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22 October 2026
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सार्वजनिक संपत्ति की नीलामी: हस्तांतरण विलेख से पहले प्रशासन मूल्य अधिकतम करने के लिए नीलामी दोबारा करा सकता है

न्यायालय ने इस मामले में Agreement to Sell और अंतिम प्रवर्तनीय संविदा के बीच अंतर किया; Conveyance Deed निष्पादित न होने पर संविदात्मक प्रक्रिया पूर्ण नहीं हुई थी। Chandi…
CourtThe Supreme Court of India
Bench / Coramमाननीय न्यायमूर्ति Pamidighantam Sri Narasimha और माननीय न्यायमूर्ति Alok Aradhe
Citation2026 INSC 1142 Decision
Key Points / एक नज़र में
  • न्यायालय ने इस मामले में Agreement to Sell और अंतिम प्रवर्तनीय संविदा के बीच अंतर किया; Conveyance Deed निष्पादित न होने पर संविदात्मक प्रक्रिया पूर्ण नहीं हुई थी।
  • Chandigarh Estate Rules, 2007 और नीलामी की शर्तों के तहत प्रशासन को नीलामी से स्थल वापस लेने तथा उच्चतम बोली पर निर्णय करने की शक्ति थी।
  • सार्वजनिक संपत्ति का बेहतर मूल्य प्राप्त करना, संविदा अंतिम होने से पहले, नीलामी दोबारा कराने का वैध विचार हो सकता है।

विस्तृत विश्लेषण

Legal Analysis • Vakeel Sahab

न्यायालय ने इस मामले में Agreement to Sell और अंतिम प्रवर्तनीय संविदा के बीच अंतर किया; Conveyance Deed निष्पादित न होने पर संविदात्मक प्रक्रिया पूर्ण नहीं हुई थी। Chandigarh Estate Rules, 2007 और नीलामी की शर्तों के तहत प्रशासन को नीलामी से स्थल वापस लेने तथा उच्चतम बोली पर निर्णय करने की शक्ति थी। सार्वजनिक संपत्ति का बेहतर मूल्य प्राप्त करना, संविदा अंतिम होने से पहले, नीलामी दोबारा कराने का वैध विचार हो सकता है।

Court: The Supreme Court of India

Case Name: SATINDER PAL SINGH VS. BEDI HOSPITAL

Case Number: Civil Appeal No(s). of 2026 arising out of SLP No. 33791 of 2025; connected Civil Appeal No(s). of 2026 arising out of SLP No. 33793 of 2025

Case-number verification: विश्वसनीय मेटाडेटा में C.A. No. 13855/2026 दिया है, लेकिन निर्णय के शीर्षक में Civil Appeal संख्या रिक्त है। इसलिए लेख में निर्णय-पाठ में दर्ज मूल SLP संख्याएँ ही दी गई हैं।

Bench: माननीय न्यायमूर्ति Pamidighantam Sri Narasimha और माननीय न्यायमूर्ति Alok Aradhe

Neutral Citation: 2026 INSC 1142

Decision Date: 2026-10-16

मामला क्या था?

Chandigarh Administration ने Sector 33C में दो समान क्षेत्रफल वाले नर्सिंग होम स्थलों की नीलामी की। Site No. 4 के लिए Bedi Hospital की ₹12.58 करोड़ की बोली स्वीकार हुई। अस्पताल ने पूरी राशि जमा की और उसके पक्ष में Agreement to Sell निष्पादित हुआ, लेकिन Allotment Letter और Conveyance Deed जारी होने से पहले प्रशासन ने पास के समान क्षेत्रफल वाले Site No. 3 की ₹18.25 करोड़ की बोली से तुलना करते हुए Site No. 4 की नीलामी रद्द कर दी और रकम लौटा दी। हाई कोर्ट ने रद्दीकरण निरस्त किया, जबकि उसकी अंतरिम व्यवस्था के दौरान हुई बाद की नीलामी में दूसरे अपीलकर्ता ने ₹18.30 करोड़ की बोली लगाई थी।

मुख्य कानूनी प्रश्न

क्या Chandigarh Administration, 25% और शेष 75% बोली-राशि स्वीकार करने तथा Agreement to Sell निष्पादित होने के बाद, लेकिन Allotment Letter और Conveyance Deed जारी/निष्पादित होने से पहले, कम बोली को बाजार मूल्य के अनुरूप न मानते हुए नीलामी रद्द कर दोबारा नीलामी करा सकता है; और बाद में हुई सफल नीलामी का लंबित रिट याचिका पर क्या प्रभाव पड़ता है?

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि Agreement to Sell अपने-आप में इस मामले में Section 2(h) of the Indian Contract Act, 1872 के अर्थ में प्रवर्तनीय संविदा नहीं था; Allotment Letter और Conveyance Deed जारी/निष्पादित होने से पहले Chandigarh Administration नियमों और नीलामी की शर्तों के तहत स्थल वापस लेकर पुनः नीलामी कर सकता था। सार्वजनिक संपत्ति के मामले में, प्रवर्तनीय संविदा बनने से पहले बेहतर मूल्य प्राप्त करने के उद्देश्य से नीलामी प्रक्रिया पर पुनर्विचार उचित हो सकता है, बशर्ते प्रशासनिक कार्रवाई मनमानी या अनुचित न हो। अपीलें स्वीकार कर हाई कोर्ट का निर्णय निरस्त किया गया और Site No. 4 की नई ई-नीलामी तीन महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया गया।

न्यायालय की प्रमुख reasoning

Chandigarh Estate Rules, 2007 के Rule 5 और नीलामी की शर्तों में प्रशासन के लिए नीलामी से स्थल वापस लेने तथा उच्चतम बोली स्वीकार या अस्वीकार करने की शक्ति सुरक्षित थी। न्यायालय ने माना कि संविदात्मक अधिकार और दायित्व Conveyance Deed के निष्पादन पर पूर्ण रूप से स्थापित होते; उससे पहले सार्वजनिक प्राधिकरण को निष्पक्षता और सार्वजनिक उद्देश्य के अनुरूप कार्य करते हुए बेहतर मूल्य पाने के लिए प्रक्रिया दोहराने की गुंजाइश थी। पास के समान आकार के स्थल की तुलना में Site No. 4 की बोली में बड़ा अंतर इस निर्णय के लिए प्रासंगिक था। बाद की नीलामी में ₹18.30 करोड़ की बोली आई, और न्यायालय ने उससे उत्पन्न स्थिति को देखते हुए एक और नई नीलामी का आदेश दिया।

निर्णय के मुख्य बिंदु

  • न्यायालय ने इस मामले में Agreement to Sell और अंतिम प्रवर्तनीय संविदा के बीच अंतर किया; Conveyance Deed निष्पादित न होने पर संविदात्मक प्रक्रिया पूर्ण नहीं हुई थी।
  • Chandigarh Estate Rules, 2007 और नीलामी की शर्तों के तहत प्रशासन को नीलामी से स्थल वापस लेने तथा उच्चतम बोली पर निर्णय करने की शक्ति थी।
  • सार्वजनिक संपत्ति का बेहतर मूल्य प्राप्त करना, संविदा अंतिम होने से पहले, नीलामी दोबारा कराने का वैध विचार हो सकता है।
  • इस शक्ति का प्रयोग सार्वजनिक प्राधिकरण को मनमाने या अनुचित ढंग से नहीं, बल्कि निष्पक्षता और सार्वजनिक उद्देश्य के अनुरूप करना होगा।
  • न्यायालय ने Site No. 4 की नई ई-नीलामी तीन महीने के भीतर कराने का निर्देश दिया।

इस निर्णय का व्यावहारिक प्रभाव

सार्वजनिक भूमि की नीलामी में उच्चतम बोलीदाता को केवल बोली स्वीकार होने, पूरी रकम जमा करने या Agreement to Sell मिलने से हर परिस्थिति में अंतिम हस्तांतरण का अधिकार नहीं मिल जाता। Allotment Letter और Conveyance Deed से पहले प्रशासन नियमों में सुरक्षित अधिकार का इस्तेमाल कर सकता है, लेकिन उसे निष्पक्षता, गैर-मनमानी और सार्वजनिक हित के अनुरूप कारणों पर काम करना होगा। इस मामले में अंतिम निर्देश Site No. 4 की नई ई-नीलामी तीन महीने के भीतर कराने का है।

Source check: निर्णय-पाठ में REPORTABLE स्पष्ट रूप से अंकित है।
Advocate Amardeep Jaiswal
About the Author / लेखक परिचय

Advocate Amardeep Jaiswal

Advocate, High Court of Madhya Pradesh, Jabalpur। भारतीय कानून, न्यायिक निर्णय और व्यावहारिक कानूनी विषयों पर जानकारीपूर्ण लेख प्रकाशित करते हैं।

Editorial note: यह लेख कानूनी जानकारी और जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित है। Judgment/official source उपलब्ध होने पर authoritative text के लिए मूल स्रोत को प्राथमिकता दें।
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