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28 October 2026
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स्कूल, शिक्षक और अस्पताल की POCSO रिपोर्टिंग जिम्मेदारी क्या है?

स्कूल, शिक्षक, अस्पताल या अन्य संस्था को बच्चे के खिलाफ POCSO अपराध की जानकारी मिले तो उसे केवल अंदर की शिकायत मानना सही नहीं है। धारा 19 संबंधित जानकारी या आशंका पुलिस अथवा SJPU को देने का दायित्व रखती है। प्रधानाचार्य को बताना, HR को ईमेल करना या प्रबंधन की अनुमति माँगना अपने आप निर्धारित बाहरी रिपोर्ट की जगह नहीं लेता। बच्चे की तत्काल सुरक्षा भी साथ देखनी होगी।
मुख्य बातें
  • कानूनी संदर्भ तारीख: 28 October 2026 संस्था की प्रतिष्ठा से पहले बच्चे की सुरक्षा स्कूल, शिक्षक, अस्पताल या अन्य संस्था को बच्चे के खिलाफ POCSO अपराध की जानकारी मिले तो उसे केवल अंदर की शिका…
  • धारा 19 संबंधित जानकारी या आशंका पुलिस अथवा SJPU को देने का दायित्व रखती है।
  • प्रधानाचार्य को बताना, HR को ईमेल करना या प्रबंधन की अनुमति माँगना अपने आप निर्धारित बाहरी रिपोर्ट की जगह नहीं लेता।

विस्तृत विवेचना

कानून और प्रक्रिया की समझ

कानूनी संदर्भ तारीख: 28 October 2026

संस्था की प्रतिष्ठा से पहले बच्चे की सुरक्षा

स्कूल, शिक्षक, अस्पताल या अन्य संस्था को बच्चे के खिलाफ POCSO अपराध की जानकारी मिले तो उसे केवल अंदर की शिकायत मानना सही नहीं है। धारा 19 संबंधित जानकारी या आशंका पुलिस अथवा SJPU को देने का दायित्व रखती है। प्रधानाचार्य को बताना, HR को ईमेल करना या प्रबंधन की अनुमति माँगना अपने आप निर्धारित बाहरी रिपोर्ट की जगह नहीं लेता। बच्चे की तत्काल सुरक्षा भी साथ देखनी होगी। [1]

प्रबंधन को तथ्य उपलब्ध कराते समय स्पष्ट करें कि खुलासा कब हुआ और तत्काल खतरा क्या है। रिपोर्टिंग के लिए पहले बच्चे से लिखित आरोपपत्र, कई कर्मचारियों की सहमति या आरोपी की स्वीकारोक्ति प्राप्त करना आवश्यक नहीं है। उपलब्ध जानकारी ईमानदारी से दें। बच्चे को संस्था की बदनामी, परीक्षा या नौकरी का डर दिखाकर चुप कराना जिम्मेदार प्रतिक्रिया नहीं होगी।

शिक्षक और विद्यालय का व्यावहारिक दायित्व

बच्चे का पहला खुलासा सुनने वाला शिक्षक शांत रहे और गोपनीय तरीके से आवश्यक जानकारी दर्ज करे। बयान बदलवाने, सामूहिक पूछताछ या कई बार घटना दोहराने के बजाय सक्षम अधिकारी को तथ्य बताए। बच्चे और आरोपी के अनावश्यक संपर्क को रोकने के लिए उपयुक्त अस्थायी व्यवस्था की जा सकती है। ऐसी व्यवस्था को अंतिम दोषसिद्धि या सार्वजनिक दंड के रूप में प्रस्तुत न करें। [1][2]

यदि आरोपी संस्था का कर्मचारी है तो ड्यूटी, उपस्थितिपत्र, CCTV और अन्य संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश जिम्मेदार अधिकारी दे। रिकॉर्ड मिटना रोकना महत्वपूर्ण है, लेकिन अनधिकृत जाँच या उपकरण खोलने के नाम पर नए अधिकार मान लेना उचित नहीं है। जाँच अधिकारी को उपलब्ध रिकॉर्ड की सूची दें और विधिसम्मत हस्तांतरण करें। सुरक्षा और निष्पक्ष प्रक्रिया एक साथ संभव हैं।

अस्पताल और चिकित्सक की भूमिका

धारा 20 में अस्पताल सहित निर्दिष्ट क्षेत्रों के कर्मियों द्वारा बच्चे की यौन शोषणकारी सामग्री मिलने पर रिपोर्ट करने का विशेष उल्लेख है। धारा 19 का सामान्य दायित्व भी प्रासंगिक रहता है। चिकित्सक को उपचार की जरूरत, सुरक्षित परीक्षण, गोपनीयता और आवश्यक सूचना के बीच सही व्यवस्था करनी चाहिए। मेडिकल सहायता को पुलिस कागज तैयार होने तक रोकना विशेष रूप से हानिकारक हो सकता है। [1]

POCSO Rules, 2020 के नियम 6 के अनुसार आपातकालीन चिकित्सा के लिए legal या magisterial requisition अथवा अन्य कागज को पूर्व शर्त नहीं बनाया जाना चाहिए। धारा 27 में FIR न होने पर भी मेडिकल examination का प्रावधान है। इसका अर्थ सहमति और अन्य चिकित्सा safeguards हट जाना नहीं है। उपचार, forensic examination और रिकॉर्ड की प्रक्रिया प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी तथा लागू नियमों के अनुसार होनी चाहिए। [1][2]

चूक होने पर जिम्मेदारी और दंड

धारा 21(1) के अंतर्गत निर्धारित रिपोर्ट न करने या दर्ज न करने पर छह महीने तक कारावास, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। संस्था या कंपनी के प्रभारी द्वारा अपने नियंत्रण के subordinate से संबंधित अपराध की सूचना न देने की धारा 21(2) की स्थिति में एक वर्ष तक कारावास और जुर्माना है। दंड के लिए संबंधित शर्तों और व्यक्ति की वास्तविक भूमिका की जाँच आवश्यक है। [1]

इसीलिए केवल एक child-protection officer नियुक्त करके बाकी सभी व्यक्तियों की जिम्मेदारी समाप्त मानना सही नहीं है। संस्था को स्पष्ट करना चाहिए कि कौन पुलिस को सूचित करेगा, कौन प्राप्ति रखेगा और अगला अधिकारी अनुपस्थित हो तो कौन कार्य करेगा। रिपोर्ट वास्तव में पहुँची या केवल internal register में बंद हुई, इसका अंतर महत्वपूर्ण है। गोपनीयता रिपोर्ट न करने का सामान्य बहाना नहीं है।

पहले से तैयार व्यवस्था कैसी हो

नियम 3 में बच्चों के संपर्क में आने वाली संस्थाओं के कर्मियों का periodic police verification, background checks और प्रशिक्षण संबंधी व्यवस्था है। विद्यालय और अस्पताल लिखित नीति, संपर्क सूची तथा सुरक्षित record-access व्यवस्था रखें। कर्मचारी को पता हो कि बच्चे की पहचान कहाँ लिखी जाएगी, किसे दी जा सकती है और खुले समूहों में क्या नहीं भेजना है। [2]

घटना के बाद बच्चे की पढ़ाई, इलाज, मनोवैज्ञानिक सहायता और परिवार से सुरक्षित संवाद की जरूरत बनी रह सकती है। कानून की जिम्मेदारी को केवल एक ईमेल आगे भेज देने तक सीमित न करें। संस्था सहायता व्यक्ति या संबंधित प्राधिकरण से समन्वय कर सकती है, लेकिन कानूनी बयान और निर्णय अपने हाथ में नहीं ले सकती। समय पर रिपोर्ट, संरक्षित रिकॉर्ड और सम्मानजनक सहयोग बेहतर प्रक्रिया के आधार हैं।

स्रोत

  1. Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012, amended text — NCPCR / Government of India. Definitions, offences, reporting, safeguards, Special Courts and presumptions; 2019 amendments included.
  2. POCSO Rules, 2020 — Gazette notification G.S.R. 165(E) — Ministry of Women and Child Development / NCPCR. Rules 3, 4, 6, 7 and 9: institutions, care, support, medical aid, legal aid and compensation.

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Advocate Amardeep Jaiswal
लेखक के बारे में

Advocate Amardeep Jaiswal

Advocate, High Court of Madhya Pradesh, Jabalpur। भारतीय कानून, न्यायिक निर्णय और व्यावहारिक कानूनी विषयों पर जानकारीपूर्ण लेख प्रकाशित करते हैं।

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