जमानत या रिहाई के लिए अलग-अलग मंचों पर समानांतर कार्यवाही करते समय संबंधित न्यायालयों को सभी महत्वपूर्ण कार्यवाहियों और उनके परिणामों का पर्याप्त खुलासा करना चाहिए। महत्वपूर्ण राहत-अस्वीकृति छिपाना और समानांतर उपायों की जानकारी न देना प्रक्रिया का दुरुपयोग तथा bona fides की कमी दर्शा सकता है। अवकाश के दौरान पर्याप्त सूचना के बिना शीघ्र सूचीकरण प्राप्त करने का प्रयास न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
Court: The Supreme Court of India
Case Name: SENIOR INTELLIGENCE OFFICER VS. MOHAMMED KAMRAN
Case Number: Criminal Appeal arising out of SLP (Crl) No. 7504 of 2026
Case-number verification: निर्णय-पाठ में Criminal Appeal No. 2026 रिक्त है और अपील को SLP (Crl) No. 7504 of 2026 से उत्पन्न बताया गया है। इसलिए मेटाडेटा में दिया Crl.A. No. 4994/2026 शामिल नहीं किया गया।
Bench: माननीय न्यायमूर्ति Dipankar Datta और माननीय न्यायमूर्ति Sheel Nagu
Neutral Citation: 2026 INSC 1140
Decision Date: 2026-10-16
मामला क्या था?
आरोपी पर CGST Act के तहत कथित फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट और कर-चोरी से जुड़े अपराधों का आरोप था। ट्रायल कोर्ट और सेशंस कोर्ट में जमानत अर्जियां खारिज होने के बाद उसने हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की। इसके लंबित रहते उसने गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली रिट याचिका में भी रिहाई की अंतरिम मांग की, जो अस्वीकार हुई। उसने उस अस्वीकृति का जमानत याचिका की शीघ्र सुनवाई के समय खुलासा नहीं किया। हाई कोर्ट ने अवकाश के दौरान जमानत दी।
मुख्य कानूनी प्रश्न
क्या आरोपी द्वारा जमानत और रिहाई के लिए विभिन्न मंचों पर समानांतर कार्यवाही करना, उन कार्यवाहियों के परिणामों का खुलासा न करना और अवकाश के दौरान सीमित सूचना पर शीघ्र सुनवाई प्राप्त करना प्रक्रिया का दुरुपयोग है; तथा हाई कोर्ट की छुट्टियों में दो सप्ताह बाद की सूची-तिथि की गणना कैसे होनी चाहिए?
माननीय सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
माननीय सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी के समानांतर कार्यवाहियों और महत्वपूर्ण तथ्यों के गैर-प्रकटीकरण को प्रक्रिया का दुरुपयोग माना। उसने हाई कोर्ट के उस आदेश का हिस्सा निरस्त किया जिससे जमानत याचिका का निपटारा हुआ था और याचिका को गुण-दोष पर नए सिरे से विचार के लिए वापस भेजा। आरोपी को पहले की शर्तों पर अंतरिम जमानत पर जारी रखने का निर्देश दिया गया, जो हाई कोर्ट के आगे के आदेश तक प्रभावी रहेगी।
न्यायालय की प्रमुख reasoning
रिकॉर्ड और सुनवाई की रिकॉर्डिंग देखने के बाद माननीय सुप्रीम कोर्ट ने माना कि appellant की ओर से उपस्थित वकील ने कुछ दलीलें दी थीं, इसलिए यह कहना पूरी तरह सही नहीं कि appellant का प्रतिनिधित्व बिल्कुल नहीं हुआ। फिर भी, आरोपी ने सेशंस कोर्ट और हाई कोर्ट में राहत के लिए समानांतर कदम उठाए और रिहाई की अंतरिम मांग अस्वीकार होने की जानकारी जमानत सुनने वाले न्यायाधीश को नहीं दी। अवकाश के दौरान पर्याप्त सूचना के बिना शीघ्र सूचीकरण की मांग ने भी न्यायालय को गुमराह करने और प्रक्रिया में आगे निकलने का प्रयास दिखाया।
निर्णय के मुख्य बिंदु
- जमानत या रिहाई के लिए अलग-अलग मंचों पर समानांतर कार्यवाही करते समय संबंधित न्यायालयों को सभी महत्वपूर्ण कार्यवाहियों और उनके परिणामों का पर्याप्त खुलासा करना चाहिए।
- महत्वपूर्ण राहत-अस्वीकृति छिपाना और समानांतर उपायों की जानकारी न देना प्रक्रिया का दुरुपयोग तथा bona fides की कमी दर्शा सकता है।
- अवकाश के दौरान पर्याप्त सूचना के बिना शीघ्र सूचीकरण प्राप्त करने का प्रयास न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
- जब सूचीकरण का निर्देश 'दो सप्ताह बाद' का हो और अवधि समाप्त होने के बाद का दिन हाई कोर्ट के अवकाश में पड़े, तो सामान्यतः अवकाशकाल को गणना से बाहर रखा जाना चाहिए; यह संबंधित हाई कोर्ट के नियमों के अधीन है।
- इस मामले में जमानत को अंतिम रूप से रद्द करने के बजाय जमानत याचिका नए सिरे से तय करने के लिए लौटाई गई और तब तक अंतरिम जमानत जारी रखी गई।
इस निर्णय का व्यावहारिक प्रभाव
जमानत याचिका अब हाई कोर्ट में पुनर्जीवित होकर गुण-दोष पर तय होगी। appellant को दो सप्ताह में counter affidavit और आरोपी को उसके बाद एक सप्ताह में rejoinder दाखिल करना है। अंतरिम जमानत आगे के आदेश तक जारी रहेगी। निर्णय यह भी कहता है कि जब दो सप्ताह की अवधि के बाद की तारीख अवकाश में पड़ती हो, तो सामान्यतः रजिस्ट्री को अवकाश की अवधि गणना से बाहर रखनी चाहिए; लेकिन यह संबंधित हाई कोर्ट के नियमों के अधीन है और विशेष तारीख या Vacation Bench का निर्देश होने पर अलग व्यवस्था लागू हो सकती है।
Source check: निर्णय-पाठ में REPORTABLE अंकित है। निर्णय-पाठ में अपील संख्या रिक्त है और SLP (Crl) No. 7504 of 2026 का उल्लेख है; मेटाडेटा का Crl.A. No. 4994/2026 इसीलिए केस नंबर के रूप में नहीं अपनाया गया।