धारा 43D(7) की तीन आवश्यक शर्तें हैं: UAPA के अपराध का आरोप, भारतीय नागरिक न होना, और भारत में अनधिकृत या अवैध प्रवेश। “और” के प्रयोग के कारण विदेशी नागरिकता और प्रारंभिक अवैध प्रवेश—दोनों का प्रथमदृष्टया स्थापित होना आवश्यक है। वैध वीज़ा से प्रवेश के बाद वीज़ा समाप्त होना प्रारंभिक प्रवेश को पूर्वव्यापी रूप से अवैध नहीं बनाता।
Court: The Supreme Court of India
Case Name: UNION OF INDIA VS. MOHAMED RIFAS @ MOHAMED RIGBAS
Case Number: Criminal Appeal arising out of SLP (Criminal) No. 7177 of 2024
Case-number verification: निर्णय-पाठ में Criminal Appeal No(s). of 2026 का क्रमांक रिक्त है। इसलिए मेटाडेटा में दिया गया Crl.A. No. 5070/2026 शामिल नहीं किया गया।
Bench: माननीय न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और माननीय न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली
Neutral Citation: 2026 INSC 1160
Decision Date: 2026-10-27
मामला क्या था?
प्रतिवादी को UAPA सहित विभिन्न अपराधों के आरोपों में गिरफ्तार किया गया था। निर्धारित अवधि में आरोपपत्र दाखिल न होने पर उसे 5 जुलाई 2018 को Cr.P.C. की धारा 167(2) के तहत डिफॉल्ट जमानत मिली। बाद में NIA ने आरोपपत्र दाखिल किया और प्रतिवादी की कथित श्रीलंकाई राष्ट्रीयता तथा अवैध प्रवेश से संबंधित अलग FIR भी दर्ज हुई। केंद्र सरकार ने कथित राष्ट्रीयता छिपाने और UAPA की धारा 43D(7) का हवाला देकर जमानत निरस्त करने की मांग की। विशेष अदालत ने जमानत रद्द की, लेकिन मद्रास हाई कोर्ट ने वह आदेश निरस्त कर दिया। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की अपील खारिज की।
मुख्य कानूनी प्रश्न
क्या UAPA के अपराध में आरोपी विदेशी नागरिक पर धारा 43D(7) की जमानत-रोक तभी लागू होगी जब अभियोजन प्रथमदृष्टया यह दिखाए कि उसने भारत में प्रवेश ही अनधिकृत या अवैध रूप से किया था; और क्या यह रोक धारा 167(2) Cr.P.C. के तहत वैधानिक डिफॉल्ट जमानत को भी निष्प्रभावी करती है?
माननीय सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
धारा 43D(7) लागू करने के लिए अभियोजन को प्रथमदृष्टया दिखाना होगा कि आरोपी UAPA के अपराध का आरोपी है, भारतीय नागरिक नहीं है, और भारत में उसका प्रारंभिक प्रवेश अनधिकृत या अवैध था। वैध वीज़ा से प्रवेश के बाद वीज़ा की अवधि समाप्त होना, अपने-आप में, प्रारंभिक प्रवेश को पीछे से अवैध नहीं बनाता। धारा 43D(7) का गैर-बाधक प्रभाव धारा 43D(5) और (6) तक सीमित है; वह धारा 43D(2) के माध्यम से लागू डिफॉल्ट जमानत को नहीं रोकता।
न्यायालय की प्रमुख reasoning
माननीय सुप्रीम कोर्ट ने धारा 43D(7) में प्रयुक्त “and” को दोनों शर्तों—भारतीय नागरिक न होना और भारत में अनधिकृत या अवैध प्रवेश—के संयुक्त रूप से पूरा होने की मांग के रूप में पढ़ा। अभियोजन ऐसा प्रथमदृष्टया आधार नहीं दिखा पाया; संबंधित FIR के आरोपों के अनुसार प्रवेश वैध वीज़ा से हुआ था और ठहराव बाद में अवैध हुआ। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि धारा 167(2) की डिफॉल्ट जमानत UAPA मामलों में धारा 43D(2) के कारण उपलब्ध है और धारा 43D(7) उसे निष्प्रभावी नहीं करती। जमानत आदेश को चुनौती देने और बाद के आचरण या नई परिस्थितियों के आधार पर जमानत निरस्त कराने के मानदंड अलग हैं। कथित रूप से Village Administrative Officer को दिए गए अतिरिक्त-न्यायिक स्वीकारोक्ति बयान को केवल Evidence Act की धारा 25 के आधार पर प्रथमदृष्टया पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता; उसकी स्वेच्छिकता, सत्यता और विश्वसनीयता का अंतिम मूल्यांकन विचारण में होगा।
निर्णय के मुख्य बिंदु
- धारा 43D(7) की तीन आवश्यक शर्तें हैं: UAPA के अपराध का आरोप, भारतीय नागरिक न होना, और भारत में अनधिकृत या अवैध प्रवेश।
- “और” के प्रयोग के कारण विदेशी नागरिकता और प्रारंभिक अवैध प्रवेश—दोनों का प्रथमदृष्टया स्थापित होना आवश्यक है।
- वैध वीज़ा से प्रवेश के बाद वीज़ा समाप्त होना प्रारंभिक प्रवेश को पूर्वव्यापी रूप से अवैध नहीं बनाता।
- धारा 43D(7) का गैर-बाधक प्रभाव उपधारा (5) और (6) तक सीमित है; वह धारा 43D(2) के तहत उपलब्ध डिफॉल्ट जमानत को नहीं रोकता।
- जमानत आदेश के विरुद्ध अपील और बाद के आचरण या नई परिस्थितियों पर आधारित जमानत-निरस्तीकरण आवेदन अलग कानूनी प्रश्न हैं।
इस निर्णय का व्यावहारिक प्रभाव
UAPA मामलों में विदेशी नागरिक होने का आरोप मात्र धारा 43D(7) की रोक के लिए पर्याप्त नहीं है: अभियोजन को भारत में प्रारंभिक प्रवेश के अनधिकृत या अवैध होने का प्रथमदृष्टया आधार प्रस्तुत करना होगा। वैध प्रवेश के बाद वीज़ा अवधि समाप्त होने का मामला इस वैधानिक कसौटी से अलग है। साथ ही, डिफॉल्ट जमानत को धारा 43D(7) अपने-आप नहीं रोकती। पहले से दी गई जमानत रद्द कराने के लिए भी लागू कानूनी आधार और प्रासंगिक सामग्री दिखानी होगी।
Source check: निर्णय-पाठ में अपील का क्रमांक रिक्त है और मामला SLP (Criminal) No. 7177 of 2024 से उत्पन्न बताया गया है; मेटाडेटा का Crl.A. No. 5070/2026 निर्णय-पाठ से सत्यापित नहीं होता।