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28 October 2026
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POCSO और POSH Act में क्या अंतर है? शिकायत, उम्र और कार्रवाई समझें

POCSO और POSH दोनों लैंगिक सुरक्षा से जुड़े हैं, लेकिन उनका दायरा और प्रक्रिया अलग है। POCSO का पूरा नाम Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012 है। POSH आम तौर पर Sexual Harassment of Women at Workplace (Prevention, Prohibition and Redressal) Act, 2013 को कहा जाता है। केवल नाम की समानता से दोनों शिकायतों को एक ही समिति या एक ही कानूनी प्रक्रिया में नहीं रखा जा सकता।
मुख्य बातें
  • कानूनी संदर्भ तारीख: 28 October 2026 मिलते नाम, लेकिन अलग उद्देश्य POCSO और POSH दोनों लैंगिक सुरक्षा से जुड़े हैं, लेकिन उनका दायरा और प्रक्रिया अलग है।
  • POCSO का पूरा नाम Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012 है।
  • POSH आम तौर पर Sexual Harassment of Women at Workplace (Prevention, Prohibition and Redressal) Act, 2013 को कहा जाता है।

विस्तृत विवेचना

कानून और प्रक्रिया की समझ

कानूनी संदर्भ तारीख: 28 October 2026

मिलते नाम, लेकिन अलग उद्देश्य

POCSO और POSH दोनों लैंगिक सुरक्षा से जुड़े हैं, लेकिन उनका दायरा और प्रक्रिया अलग है। POCSO का पूरा नाम Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012 है। POSH आम तौर पर Sexual Harassment of Women at Workplace (Prevention, Prohibition and Redressal) Act, 2013 को कहा जाता है। केवल नाम की समानता से दोनों शिकायतों को एक ही समिति या एक ही कानूनी प्रक्रिया में नहीं रखा जा सकता। [1][2]

POCSO अठारह वर्ष से कम सभी बच्चों के खिलाफ निर्धारित लैंगिक अपराधों को संबोधित करता है। POSH कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न की रोकथाम और निवारण का ढाँचा देता है। POSH में aggrieved woman की परिभाषा उम्र तक सीमित नहीं है और संबंधित परिस्थितियों में गैर कर्मचारी महिला भी शामिल हो सकती है। इसलिए दोनों कानूनों में कुछ स्थितियों का overlap संभव है।

किसके लिए और कहाँ सुरक्षा मिलती है

POCSO में पीड़ित केवल लड़की होना आवश्यक नहीं है। लड़के भी संरक्षित हैं और घटना कार्यस्थल पर ही होना जरूरी नहीं है। घर, संस्था, स्कूल या ऑनलाइन हुई घटना के तथ्य प्रासंगिक हो सकते हैं। POSH का प्रश्न कार्यस्थल और वहाँ की अवांछित लैंगिक प्रकृति की गतिविधि से जुड़ता है। उसकी workplace और employee संबंधी परिभाषाएँ भी सामान्य स्थायी नौकरी से व्यापक हैं। [1][2]

उदाहरण के लिए सत्रह वर्ष की प्रशिक्षु के संबंध में आरोप हो तो केवल HR शिकायत लिखवाकर POCSO रिपोर्टिंग का प्रश्न समाप्त नहीं होता। वहीं किसी वयस्क महिला की कार्यस्थल शिकायत में केवल उत्पीड़न शब्द देखकर POCSO लागू नहीं हो जाता। उम्र, व्यवहार, स्थान और संबंधित व्यक्ति की भूमिका को अलग अलग लिखना सही कानूनी रास्ता पहचानने में मदद करता है।

शिकायत कहाँ की जाती है

POCSO की धारा 19 के अनुसार स्थानीय पुलिस या Special Juvenile Police Unit को जानकारी दी जाती है। अपराध की जाँच और मुकदमा आपराधिक प्रक्रिया में आगे बढ़ते हैं। POSH में सामान्यतः Internal Committee के समक्ष शिकायत होती है। छोटे प्रतिष्ठानों में कर्मचारियों की संख्या दस से कम होने या शिकायत स्वयं employer के विरुद्ध होने की स्थितियों में Local Committee की भूमिका है। [1][2]

Internal Committee पुलिस या POCSO Special Court का स्थान नहीं लेती। संस्था आवश्यक विभागीय कदम ले सकती है, लेकिन बच्चे के खिलाफ अपराध की बाहरी रिपोर्ट को केवल आंतरिक जाँच के निष्कर्ष तक रोकना उचित नहीं है। शिकायतकर्ता को एक ही घटना के बारे में अलग प्रक्रियाओं के उद्देश्य समझाएँ, ताकि वह समिति की सुनवाई को FIR अथवा आपराधिक फैसला न मान बैठे।

समयसीमा और परिणाम में अंतर

POSH में लिखित शिकायत की सामान्य अवधि घटना से तीन महीने है; घटनाओं की श्रृंखला हो तो अंतिम घटना से गिनी जाती है। पर्याप्त कारण होने पर समिति लिखित कारण दर्ज करके अतिरिक्त तीन महीने तक अवधि बढ़ा सकती है। इस अवधि को POCSO FIR पर स्वतः लागू करना गलत है। प्रत्येक प्रक्रिया की अपनी शर्तें और लागू समय संबंधी नियम हैं। [2]

POSH inquiry से सेवा नियमों के अनुसार कार्रवाई और अन्य वैधानिक सिफारिशें हो सकती हैं। आपराधिक दोषसिद्धि और कारावास सक्षम आपराधिक अदालत का विषय है। POCSO में सजा संबंधित अपराध की धारा पर निर्भर करती है। एक मंच पर दस्तावेज देने से दूसरे मंच की आवश्यक जानकारी स्वतः पूरी नहीं माननी चाहिए; प्राप्ति और केस नंबर अलग सुरक्षित रखें।

संस्थाओं के लिए व्यवहारिक व्यवस्था

स्कूल, अस्पताल और कार्यालय में स्पष्ट reporting policy बनाएँ। बच्चे से संबंधित खुलासा आए तो उसकी सुरक्षा, चिकित्सा जरूरत और पुलिस सूचना का ध्यान रखें। कार्यस्थल उत्पीड़न की शिकायत के लिए सक्षम समिति और उसकी संपर्क जानकारी उपलब्ध हो। कर्मचारी को यह पता होना चाहिए कि किस अधिकारी को सूचना देना है और कब आंतरिक सूचना के अलावा बाहरी रिपोर्ट भी जरूरी है। [1][2][3]

गोपनीयता दोनों प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण है। शिकायत, निजी संदेश, बच्चे की पहचान और inquiry documents को खुले समूहों में प्रसारित न करें। किसी महिला या बच्चे को केवल संस्था की प्रतिष्ठा बचाने के लिए समझौते पर मजबूर न करें। सही शुरुआत तथ्यों की छोटी chronology, उम्र का प्रमाण, उपलब्ध रिकॉर्ड और दोनों प्रक्रियाओं की अलग सूची से होती है; कानून का चुनाव केवल संक्षिप्त नाम देखकर नहीं किया जाता।

स्रोत

  1. Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012, amended text — NCPCR / Government of India. Definitions, offences, reporting, safeguards, Special Courts and presumptions; 2019 amendments included.
  2. Sexual Harassment of Women at Workplace (Prevention, Prohibition and Redressal) Act, 2013 — India Code / Government of India. Coverage, Internal and Local Committees, complaint period and workplace process.
  3. POCSO Rules, 2020 — Gazette notification G.S.R. 165(E) — Ministry of Women and Child Development / NCPCR. Rules 3, 4, 6, 7 and 9: institutions, care, support, medical aid, legal aid and compensation.

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Advocate Amardeep Jaiswal
लेखक के बारे में

Advocate Amardeep Jaiswal

Advocate, High Court of Madhya Pradesh, Jabalpur। भारतीय कानून, न्यायिक निर्णय और व्यावहारिक कानूनी विषयों पर जानकारीपूर्ण लेख प्रकाशित करते हैं।

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