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28 October 2026
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POCSO में बच्चे का medical examination: सहमति, डॉक्टर और जरूरी सुरक्षा

POCSO Act की धारा 27 में बच्चे का medical examination FIR या शिकायत दर्ज न होने पर भी करने की व्यवस्था है। POCSO Rules, 2020 आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए पुलिस या मजिस्ट्रेट की requisition को पूर्व शर्त नहीं बनाते। इसलिए चोट, बीमारी या तत्काल चिकित्सा जरूरत होने पर पहले कागज पूरे करने की प्रतीक्षा में इलाज रोकना उचित नहीं है। स्वास्थ्य और गरिमा प्राथमिक हैं।
मुख्य बातें
  • कानूनी संदर्भ तारीख: 28 October 2026 इलाज के लिए FIR की प्रतीक्षा क्यों नहीं POCSO Act की धारा 27 में बच्चे का medical examination FIR या शिकायत दर्ज न होने पर भी करने की व्यवस्था है।
  • POCSO Rules, 2020 आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए पुलिस या मजिस्ट्रेट की requisition को पूर्व शर्त नहीं बनाते।
  • इसलिए चोट, बीमारी या तत्काल चिकित्सा जरूरत होने पर पहले कागज पूरे करने की प्रतीक्षा में इलाज रोकना उचित नहीं है।

विस्तृत विवेचना

कानून और प्रक्रिया की समझ

कानूनी संदर्भ तारीख: 28 October 2026

इलाज के लिए FIR की प्रतीक्षा क्यों नहीं

POCSO Act की धारा 27 में बच्चे का medical examination FIR या शिकायत दर्ज न होने पर भी करने की व्यवस्था है। POCSO Rules, 2020 आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए पुलिस या मजिस्ट्रेट की requisition को पूर्व शर्त नहीं बनाते। इसलिए चोट, बीमारी या तत्काल चिकित्सा जरूरत होने पर पहले कागज पूरे करने की प्रतीक्षा में इलाज रोकना उचित नहीं है। स्वास्थ्य और गरिमा प्राथमिक हैं। [1][2]

उपचार तथा forensic examination संबंधित लेकिन अलग उद्देश्य रखते हैं। चिकित्सक बच्चे की स्वास्थ्य जरूरतें देखता है और लागू protocol के अनुसार रिकॉर्ड या नमूने संभालता है। परिवार को घटना की उपलब्ध जानकारी सही रूप में देनी चाहिए, लेकिन हर अनावश्यक व्यक्ति के सामने विवरण दोहराना जरूरी नहीं है। तत्काल चिकित्सा का समय बीतने से बचाने के लिए अस्पताल और जाँच अधिकारी से सुरक्षित समन्वय करें।

महिला डॉक्टर और भरोसे का व्यक्ति

धारा 27(2) के अनुसार पीड़ित लड़की हो तो examination महिला डॉक्टर द्वारा किया जाएगा। धारा 27(3) में माता पिता या बच्चे के भरोसे के व्यक्ति की उपस्थिति का प्रावधान है। ऐसा व्यक्ति उपस्थित न हो सके तो चिकित्सा संस्था के प्रमुख द्वारा नामित महिला की उपस्थिति का प्रावधान है। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य बच्चे को अकेले और भयभीत वातावरण में न छोड़ना है। [1]

यदि माता पिता या परिचित व्यक्ति पर ही आरोप हो तो भरोसा और सुरक्षा की स्थिति स्पष्ट करें। बच्चे के हित के अनुरूप उपयुक्त व्यवस्था आवश्यक है। लड़के के examination का प्रश्न भी स्वास्थ्य, गरिमा और लागू नियमों के अनुसार देखा जाता है। लड़की के लिए विशेष महिला डॉक्टर सुरक्षा होने से यह नहीं निकलता कि दूसरे बच्चों के लिए संवेदनशील चिकित्सा व्यवस्था जरूरी नहीं है।

चिकित्सा सहमति का अलग प्रश्न

शारीरिक गतिविधि के लिए नाबालिग की कथित सहमति और चिकित्सा परीक्षण की वैधानिक सहमति अलग मुद्दे हैं। POCSO होने से examination की सभी consent requirements समाप्त नहीं हो जातीं। लागू प्रक्रिया, बच्चे की उम्र, वैध सहमति देने वाले व्यक्ति और चिकित्सीय protocol के अनुसार informed consent तथा समझाने की व्यवस्था होनी चाहिए। बच्चे को उम्र के अनुरूप सरल भाषा में प्रक्रिया बताना महत्वपूर्ण है। [1][3]

परिवार को स्पष्ट पूछना चाहिए कि कौन सा कदम उपचार के लिए है, कौन सा forensic documentation के लिए और किसकी सहमति दर्ज की जा रही है। बच्चे को धमकाकर या अपराध साबित करने की जिम्मेदारी डालकर सहमत करवाना उचित नहीं है। किसी परीक्षण से इनकार या कठिनाई हो तो उसे सही रूप में दर्ज करके आगे की सुरक्षित और कानूनी व्यवस्था पर योग्य सलाह लें।

दो उँगली परीक्षण और अनुचित निष्कर्ष

कथित यौन आदत या virginity तय करने के लिए two-finger test का उपयोग स्वीकार्य नहीं है। Supreme Court ने इस प्रथा की कड़ी निंदा की है। बच्चे या अन्य पीड़ित की पूर्व गतिविधि के अनुमान से वर्तमान घटना की सत्यता तय करना गलत दृष्टिकोण है। medical examination उपचार और विधिसम्मत विशेषज्ञ मूल्यांकन के लिए है, चरित्र का प्रमाणपत्र देने के लिए नहीं। [4]

दिखाई देने वाली चोट न होना, सामान्य निष्कर्ष या परीक्षण में देरी अपने आप शिकायत को झूठा नहीं बनाते। उसी तरह medical report की प्रत्येक पंक्ति से आरोपी का दोष स्वतः सिद्ध नहीं होता। निष्कर्ष की सीमा और अन्य साक्ष्य का संदर्भ महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट का अर्थ डॉक्टर तथा वकील से समझें; इंटरनेट की एक पंक्ति से निश्चित परिणाम न निकालें।

रिकॉर्ड, नमूने और आगे की सहायता

उपलब्ध उपचार रिकॉर्ड, परीक्षण की तारीख, अस्पताल और संबंधित डॉक्टर का विवरण सुरक्षित रखें। कपड़े या अन्य संभावित साक्ष्य के बारे में अधिकारी से preservation guidance लें; खुद प्रयोग या बदलाव न करें। रिकॉर्ड का अनधिकृत प्रसार बच्चे की गोपनीयता को नुकसान पहुँचा सकता है। आवश्यक कानूनी access और सार्वजनिक sharing के बीच अंतर रखें। [1][2]

Rules उपचार के साथ जरूरत के अनुसार मनोवैज्ञानिक सहायता, परामर्श और अन्य स्वास्थ्य उपायों को भी महत्व देते हैं। कुछ जरूरतें पहली जाँच के बाद सामने आती हैं। follow-up की तारीख, लक्षण और सहायता के संपर्क सुरक्षित रखें। medical examination मुकदमे का केवल एक हिस्सा है; बच्चे की लंबी अवधि की देखभाल को laboratory result या अगली सुनवाई तक सीमित नहीं करना चाहिए।

स्रोत

  1. Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012, amended text — NCPCR / Government of India. Definitions, offences, reporting, safeguards, Special Courts and presumptions; 2019 amendments included.
  2. POCSO Rules, 2020 — Gazette notification G.S.R. 165(E) — Ministry of Women and Child Development / NCPCR. Rules 3, 4, 6, 7 and 9: institutions, care, support, medical aid, legal aid and compensation.
  3. Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 — India Code / Government of India. Sections 173, 183, 184, 482, 483, 528 and 531; applicable procedure and savings require case-specific assessment.
  4. Supreme Court order dated 3 September 2024, SLP (Crl.) 1481/2024 — Supreme Court of India. Condemnation of the two-finger test; earlier binding decisions discussed.

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Advocate Amardeep Jaiswal
लेखक के बारे में

Advocate Amardeep Jaiswal

Advocate, High Court of Madhya Pradesh, Jabalpur। भारतीय कानून, न्यायिक निर्णय और व्यावहारिक कानूनी विषयों पर जानकारीपूर्ण लेख प्रकाशित करते हैं।

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