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28 October 2026
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भारत में ट्रेडमार्क और पेटेंट उल्लंघन की पेनाल्टी और सजा क्या है

जानकारी का संदर्भ 28 अक्टूबर 2026 कानूनी स्थिति ट्रेडमार्क अपराध पेटेंट दीवानी infringement और false patent marking अलग कानूनी आधार हैं एक ही सजा वाली धारणा क्यों गलत है…
मुख्य बातें
  • जानकारी का संदर्भ 28 अक्टूबर 2026 कानूनी स्थिति ट्रेडमार्क अपराध पेटेंट दीवानी infringement और false patent marking अलग कानूनी आधार हैं एक ही सजा वाली धारणा क्यों गलत है ब्रांड के नाम की नकल…
  • ट्रेडमार्क व्यापार की पहचान से जुड़ा है; पेटेंट पात्र आविष्कार पर कानून के अधीन मिलने वाला अधिकार है।
  • पहले यह तय करें कि विवाद किस अधिकार, किस इस्तेमाल और किस विशिष्ट धारा से संबंधित है।

विस्तृत विवेचना

कानून और प्रक्रिया की समझ

जानकारी का संदर्भ 28 अक्टूबर 2026

कानूनी स्थिति ट्रेडमार्क अपराध पेटेंट दीवानी infringement और false patent marking अलग कानूनी आधार हैं

एक ही सजा वाली धारणा क्यों गलत है

ब्रांड के नाम की नकल और patented तकनीक का इस्तेमाल दोनों बौद्धिक संपदा विवाद हो सकते हैं, लेकिन उनके कानूनी परिणाम समान नहीं हैं। ट्रेडमार्क व्यापार की पहचान से जुड़ा है; पेटेंट पात्र आविष्कार पर कानून के अधीन मिलने वाला अधिकार है। पहले यह तय करें कि विवाद किस अधिकार, किस इस्तेमाल और किस विशिष्ट धारा से संबंधित है।

Infringement के civil claim, आपराधिक counterfeit अपराध और झूठा registered या patented बताने के आरोप अलग रखें। किसी blog में लिखी अधिकतम penalty पढ़कर यह न मानें कि उतनी रकम शिकायत देते ही मिल जाएगी। अपराध की शर्तें, उपलब्ध बचाव और साक्ष्य जाँचने के बाद उपयुक्त प्राधिकारी या अदालत परिणाम तय करते हैं।

नकली ट्रेडमार्क के अपराध की सजा

Trade Marks Act की धारा 103 में गलत ट्रेडमार्क लगाने जैसे निर्दिष्ट आचरण तथा धारा 104 में ऐसे निशान वाला माल बेचने या संबंधित सेवाएँ देने की स्थितियाँ आती हैं। इनकी सामान्य दंड सीमा छह महीने से तीन वर्ष कारावास और 50 हजार से दो लाख रुपये जुर्माना है। धाराओं में दिए मानसिक तत्व, अपवाद तथा बचाव भी साथ पढ़ने होते हैं। [1]

पर्याप्त और विशेष कारण निर्णय में दर्ज करके अदालत न्यूनतम सीमा से कम दंड दे सकती है। इसलिए प्रत्येक मामले में अनिवार्य रूप से कम से कम छह महीने जेल होने का बिना शर्त दावा न करें। इसी तरह सिर्फ दो दुकानों के नाम मिलते होने से धारा 103 या 104 के सभी तत्व अपने आप साबित नहीं होते। [1]

पहले धारा 103 या 104 में दोषसिद्धि के बाद वैसा अपराध फिर होने पर धारा 105 की बढ़ी हुई व्यवस्था लागू हो सकती है। सामान्य सीमा एक से तीन वर्ष कारावास और एक से दो लाख रुपये जुर्माना है; उसमें भी न्यायालय द्वारा विशेष कारण दर्ज करने का प्रावधान पढ़ना जरूरी है। केवल दूसरी शिकायत दर्ज होना दूसरी दोषसिद्धि नहीं है। [1]

ट्रेडमार्क में दीवानी राहत भी अलग है

धारा 135 में injunction और उपलब्ध परिस्थितियों में damages या account of profits की राहत है। आर्थिक नुकसान के लिए प्रमाण और कानून की सीमाएँ देखी जाएँगी। Criminal fine और पीड़ित को मिलने वाला civil damages एक ही भुगतान नहीं हैं। दीवानी राहत के साथ लागू आपराधिक प्रक्रिया अलग आधार पर विचारणीय हो सकती है। [1]

उदाहरण के लिए किसी विक्रेता की भ्रामक पैकिंग रोकना और उसका असली उत्पादन स्रोत पता लगाना दो अलग काम हैं। पहले के लिए तत्काल injunction उपयोगी हो सकती है, जबकि नकली निशान और बिक्री का आरोप पुलिस जाँच माँग सकता है। नोटिस में दोनों रास्तों का उल्लेख करने से किसी भी परिणाम की गारंटी पैदा नहीं होती।

पेटेंट infringement में सामान्य उपाय

साधारण पेटेंट infringement को अपने आप जेल वाला अपराध बताना गलत है। Patents Act की धारा 108 में injunction तथा वादी के विकल्प पर damages या account of profits जैसे civil remedies हैं। धारा 104 jurisdiction और धारा 107 बचाव से जुड़ी हैं। धारा 107A के वैधानिक अपवाद और धारा 111 की आर्थिक राहत संबंधी सीमाएँ भी प्रासंगिक हो सकती हैं। [2][3]

दावा करने से पहले patent grant, उसकी वर्तमान स्थिति, लागू claims और विवादित product या process का तकनीकी मिलान कराएँ। केवल कोई मिलता विचार, व्यापार का तरीका या सामान देखकर patent infringement घोषित नहीं किया जा सकता। License, expiry, territorial scope और validity के प्रश्न भी जाँचें। Expert claim chart बिना आधार लगाए गए सामान्य आरोप से अधिक उपयोगी होता है।

झूठा patented बताने की अलग penalty

धारा 120 उस स्थिति से संबंधित है जिसमें किसी वस्तु को भारत में गलत तरीके से patented या patent application का विषय बताया जाता है। वर्तमान प्रावधान में अधिकतम दस लाख रुपये penalty और ऐसा claim जारी रहने पर पहले दिन के बाद प्रत्येक दिन एक हजार रुपये की अतिरिक्त penalty का प्रावधान है। यह किसी दूसरे के पेटेंट के साधारण infringement की सार्वभौमिक penalty नहीं है। [2]

तैयारी के लिए कथित गलत label या advertisement, तारीख, seller और वास्तविक patent status सुरक्षित करें। पुराने तथा संशोधित penalty प्रावधानों के अंतर के कारण पुराने लेखों की संख्या सीधे न अपनाएँ। सही आरोप और उसके प्रमाण के आधार पर रणनीति तय करें।

स्रोत

  1. Trade Marks Act 1999 — IP India भारत सरकार। धाराएँ 27 से 30 34 103 से 105 115 134 135 और 142
  2. Patents Act 1970 अद्यतन समेकित पाठ — India Code भारत सरकार। धाराएँ 48 104 107 107A 108 111 और 120 नवीन संशोधन के साथ
  3. Patents Act 1970 न्यायालय से मिलने वाली राहत — India Code भारत सरकार। धारा 108 केवल दीवानी राहत के सत्यापन के लिए बाद के penalty संशोधन अलग स्रोत से

यह सामान्य कानूनी जानकारी है। किसी विशेष मामले में संबंधित दस्तावेज, वर्तमान कानून और लागू अधिसूचनाएँ देखकर सलाह लें।

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Advocate Amardeep Jaiswal
लेखक के बारे में

Advocate Amardeep Jaiswal

Advocate, High Court of Madhya Pradesh, Jabalpur। भारतीय कानून, न्यायिक निर्णय और व्यावहारिक कानूनी विषयों पर जानकारीपूर्ण लेख प्रकाशित करते हैं।

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