हाँ, केवल cheque को ‘security’ कह देने से धारा 138 का मामला हमेशा बाहर नहीं हो जाता। Presentation के समय legally enforceable liability मौजूद थी या नहीं, यह महत्वपूर्ण है।
Sripati Singh मामले में सुप्रीम कोर्ट ने security cheque को निरर्थक कागज मानने से इनकार किया। लेकिन भविष्य की शर्त पूरी न हुई हो, debt चुक चुका हो या राशि विवादित हो तो उनका अलग प्रभाव हो सकता है। वास्तविक agreement, due date और payment record देखें।
अब क्या करें?
- Cheque देने का उद्देश्य और liability की शर्तें agreement से मिलाएँ।
- सभी repayments और outstanding amount का calculation करें।
- Notice आए तो timely, तथ्यात्मक जवाब देकर defence documents सुरक्षित रखें।
कौन-से दस्तावेज रखें?
Agreement, cheque copy, ledger, repayment entries और correspondence।
यह गलती न करें
सिर्फ ‘security cheque था’ कहना हर मामले में पर्याप्त defence नहीं है।
एक काल्पनिक उदाहरण
Loan देते समय security cheque लिया गया था और repayment date बीत गई। अब legally due liability तथा cheque presentation की स्थिति महत्वपूर्ण है। ‘Security’ शब्द मात्र पूरे मामले का अंतिम जवाब नहीं है।
क्या blank signed cheque देना सुरक्षित है?
उससे विवाद और presumptions के प्रश्न उठ सकते हैं; उद्देश्य, राशि और वापसी का स्पष्ट record जरूरी है।
कानूनी आधार और उपयोगी स्रोत
- परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 — धाराएँ 118, 138–142, 147
- Sripati Singh v. State of Jharkhand — सुप्रीम कोर्ट, 28 अक्टूबर 2021
यह सामान्य कानूनी जानकारी है। आपके तथ्य, लागू कानून और राज्य के नियमों के अनुसार सलाह अलग हो सकती है।