकारी मिलने का तर्क भी नहीं उठाया।
  • न्यायालय ने इस मामले में निष्कर्ष निकाला कि घोषणा के वाद की आवश्यकता वाला title cloud या निषेधाज्ञा रोकने वाला कब्जे का विवाद मौजूद नहीं था।
  • अपील स्वीकार कर ट्रायल कोर्ट की निषेधाज्ञा बहाल हुई; contempt petitions खारिज हुईं।

इस निर्णय का व्यावहारिक प्रभाव

Wakf भूमि से जुड़े निषेधाज्ञा विवादों में सर्वेक्षण और Gazette अधिसूचना के साक्ष्य, तथा अधिसूचना को चुनौती देने की समय-सीमा महत्वपूर्ण हो सकती है। अधिवक्ताओं को यह भी देखना चाहिए कि मामला केवल कब्जे में हस्तक्षेप का है या स्वामित्व पर वास्तविक cloud मौजूद है, क्योंकि उसी से उपयुक्त वाद-उपचार तय होता है।

Advocate Amardeep Jaiswal
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Advocate Amardeep Jaiswal

Advocate, High Court of Madhya Pradesh, Jabalpur। भारतीय कानून, न्यायिक निर्णय और व्यावहारिक कानूनी विषयों पर जानकारीपूर्ण लेख प्रकाशित करते हैं।

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