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22 October 2026
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जमानत पर निर्णय में प्रासंगिक सामग्री का स्वतंत्र मूल्यांकन और कारण देना आवश्यक: Nagendra Ray बनाम State of Bihar

जमानत के आदेश में केवल पक्षकारों या जाँच अधिकारी की दलीलें दर्ज करना पर्याप्त नहीं; न्यायालय का स्वतंत्र मूल्यांकन भी दिखना चाहिए। मामले की प्रासंगिक सामग्री, जिसमें वीडि…
legal.courtThe Supreme Court of India
legal.caseNAGENDRA RAY VS. THE STATE OF BIHAR Case Number: Criminal Appeals arising out of SLP (Crl.) Nos. 2171, 4385 and 6026 of 2025
legal.benchमाननीय न्यायमूर्ति Dipankar Datta और माननीय न्यायमूर्ति Sheel Nagu
legal.citation2026 INSC 1139 Decision
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  • जमानत के आदेश में केवल पक्षकारों या जाँच अधिकारी की दलीलें दर्ज करना पर्याप्त नहीं; न्यायालय का स्वतंत्र मूल्यांकन भी दिखना चाहिए।
  • मामले की प्रासंगिक सामग्री, जिसमें वीडियो फुटेज और उससे जुड़ी गवाहियों का उल्लेख है, पर विचार किया जाना चाहिए।
  • कारण संक्षिप्त हो सकते हैं, लेकिन आदेश से यह स्पष्ट होना चाहिए कि राहत देते समय न्यायालय ने किन बातों पर विचार किया।

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जमानत के आदेश में केवल पक्षकारों या जाँच अधिकारी की दलीलें दर्ज करना पर्याप्त नहीं; न्यायालय का स्वतंत्र मूल्यांकन भी दिखना चाहिए। मामले की प्रासंगिक सामग्री, जिसमें वीडियो फुटेज और उससे जुड़ी गवाहियों का उल्लेख है, पर विचार किया जाना चाहिए। कारण संक्षिप्त हो सकते हैं, लेकिन आदेश से यह स्पष्ट होना चाहिए कि राहत देते समय न्यायालय ने किन बातों पर विचार किया।

Court: The Supreme Court of India

Case Name: NAGENDRA RAY VS. THE STATE OF BIHAR

Case Number: Criminal Appeals arising out of SLP (Crl.) Nos. 2171, 4385 and 6026 of 2025

Case-number verification: निर्णय-पाठ में तीनों Criminal Appeal संख्याएँ रिक्त हैं। इसलिए मेटाडेटा में दिया गया Crl.A. No. 4991/2026 निर्णय-पाठ से सत्यापित नहीं होता और यहाँ शामिल नहीं किया गया है।

Bench: माननीय न्यायमूर्ति Dipankar Datta और माननीय न्यायमूर्ति Sheel Nagu

Neutral Citation: 2026 INSC 1139

Decision Date: 2026-10-16

मामला क्या था?

अभियोजन के अनुसार, 21 मई 2024 को चुनावी घटना के बाद एक समूह ने मृतक Chandan Ram और अन्य लोगों को घेरा तथा गोलीबारी की, जिसमें Chandan Ram की मृत्यु हुई और अन्य घायल हुए। मृतक के पिता ने Patna High Court द्वारा तीन आरोपियों को दी गई अग्रिम जमानत और नियमित जमानत को चुनौती दी। निर्णय-पाठ के अनुसार, सत्र न्यायालय ने पुलिस द्वारा प्राप्त घटना के वीडियो और उससे आरोपियों की पहचान करने वाले गवाहों के बयानों का उल्लेख किया था; उच्च न्यायालय के आदेशों में इन सामग्रियों पर पर्याप्त विचार नहीं हुआ।

मुख्य कानूनी प्रश्न

क्या जमानत या अग्रिम जमानत पर विचार करते समय उच्च न्यायालय को अभियोजन द्वारा बताई गई प्रासंगिक सामग्री—जैसे घटना का वीडियो और वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान करने वाले गवाहों के Section 161 CrPC के बयान—का स्वतंत्र मूल्यांकन कर अपने कारण दर्ज करने चाहिए?

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अपीलें स्वीकार कर जमानत और अग्रिम जमानत देने वाले तीनों आदेश निरस्त किए तथा संबंधित अर्जियों को नए सिरे से विचार के लिए Patna High Court में बहाल किया। आरोपियों को उच्च न्यायालय द्वारा पहले निर्धारित शर्तों पर अंतरिम जमानत जारी रखने की अनुमति दी गई, जब तक उच्च न्यायालय संबंधित अर्जियों का अंतिम निपटारा न कर दे।

न्यायालय की प्रमुख reasoning

न्यायालय ने पाया कि उच्च न्यायालय ने वीडियो फुटेज और उस फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान करने वाले गवाहों के Section 161 CrPC के बयानों पर विचार नहीं किया। एक आरोपी के मामले में वीडियो संबंधी जाँच अधिकारी की दलील दर्ज की गई, लेकिन उसका स्वतंत्र आकलन और उस पर कारण नहीं दिए गए। न्यायालय ने दोहराया कि जमानत संबंधी न्यायिक आदेश में भी संक्षिप्त सही, पर न्यायालय का अपना मूल्यांकन और राहत देने या अस्वीकार करने के कारण दिखाई देने चाहिए।

निर्णय के मुख्य बिंदु

  • जमानत के आदेश में केवल पक्षकारों या जाँच अधिकारी की दलीलें दर्ज करना पर्याप्त नहीं; न्यायालय का स्वतंत्र मूल्यांकन भी दिखना चाहिए।
  • मामले की प्रासंगिक सामग्री, जिसमें वीडियो फुटेज और उससे जुड़ी गवाहियों का उल्लेख है, पर विचार किया जाना चाहिए।
  • कारण संक्षिप्त हो सकते हैं, लेकिन आदेश से यह स्पष्ट होना चाहिए कि राहत देते समय न्यायालय ने किन बातों पर विचार किया।
  • आदेश निरस्त होने के बावजूद आरोपियों की अंतरिम जमानत, उच्च न्यायालय की पहले से निर्धारित शर्तों पर, नई सुनवाई के अंतिम निपटारे तक जारी रही।
  • न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणियाँ मामले के गुण-दोष पर निष्कर्ष नहीं हैं और सभी पक्षों की दलीलें खुली रहेंगी।

इस निर्णय का व्यावहारिक प्रभाव

जमानत या अग्रिम जमानत पर सुनवाई में न्यायालय को मामले की प्रासंगिक सामग्री पर ध्यान देना और अपने स्वतंत्र विचार के कारण दर्ज करना चाहिए। इस मामले में अर्जियाँ पुनः सुनवाई के लिए बहाल हुईं; आरोपियों की अंतरिम जमानत पहले से लागू शर्तों पर अंतिम निर्णय तक जारी रही।

Source check: निर्णय-पाठ में आदेश को NON-REPORTABLE बताया गया है; इसलिए is_reportable को false रखा गया है।
Advocate Amardeep Jaiswal
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Advocate Amardeep Jaiswal

Advocate, High Court of Madhya Pradesh, Jabalpur। भारतीय कानून, न्यायिक निर्णय और व्यावहारिक कानूनी विषयों पर जानकारीपूर्ण लेख प्रकाशित करते हैं।

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