Section 14-A के तहत निजी tank या oorani के संबंध में Ryotwari Patta देने पर रोक है; निर्णय गैर-Ryoti भूमि पर पट्टे की पात्रता को भी भूमि की वास्तविक और अभिलेखीय प्रकृति से जोड़ता है। भूमि की प्रकृति तय करते समय पुराने Survey और Settlement Records सहित शुरुआती राजस्व अभिलेख महत्वपूर्ण हैं। Mixed Residential Zone का निर्धारण अपने-आप Government Poramboke या जलाशय भूमि पर सरकारी अधिकार समाप्त नहीं करता।
Court: The Supreme Court of India
Case Name: S. GURURAJ VS. THE ADDITIONAL CHIEF SECRETARY/ COMMISSIONER OF LAND ADMINISTRATION
Case Number: Civil Appeal Nos. 13629, 13630 और 13631 of 2026
Bench: माननीय न्यायमूर्ति S.V.N. Bhatti और माननीय न्यायमूर्ति N. V. Anjaria
Neutral Citation: 2026 INSC 1146
Decision Date: 2026-10-16
मामला क्या था?
Survey No. 572 की संबंधित भूमि को पुराने राजस्व अभिलेखों में Government Poramboke—Kanakkan Kuttai के रूप में दर्ज किया गया था। 2011 में District Revenue Officer ने P. Ramadoss को 0.72 एकड़ के लिए Ryotwari Patta दिया। बाद में भूमि का हिस्सा बैंक के पक्ष में बंधक रखा गया और 0.22 एकड़ पर 20 फ्लैट बनाए गए तथा बेचे गए। Commissioner of Land Administration ने पट्टा रद्द किया; मद्रास उच्च न्यायालय ने उस निर्णय को कायम रखते हुए संरचनाएँ हटाने का निर्देश दिया। फ्लैट खरीदार और बैंक ने अपील की।
मुख्य कानूनी प्रश्न
क्या Government Poramboke के रूप में दर्ज जलाशय भूमि पर Ryotwari Patta दिया जा सकता है, और क्या सरकारी अभिलेखों तथा अनुमतियों पर भरोसा करके फ्लैट खरीदने वालों के हितों की रक्षा के लिए जलाशय-संरक्षण कानून से समझौता किए बिना राहत दी जा सकती है?
माननीय सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अपीलें खारिज कीं और स्पष्ट किया कि गैर-Ryoti भूमि, विशेषकर राजस्व अभिलेखों में जलाशय या Government Poramboke के रूप में दर्ज भूमि, पर Act, 1948 के तहत Ryotwari Patta नहीं दिया जा सकता। हालांकि, सरकारी अभिलेखों और स्थानीय निकाय की अनुमतियों पर भरोसा करके फ्लैट खरीदने वालों की कठिनाई को देखते हुए राज्य के मुख्य सचिव और जिला कलेक्टर को सोसायटी के माध्यम से फ्लैट मालिकों को तुलनीय खाली स्थल देने का निर्देश दिया। स्थल आवंटन के बाद 0.22 एकड़ पर बनी संरचनाएँ हटाई जानी हैं।
न्यायालय की प्रमुख reasoning
माननीय सुप्रीम कोर्ट ने माना कि पट्टे की पात्रता भूमि की प्रकृति, उसके उपयोग और संबंधित अभिलेखों से तय होगी; शुरुआती राजस्व तथा सर्वेक्षण अभिलेख इस जांच में महत्वपूर्ण हैं। मिश्रित आवासीय ज़ोन का निर्धारण सरकारी Poramboke या जलाशय भूमि पर राज्य के अधिकारों को समाप्त नहीं करता। Section 14-A गैर-Ryoti भूमि पर पट्टा देने पर रोक लगाता है और ऐसी भूमि के वर्गीकरण को बदलकर पट्टा देने की अनुमति नहीं देता। साथ ही, सरकारी राजस्व प्रविष्टियों और नगर निकाय की स्वीकृतियों से प्रेरित होकर संपत्ति खरीदने वालों की कठिनाई को राहत तय करते समय ध्यान में रखा गया।
निर्णय के मुख्य बिंदु
- Section 14-A के तहत निजी tank या oorani के संबंध में Ryotwari Patta देने पर रोक है; निर्णय गैर-Ryoti भूमि पर पट्टे की पात्रता को भी भूमि की वास्तविक और अभिलेखीय प्रकृति से जोड़ता है।
- भूमि की प्रकृति तय करते समय पुराने Survey और Settlement Records सहित शुरुआती राजस्व अभिलेख महत्वपूर्ण हैं।
- Mixed Residential Zone का निर्धारण अपने-आप Government Poramboke या जलाशय भूमि पर सरकारी अधिकार समाप्त नहीं करता।
- सरकारी अभिलेखों और नगरपालिका अनुमतियों पर भरोसा करके घर खरीदने वालों की कठिनाई को राहत निर्धारित करते समय ध्यान में रखा जा सकता है, पर इससे Section 14-A की रोक निष्प्रभावी नहीं होती।
- सोसायटी के प्रतिनिधित्व वाले फ्लैट मालिकों को तुलनीय खाली स्थल देने के बाद 0.22 एकड़ पर बनी संरचनाएँ हटाई जानी हैं।
इस निर्णय का व्यावहारिक प्रभाव
जलाशय या Government Poramboke भूमि पर अवैध पट्टा और उससे निकले संपत्ति अधिकार, केवल ज़ोनिंग या बाद की प्रविष्टियों से वैध नहीं होते। इस मामले में फ्लैट मालिकों को तुलनीय खाली स्थल देने के बाद ही 0.22 एकड़ पर बनी इमारत हटाई जानी है। फ्लैट मालिक और बैंक डेवलपर, मालिक या बंधककर्ता के विरुद्ध सक्षम सिविल न्यायालय में अपने कानूनी उपाय अपना सकते हैं। राज्य erring अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है।