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28 October 2026
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IBC संशोधन 2026 में सुरक्षित ऋणदाताओं की 14 दिन की समयसीमा

2026 के IBC संशोधन के बाद कुछ नए liquidation मामलों में security अलग से realise करने के इच्छुक secured creditor के लिए समय पर सूचना देना महत्वपूर्ण है। पुरानी प्रक्रियाओं के लिए अलग संक्रमण संबंधी प्रावधान भी पढ़ना जरूरी है।
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  • जानकारी का संदर्भ 28 अक्टूबर 2026 कानूनी स्थिति अधिसूचित प्रावधान 26 मई 2026 से प्रभावी और पुराने liquidation मामलों के लिए विशेष संक्रमण शर्त कर्ज देने वाली कंपनियों के लिए बदलाव किसी कंपनी…
  • Insolvency and Bankruptcy Code Amendment Act 2026 को 6 अप्रैल 2026 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली।
  • अलग commencement notification ने निर्दिष्ट प्रावधानों को 26 मई 2026 से लागू किया।

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जानकारी का संदर्भ 28 अक्टूबर 2026

कानूनी स्थिति अधिसूचित प्रावधान 26 मई 2026 से प्रभावी और पुराने liquidation मामलों के लिए विशेष संक्रमण शर्त

कर्ज देने वाली कंपनियों के लिए बदलाव

किसी कंपनी के परिसमापन यानी liquidation में सुरक्षित ऋणदाता के अधिकार समझते समय अब 2026 के संशोधन को भी पढ़ना होगा। Insolvency and Bankruptcy Code Amendment Act 2026 को 6 अप्रैल 2026 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली। अलग commencement notification ने निर्दिष्ट प्रावधानों को 26 मई 2026 से लागू किया। इनमें section 52 बदलने वाला संशोधन भी शामिल है। [1][2]

किसी अधिनियम के पारित होने और उसके अलग-अलग प्रावधान लागू होने की तारीख एक जैसी होना आवश्यक नहीं है। ऋणदाता को अपने मामले में पहले लागू प्रावधान और प्रक्रिया आरंभ होने की तारीख पहचाननी चाहिए।

14 दिन के भीतर किस बात की सूचना

बदले हुए section 52 के उप-खंड 2 में, अपनी security अलग से realise करने का इरादा रखने वाले secured creditor को liquidation commencement से 14 दिन के भीतर liquidator को सूचना देकर संबंधित asset की पहचान बताने का प्रावधान है। चूक पर security को liquidation estate के पक्ष में छोड़ा हुआ मानने का परिणाम लिखा है। [1]

एक ही asset पर कई secured creditors हों तो ऐसे security interests से सुरक्षित सभी claims के मूल्य के कम से कम 66 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करने वाले secured creditors की सहमति की शर्त भी है। [1]

पुराने मामलों पर सीधे नया नियम न लगाएँ

संशोधन के explanation में कहा गया है कि बदला हुआ sub-section 2 उसके commencement की तारीख को और उससे पहले शुरू हुए liquidation पर लागू नहीं होगा। इसलिए पुराने मामले का विश्लेषण उसकी तारीख और संक्रमण प्रावधान देखकर करना चाहिए। [1]

व्यावहारिक फाइल में tribunal के आदेश, liquidation commencement date और प्राप्त संचार को साथ रखें। केवल बैंक के आंतरिक सिस्टम में दर्ज केस खुलने की तारीख को कानूनी commencement date मान लेना जोखिम पैदा कर सकता है।

कंपनी या ऋणदाता अपनी फाइल कैसे तैयार करे

तैयारी के लिए facility agreement, security documents और asset का पहचान विवरण एक जगह उपलब्ध होना उपयोगी है। यदि security कई परिसंपत्तियों पर है, तो प्रत्येक asset का स्पष्ट विवरण रखने से सूचना तैयार करने में सुविधा होगी। दस्तावेज जुटाने की जिम्मेदारी तय करने के लिए अंतिम दिन की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए।

कई ऋणदाता होने की स्थिति में संपर्क करने वाले व्यक्तियों और निर्णय लेने के अधिकार का रिकॉर्ड भी रखें। सहमति की गणना केवल सदस्यों की संख्या गिनकर करने के बजाय लागू प्रावधान के अनुसार claims के मूल्य के आधार पर जाँचनी होगी।

यह आंतरिक तैयारी का सुझाव है। किसी खास मामले में security की वैधता, लागू regulations, liquidator की प्रक्रिया और संबंधित आदेश अलग से देखना जरूरी रहेगा।

एक सामान्य व्यावहारिक स्थिति

मान लें कि किसी नए liquidation की सूचना कंपनी के मुख्य कार्यालय में आती है, जबकि security के मूल कागज दूसरे शहर की शाखा में हैं। यदि सूचना आगे भेजने और कागज मँगाने की जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं है, तो कानूनी विश्लेषण शुरू होने से पहले ही उपलब्ध समय घट सकता है।

ऐसी स्थिति के लिए पहले से जिम्मेदार अधिकारी और दस्तावेजों का स्थान तय रखना मददगार है। Liquidator को भेजी गई सूचना और उसकी प्राप्ति का प्रमाण उसी फाइल में रखें। समयसीमा की गणना तथा सूचना के तरीके की मामले के अनुसार जाँच कराएँ।

प्रबंधन को क्या समझना चाहिए

यह बदलाव बताता है कि security लेने के बाद उसके enforcement से जुड़ी प्रक्रिया पर भी नियमित ध्यान चाहिए। केवल ऋण खाते में बकाया दर्ज होना पूरी तैयारी नहीं है। प्रारंभिक सूचना, asset की पहचान और साझा security की स्थिति समय रहते स्पष्ट रहने से ऋणदाता अपने उपलब्ध विकल्पों का बेहतर मूल्यांकन कर सकता है।

स्रोत

  1. Insolvency and Bankruptcy Code Amendment Act 2026 — भारत का राजपत्र प्रति NCLT। संशोधन अधिनियम की धारा 31 और section 52 का संक्रमण explanation
  2. IBC Amendment Act commencement notification SO 2625E — MCA भारत का राजपत्र प्रति NCLT। अधिनियम की धाराएँ 8 से 33 सहित निर्दिष्ट provisions के लिए 26 मई 2026

यह सामान्य कानूनी जानकारी है। किसी विशेष मामले में संबंधित दस्तावेज, वर्तमान कानून और लागू अधिसूचनाएँ देखकर सलाह लें।

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Advocate Amardeep Jaiswal
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Advocate Amardeep Jaiswal

Advocate, High Court of Madhya Pradesh, Jabalpur। भारतीय कानून, न्यायिक निर्णय और व्यावहारिक कानूनी विषयों पर जानकारीपूर्ण लेख प्रकाशित करते हैं।

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