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29 October 2026
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मनी लॉन्ड्रिंग में PMLA धारा 45 के तहत जमानत कैसे मिलती है?

PMLA धारा 45 में Public Prosecutor को विरोध का अवसर और विरोध होने पर not guilty होने के reasonable grounds तथा bail पर अपराध न करने की संभावना का परीक्षण है। यह regular bail की सामान्य बातों के अतिरिक्त statutory framework है। रकम बड़ी है, इसलिए कभी bail नहीं या आर्थिक मामला है, इसलिए तुरंत bail—दोनों सामान्य निष्कर्ष गलत हैं।
मुख्य बातें
  • कानूनी संदर्भ तारीख: 28 October 2026 धारा 45 की अतिरिक्त शर्तें PMLA धारा 45 में Public Prosecutor को विरोध का अवसर और विरोध होने पर not guilty होने के reasonable grounds तथा bail पर अपराध न…
  • यह regular bail की सामान्य बातों के अतिरिक्त statutory framework है।
  • रकम बड़ी है, इसलिए कभी bail नहीं या आर्थिक मामला है, इसलिए तुरंत bail—दोनों सामान्य निष्कर्ष गलत हैं।

विस्तृत विवेचना

कानून और प्रक्रिया की समझ

कानूनी संदर्भ तारीख: 28 October 2026

धारा 45 की अतिरिक्त शर्तें

PMLA धारा 45 में Public Prosecutor को विरोध का अवसर और विरोध होने पर not guilty होने के reasonable grounds तथा bail पर अपराध न करने की संभावना का परीक्षण है। यह regular bail की सामान्य बातों के अतिरिक्त statutory framework है। रकम बड़ी है, इसलिए कभी bail नहीं या आर्थिक मामला है, इसलिए तुरंत bail—दोनों सामान्य निष्कर्ष गलत हैं। [1]

proviso में सोलह वर्ष से कम, महिला, sick या infirm तथा निर्दिष्ट एक करोड़ रुपये से कम money-laundering accusation वाले व्यक्तियों के लिए Special Court की relaxation व्यवस्था है। इसका अर्थ इन श्रेणियों में automatic release नहीं है। संबंधित statutory words, aggregate allegation और वास्तविक facts जाँचें। पुरानी pre-amendment खबर पढ़कर आज twin conditions लागू नहीं हैं, ऐसा न मानें।

व्यक्तिगत भूमिका और custody का प्रश्न

proceeds of crime का आरोप, applicant की participation, bank trail और relied material का संबंध समझें। केवल scheduled offence का अस्तित्व और money-laundering की अपनी ingredients अलग कानूनी प्रश्न हैं। गिरफ्तारी की वैधता, documents supply, merits bail और prolonged custody के remedies को सही prayer से जोड़ें। PMLA complaint को सामान्य police chargesheet की तरह बिना अंतर समझे न पढ़ें।

उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति के खाते में रकम आने का record है तो उसके source, control और आरोपित involvement के दस्तावेज तैयार करें। कहानी बनाकर transaction बदलना समाधान नहीं है। medical proviso उठाना है तो current health evidence दें। counsel current judgments और specific prosecution material देखकर relief तय करे; राशि, पद या पेशे के आधार पर निश्चित bail result बताना जिम्मेदार मूल्यांकन नहीं है।

विशेष अधिनियम के प्रतिबंध अलग जाँचें

कुछ अपराधों में सामान्य जमानत प्रावधान के साथ विशेष कानून की अतिरिक्त कसौटी लागू होती है। सभी गैर-जमानती अपराधों को एक जैसा मानकर आवेदन तैयार न करें। FIR के अलावा संबंधित अधिनियम, अपराध की आवश्यक शर्तें, अभियोजन की सामग्री और सक्षम विशेष अदालत की भूमिका जाँचना आवश्यक है। [2]

विशेष कानून में लागू रोक का उत्तर केवल आरोपी निर्दोष है लिखकर नहीं दिया जा सकता। वकील को बताएँ कि आरोप किस तथ्य पर टिका है और कौन सा रिकॉर्ड उसका समर्थन या खंडन करता है। जमानत की सुनवाई में गोपनीय या संरक्षित पहचान सार्वजनिक करना जरूरी नहीं है।

पैसे और डिजिटल रिकॉर्ड का सही उपयोग

बैंक विवरण, transaction reference, खाते के संचालन और संबंधित बातचीत की मूल सामग्री सुरक्षित रखें। रकम खाते में आने, उसका उपयोग करने और अपराध में जानबूझकर भाग लेने के आरोप अलग तथ्य हैं। आवेदन में अपनी विशिष्ट भूमिका तथा अभियोजन की सामग्री का उत्तर दें। account freeze और व्यक्ति की जमानत अलग राहत हैं।

राशि लौटाने या settlement का प्रस्ताव अपने आप हर आपराधिक आरोप समाप्त नहीं करता। कोई राशि जमा करने का निर्देश हो तो उसकी भाषा और वैधानिक आधार वकील से समझें। साक्ष्य मिटाना, खाता दूसरों से चलवाना या असत्य बैंक कागज बनाना उचित उपाय नहीं है। संबंधित अधिकारी या अदालत से अधिकृत रिकॉर्ड लेने का रास्ता अपनाएँ।

तारीखों और दस्तावेजों की फाइल बनाएँ

FIR, गिरफ्तारी और प्रथम रिमांड की तारीख, जेल का विवरण, लगी धाराएँ तथा पिछले आदेश एक जगह रखें। घटनाओं की छोटी समयरेखा बनाएँ। शिकायत का आरोप, पुलिस का दावा और अपने दस्तावेजों से सत्यापित तथ्य अलग लिखें। गलत तारीख या अधूरा अपराध क्रमांक तत्काल राहत में अनावश्यक बाधा पैदा कर सकता है।

वकील को पुराने मामले, पहले की जमानत अर्जियाँ और लंबित वारंट भी बताएँ। डिजिटल रिकॉर्ड की मूल फाइल तथा उपलब्ध प्राप्ति सुरक्षित रखें। आवेदन में केवल वही दस्तावेज लगाएँ जो संबंधित प्रश्न समझाते हों; दूसरे व्यक्ति की निजी जानकारी अनावश्यक रूप से सार्वजनिक न करें।

लंबी हिरासत का आधार सही रखें

हिरासत की कुल अवधि के साथ संभावित अधिकतम दंड, आरोपों की प्रकृति और बची हुई सुनवाई देखें। BNSS की धारा 479 की निर्धारित पात्रता और Article 21 पर आधारित समयबद्ध न्याय का प्रश्न अलग हैं। एक रास्ते पर रोक हो तो उससे हर दूसरे वैधानिक या संवैधानिक उपाय का अंत मानना सही नहीं है। [3] [4]

रिहाई माँगते समय यह भी बताएँ कि उपस्थिति और गवाहों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी। अनिश्चित ट्रायल की बात उपलब्ध आदेशों से समझाएँ। प्रत्येक आधार की सीमाएँ और लागू विशेष कानून की कसौटी अलग से पढ़नी होती है।

स्रोत

  1. Prevention of Money-laundering Act, 2002 — Department of Revenue, Government of India. Sections 45 and 46: additional conditions and proviso categories. Current judicial interpretation must also be checked.
  2. Satender Kumar Antil v. CBI — corrected judgment, 11 July 2022 — Supreme Court of India; copy hosted by Shahdara District Court. Individual assessment, investigation cooperation, charge-sheet stage and disposal directions. Read with subsequent law and special enactments.
  3. Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 — official comparative publication — Bureau of Police Research & Development, Government of India. Sections 2, 35, 187, 430, 478–493 and 531. Bracketed CrPC comparisons must be distinguished from operative BNSS text.
  4. Union of India v. K.A. Najeeb, (2021) 3 SCC 713 — Supreme Court of India. Especially paragraphs 17–18: statutory restrictions, constitutional liberty, long custody and realistic trial delay.

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Advocate Amardeep Jaiswal
लेखक के बारे में

Advocate Amardeep Jaiswal

Advocate, High Court of Madhya Pradesh, Jabalpur। भारतीय कानून, न्यायिक निर्णय और व्यावहारिक कानूनी विषयों पर जानकारीपूर्ण लेख प्रकाशित करते हैं।

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