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15 October 2026
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निष्पादन में तीसरे पक्ष की बाधा: दावे का निर्णय पूर्ण जांच के बाद करना होगा

कब्जे की डिक्री के निष्पादन का प्रतिरोध करने वाले तीसरे पक्ष की आपत्ति Order XXI Rule 97 के तहत विचारणीय हो सकती है। आवेदन में गलत प्रक्रियात्मक प्रावधान उद्धृत होना अपने…
CourtThe Supreme Court of India
CaseALLADIN CHARITIES AND ZAKAT WAKF VS. MOHAMMAD SALEEM ALIAS MOHD WAJID ALI Case Number: Civil Appeal arising out of S.L.P. (Civil) No. 23573 of 2025
Bench / Coramमाननीय न्यायमूर्ति S.V.N. Bhatti और माननीय न्यायमूर्ति N. V. Anjaria
Citation2026 INSC 1122 Decision
Key Points / एक नज़र में
  • कब्जे की डिक्री के निष्पादन का प्रतिरोध करने वाले तीसरे पक्ष की आपत्ति Order XXI Rule 97 के तहत विचारणीय हो सकती है।
  • आवेदन में गलत प्रक्रियात्मक प्रावधान उद्धृत होना अपने-आप में दावा खारिज करने का आधार नहीं है।
  • Order XXI Rule 101 के अनुसार अधिकार, स्वत्व या हित से जुड़े प्रासंगिक प्रश्नों की जांच आवश्यक है।

विस्तृत विश्लेषण

Legal Analysis • Vakeel Sahab

कब्जे की डिक्री के निष्पादन का प्रतिरोध करने वाले तीसरे पक्ष की आपत्ति Order XXI Rule 97 के तहत विचारणीय हो सकती है। आवेदन में गलत प्रक्रियात्मक प्रावधान उद्धृत होना अपने-आप में दावा खारिज करने का आधार नहीं है। Order XXI Rule 101 के अनुसार अधिकार, स्वत्व या हित से जुड़े प्रासंगिक प्रश्नों की जांच आवश्यक है।

Court: The Supreme Court of India

Case Name: ALLADIN CHARITIES AND ZAKAT WAKF VS. MOHAMMAD SALEEM ALIAS MOHD WAJID ALI

Case Number: Civil Appeal arising out of S.L.P. (Civil) No. 23573 of 2025

Case-number verification: मेटाडेटा में C.A. No. 13762/2026 दिया गया है, लेकिन निर्णय के शीर्षक में Civil Appeal संख्या रिक्त है और केवल S.L.P. (Civil) No. 23573 of 2025 का उल्लेख है। इसलिए लेख में निर्णय-पाठ से सत्यापित विवरण ही दिया गया है।

Bench: माननीय न्यायमूर्ति S.V.N. Bhatti और माननीय न्यायमूर्ति N. V. Anjaria

Neutral Citation: 2026 INSC 1122

Decision Date: 2026-10-14

मामला क्या था?

डिक्रीधारक ने 2001 के विक्रय-समझौते के विशिष्ट पालन और संपत्ति का कब्जा पाने के लिए वाद दायर किया। वाद 2015 में एकपक्षीय रूप से डिक्री हुआ और निष्पादन में कब्जा दिलाने की मांग की गई। Alladin Charities and Zakat Wakf ने तीसरे पक्ष के रूप में आपत्ति की और संपत्ति पर अपना स्वतंत्र अधिकार तथा कब्जा होने का दावा किया। निष्पादन न्यायालय ने आपत्ति खारिज की; उच्च न्यायालय ने भी निर्णय बरकरार रखा।

मुख्य कानूनी प्रश्न

क्या कब्जा दिलाने की डिक्री के निष्पादन में स्वतंत्र अधिकार का दावा करने वाले तीसरे पक्ष की आपत्ति केवल इस आधार पर खारिज की जा सकती है कि उसने CPC के Order XXI Rule 58 के तहत आवेदन किया, जबकि मामला Rule 97 के अंतर्गत विचारणीय था; और क्या ऐसी आपत्ति पर अधिकार, स्वत्व तथा संपत्ति की पहचान से जुड़े प्रश्नों की पूरी जांच जरूरी है?

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों निचली अदालतों के निर्णय निरस्त कर मामला निष्पादन न्यायालय को नए सिरे से भेजा। निर्देश दिया कि दोनों पक्षों को अतिरिक्त या नए निवेदन और साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाए तथा लागू निर्णय के आलोक में नई जांच करके मामले का निपटारा किया जाए।

न्यायालय की प्रमुख reasoning

न्यायालय ने पाया कि निचली अदालतों के कुछ निष्कर्ष स्थापित कानूनी सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थे। Order XXI Rule 97 के तहत निष्पादन में बाधा डालने वाले व्यक्ति की आपत्ति पर Rule 101 के अनुसार अधिकार, स्वत्व और हित सहित संबंधित प्रश्नों की पूर्ण जांच होनी चाहिए। आवेदन में गलत नियम का उल्लेख अपने-आप में तीसरे पक्ष की राहत अस्वीकार करने का पर्याप्त आधार नहीं है। संपत्ति की पहचान और पक्षकारों के परस्पर विरोधी दावों पर आवश्यक जांच किए बिना मामला तय नहीं किया जा सकता।

निर्णय के मुख्य बिंदु

  • कब्जे की डिक्री के निष्पादन का प्रतिरोध करने वाले तीसरे पक्ष की आपत्ति Order XXI Rule 97 के तहत विचारणीय हो सकती है।
  • आवेदन में गलत प्रक्रियात्मक प्रावधान उद्धृत होना अपने-आप में दावा खारिज करने का आधार नहीं है।
  • Order XXI Rule 101 के अनुसार अधिकार, स्वत्व या हित से जुड़े प्रासंगिक प्रश्नों की जांच आवश्यक है।
  • इस मामले में दोनों पक्षों को नए या अतिरिक्त निवेदन और साक्ष्य देने का अवसर देकर नई जांच का आदेश दिया गया।

इस निर्णय का व्यावहारिक प्रभाव

डिक्री से बंधा न होने और संपत्ति में स्वतंत्र अधिकार का दावा करने वाले व्यक्ति की निष्पादन संबंधी आपत्ति को केवल आवेदन में उद्धृत गलत प्रावधान के आधार पर खारिज नहीं किया जाना चाहिए। निष्पादन न्यायालय को लागू प्रक्रिया के अनुसार आपत्ति की जांच करनी होगी और संपत्ति की पहचान तथा संबंधित अधिकारों पर पक्षों को साक्ष्य देने का अवसर देना होगा।

Source check: निर्णय-पाठ में NON-REPORTABLE और Civil Appeal No. रिक्त लिखा है। निर्णय में S.L.P. (Civil) No. 23573 of 2025 तथा 2026 INSC 1122 दिया गया है।

Original Judgment / Source: The Supreme Court of India — Official Judgment PDF

Advocate Amardeep Jaiswal
About the Author / लेखक परिचय

Advocate Amardeep Jaiswal

Advocate, High Court of Madhya Pradesh, Jabalpur। भारतीय कानून, न्यायिक निर्णय और व्यावहारिक कानूनी विषयों पर जानकारीपूर्ण लेख प्रकाशित करते हैं।

Editorial note: यह लेख कानूनी जानकारी और जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित है। Judgment/official source उपलब्ध होने पर authoritative text के लिए मूल स्रोत को प्राथमिकता दें।
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