कानूनी संदर्भ तारीख: 28 October 2026
बयान का स्थान और अधिकारी
POCSO की धारा 24 के अनुसार बच्चे का बयान उसके निवास, सामान्य निवास स्थान या पसंद के स्थान पर लिया जाना चाहिए। जहाँ तक संभव हो महिला पुलिस अधिकारी, जो उपनिरीक्षक से नीचे न हो, यह कार्य करे। इस व्यवस्था का उद्देश्य बच्चे को अनावश्यक भय और अपरिचित वातावरण के दबाव से बचाना है। हर बच्चे को केवल बयान के लिए थाने पहुँचाने की सामान्य आदत सही नहीं है। [1]
महिला अधिकारी के संबंध में कानून का जहाँ तक संभव हो वाला शब्द भी ध्यान में रखें। किसी मामले में उचित अधिकारी या सुविधा की उपलब्धता का प्रश्न हो तो सुरक्षा और जरूरी सहायता की माँग स्पष्ट करें। प्रक्रिया की कठिनाई को रिपोर्ट न लेने का बहाना नहीं बनाना चाहिए। परिवार अधिकारी का नाम, पद, स्थान और बयान की तारीख नोट कर सकता है।
वर्दी, रात और आरोपी से संपर्क
बच्चे का बयान रिकॉर्ड करते समय पुलिस अधिकारी वर्दी में नहीं होना चाहिए। धारा 24 यह भी कहती है कि बच्चे को किसी कारण से रात में पुलिस थाने में नहीं रोका जाएगा। यह विशेष निषेध रात भर थाने में रखने से संबंधित है; इसे बच्चे की हर जरूरी सहायता या चिकित्सा प्रक्रिया पर रोक की तरह न समझें। अनावश्यक थाना यात्राएँ टालकर बच्चे के अनुकूल व्यवस्था माँगें। [1]
जाँच अधिकारी को यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे का आरोपी से संपर्क न हो। यदि आरोपी घर या संस्था में पहुँच रखता है तो उसकी जानकारी पहले दें। सुरक्षा की जरूरत को केवल बयान वाले दिन तक सीमित न रखें। परिवार स्वयं आरोपी को बुलाकर सामना कराने, समझौते की रिकॉर्डिंग बनाने या बच्चे से उससे सवाल पूछवाने की कोशिश न करे।
बच्चे की भाषा और संचार सहायता
धारा 26 के अनुसार बच्चे की कही बात उसके शब्दों में दर्ज की जाती है और माता पिता या उसके भरोसे के व्यक्ति की उपस्थिति का प्रावधान है। जरूरत पर अनुवादक या interpreter की सहायता ली जा सकती है। मानसिक या शारीरिक disability होने पर special educator, परिचित संचार व्यक्ति अथवा विशेषज्ञ की भूमिका प्रासंगिक हो सकती है। जहाँ संभव हो audio-video recording का भी प्रावधान है। [1]
बच्चा संकेतों, छोटे वाक्यों या अलग भाषा में बोलता हो तो उसे अविश्वसनीय कहकर टालना उचित नहीं है। सहायता का उद्देश्य अर्थ समझना और सही दर्ज करना है, उत्तर सुझाना नहीं। भरोसे के व्यक्ति पर ही आरोप हो तो उसकी उपस्थिति को यांत्रिक रूप से आवश्यक न मानें; सुरक्षित और उपयुक्त व्यवस्था के लिए अधिकारी तथा संबंधित संरक्षण प्राधिकरण को स्थिति बताएँ।
पुलिस और मजिस्ट्रेट के बयान अलग हैं
धारा 25 मजिस्ट्रेट के सामने बच्चे का बयान दर्ज करने से संबंधित सुरक्षा देती है। बच्चे की कही बात सही रूप में दर्ज होना महत्वपूर्ण है। सामान्य प्रक्रिया में पुराने मामलों में CrPC की धारा 164 और नए लागू ढाँचे में BNSS की धारा 183 का प्रश्न आता है। कौन सी प्रक्रिया लागू है, यह तारीख और saving provisions देखकर तय करना चाहिए। [1][3]
पुलिस को दिया प्रारंभिक विवरण, मजिस्ट्रेट का बयान और अदालत में testimony अलग चरण हैं। इनके उद्देश्य और साक्ष्य संबंधी उपयोग एक जैसे नहीं हैं। परिवार को सभी दस्तावेजों की उपलब्ध प्रतियाँ वकील को देनी चाहिए। किसी रिकॉर्ड में गलती होने का दावा हो तो समय रहते उचित अधिकारी या अदालत के सामने रखें; बाद में अपने स्तर पर संशोधित दस्तावेज बनाना सही नहीं है।
तैयारी करें, लेकिन बच्चे को सिखाएँ नहीं
बच्चे को सरल रूप में बताया जा सकता है कि कौन मिलेगा, कहाँ बैठना होगा और जरूरत पर मदद कैसे माँगनी है। घटना की कहानी रटवाना, उत्तर लिखकर देना या रिश्तेदारों से mock questioning करवाना उचित नहीं है। डर, थकान, भाषा की कठिनाई या उपचार की जरूरत हो तो पहले बताएँ। child-friendly व्यवस्था का अर्थ सच्ची बात कहने का अवसर है, तय उत्तर देना नहीं। [2]
व्यावहारिक फाइल में अधिकारी का संपर्क, रिकॉर्डिंग की तारीख, सहायता की माँग और संबंधित आदेश रखें। बयान या उसका वीडियो सार्वजनिक न करें। गोपनीयता की जिम्मेदारी परिवार की निजी संदेशों में भी महत्वपूर्ण है। सही प्रक्रिया बच्चे की सुरक्षा, रिकॉर्ड की विश्वसनीयता और निष्पक्ष मुकदमे तीनों में मदद करती है; जल्दबाजी में कई निजी बयान बनाना जरूरी कानूनी प्रक्रिया का विकल्प नहीं है।
स्रोत
- Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012, amended text — NCPCR / Government of India. Definitions, offences, reporting, safeguards, Special Courts and presumptions; 2019 amendments included.
- POCSO Rules, 2020 — Gazette notification G.S.R. 165(E) — Ministry of Women and Child Development / NCPCR. Rules 3, 4, 6, 7 and 9: institutions, care, support, medical aid, legal aid and compensation.
- Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 — India Code / Government of India. Sections 173, 183, 184, 482, 483, 528 and 531; applicable procedure and savings require case-specific assessment.
यह सामान्य कानूनी जानकारी है। किसी विशेष मामले में दस्तावेज, लागू कानून और वर्तमान न्यायिक निर्णय देखकर सलाह लें।