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28 October 2026
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एक ही मुकदमे में कई आजीवन कारावास की सजाएँ लगातार नहीं चल सकतीं: Raju Shantaram Koli बनाम State of Maharashtra

एक ही मुकदमे में दी गई कई आजीवन कारावास की सजाएँ लगातार नहीं चलाई जा सकतीं। ऐसी सजाएँ एक-दूसरे पर अध्यारोपित होंगी। एक सजा के संबंध में remission या commutation का लाभ दूसरी सजा पर अपने-आप लागू नहीं होगा। Court: The Supreme Court of India Case Name: RAJU SHANTARAM KOLI VS. THE STATE OF MAHARASHTRA Case Number: Criminal Appeal Nos. 5072 and 5073 of 2026; Appeal No. 5072 arising out of SLP (Crl.) No. 8535 of 2025; Appeal No. 5073 arising out of SLP (Crl.) No. 20839 of 2026, arising out of Diary No. 49371 of 2026 Bench: माननीय न्यायमूर्ति K. V. Viswanathan और माननीय न्यायमूर्ति Arun Palli Neutral Citation: 2026 INSC 1161 Decision Date: 2026-10-27 मामला क्या था? Raju Shantaram Koli को IPC की Sec…
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  • एक ही मुकदमे में दी गई कई आजीवन कारावास की सजाएँ लगातार नहीं चलाई जा सकतीं।
  • ऐसी सजाएँ एक-दूसरे पर अध्यारोपित होंगी।
  • एक सजा के संबंध में remission या commutation का लाभ दूसरी सजा पर अपने-आप लागू नहीं होगा।

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एक ही मुकदमे में दी गई कई आजीवन कारावास की सजाएँ लगातार नहीं चलाई जा सकतीं। ऐसी सजाएँ एक-दूसरे पर अध्यारोपित होंगी। एक सजा के संबंध में remission या commutation का लाभ दूसरी सजा पर अपने-आप लागू नहीं होगा।

Court: The Supreme Court of India

Case Name: RAJU SHANTARAM KOLI VS. THE STATE OF MAHARASHTRA

Case Number: Criminal Appeal Nos. 5072 and 5073 of 2026; Appeal No. 5072 arising out of SLP (Crl.) No. 8535 of 2025; Appeal No. 5073 arising out of SLP (Crl.) No. 20839 of 2026, arising out of Diary No. 49371 of 2026

Bench: माननीय न्यायमूर्ति K. V. Viswanathan और माननीय न्यायमूर्ति Arun Palli

Neutral Citation: 2026 INSC 1161

Decision Date: 2026-10-27

मामला क्या था?

Raju Shantaram Koli को IPC की Sections 302 तथा 376 read with 342 के अपराधों में दोषी ठहराकर अलग-अलग आजीवन कारावास की सजाएँ दी गई थीं। ट्रायल कोर्ट ने सजाओं को लगातार चलाने का निर्देश दिया, जिसे Bombay High Court ने बरकरार रखा। अपील में इस निर्देश की वैधता को चुनौती दी गई।

मुख्य कानूनी प्रश्न

क्या एक ही मुकदमे में अलग-अलग अपराधों के लिए दी गई एक से अधिक आजीवन कारावास की सजाओं को लगातार चलाने का निर्देश दिया जा सकता है?

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक ही मुकदमे में कई अपराधों के लिए दी गई आजीवन कारावास की सजाएँ लगातार नहीं चलाई जा सकतीं। वे एक-दूसरे पर अध्यारोपित होंगी। इसलिए लगातार सजा चलाने का निर्देश रद्द किया गया; दोषसिद्धि और सजा के अन्य हिस्से बरकरार रखे गए।

न्यायालय की प्रमुख reasoning

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने Constitution Bench के Muthuramalingam निर्णय में प्रतिपादित नियम लागू किया। आजीवन कारावास का अर्थ दोषी के शेष जीवन के लिए कारावास है; इसलिए एक ही व्यक्ति से लगातार कई आजीवन सजाएँ भुगतवाने का निर्देश असंगत होगा। हालांकि, एक से अधिक आजीवन सजाएँ अध्यारोपित रहेंगी, ताकि एक सजा के संबंध में दी गई remission या commutation अपने-आप दूसरी सजा पर लागू न हो।

निर्णय के मुख्य बिंदु

  • एक ही मुकदमे में दी गई कई आजीवन कारावास की सजाएँ लगातार नहीं चलाई जा सकतीं।
  • ऐसी सजाएँ एक-दूसरे पर अध्यारोपित होंगी।
  • एक सजा के संबंध में remission या commutation का लाभ दूसरी सजा पर अपने-आप लागू नहीं होगा।
  • इस मामले में केवल लगातार सजा चलाने का निर्देश हटाया गया; दोषसिद्धि और आदेश के अन्य हिस्से बरकरार रहे।
  • SLP (Crl.) No. 8535 of 2025 से उत्पन्न अपील को दूसरी अपील के निस्तारण के बाद निष्फल मानकर निस्तारित किया गया।

इस निर्णय का व्यावहारिक प्रभाव

यदि एक ही मुकदमे में कई अपराधों के लिए आजीवन कारावास की सजाएँ दी गई हों, तो उन्हें लगातार चलाने का निर्देश टिकाऊ नहीं होगा। सजाएँ अध्यारोपित रहेंगी और किसी एक सजा के लिए दी गई remission या commutation स्वतः दूसरी सजा को समाप्त या कम नहीं करेगी।

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Advocate Amardeep Jaiswal
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Advocate Amardeep Jaiswal

Advocate, High Court of Madhya Pradesh, Jabalpur। भारतीय कानून, न्यायिक निर्णय और व्यावहारिक कानूनी विषयों पर जानकारीपूर्ण लेख प्रकाशित करते हैं।

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