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05 November 2026
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Shekappa v. State of Karnataka: हत्या के मामले में प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्य, इनक्वेस्ट रिपोर्ट और चिकित्सकीय अनुमान के सिद्धांत

बरी किए जाने के विरुद्ध अपील में साक्ष्य का पुनर्मूल्यांकन संभव है; लेकिन जहाँ दो उचित निष्कर्ष संभव हों, वहाँ बरी किए जाने में हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। इनक्वेस्ट रिपोर्ट का उद्देश्य मृत्यु के प्रत्यक्ष कारण और परिस्थितियों की जाँच है; उसमें प्रत्यक्षदर्शियों के नाम न होना उनकी गवाही खारिज करने का पर्याप्त आधार नहीं। मृतक के रिश्तेदार होने मात्र से गवाह की गवाही अविश्वसनीय नहीं हो जाती; उसकी विश्वसनीयता का मूल्यांकन समग्र साक्ष्य के आधार पर होगा। Court: The Supreme Court of India Case Name: SHEKAPPA VS. STATE OF KARNATAKA Case Number: Criminal Appeal No. 2102 of 2011 Bench: माननीय न्यायमूर्ति K. V. Viswanathan और माननीय न्यायमूर्ति Arun Palli Neutral Citation: 2026 INSC 1189 Decision…
न्यायालयThe Supreme Court of India
मामलाSHEKAPPA VS. STATE OF KARNATAKA Case Number: Criminal Appeal No. 2102 of 2011
पीठमाननीय न्यायमूर्ति K. V. Viswanathan और माननीय न्यायमूर्ति Arun Palli
साइटेशन2026 INSC 1189 Decision
मुख्य बातें
  • बरी किए जाने के विरुद्ध अपील में साक्ष्य का पुनर्मूल्यांकन संभव है; लेकिन जहाँ दो उचित निष्कर्ष संभव हों, वहाँ बरी किए जाने में हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए।
  • इनक्वेस्ट रिपोर्ट का उद्देश्य मृत्यु के प्रत्यक्ष कारण और परिस्थितियों की जाँच है; उसमें प्रत्यक्षदर्शियों के नाम न होना उनकी गवाही खारिज करने का पर्याप्त आधार नहीं।
  • मृतक के रिश्तेदार होने मात्र से गवाह की गवाही अविश्वसनीय नहीं हो जाती; उसकी विश्वसनीयता का मूल्यांकन समग्र साक्ष्य के आधार पर होगा।

विस्तृत विवेचना

कानून और प्रक्रिया की समझ

बरी किए जाने के विरुद्ध अपील में साक्ष्य का पुनर्मूल्यांकन संभव है; लेकिन जहाँ दो उचित निष्कर्ष संभव हों, वहाँ बरी किए जाने में हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। इनक्वेस्ट रिपोर्ट का उद्देश्य मृत्यु के प्रत्यक्ष कारण और परिस्थितियों की जाँच है; उसमें प्रत्यक्षदर्शियों के नाम न होना उनकी गवाही खारिज करने का पर्याप्त आधार नहीं। मृतक के रिश्तेदार होने मात्र से गवाह की गवाही अविश्वसनीय नहीं हो जाती; उसकी विश्वसनीयता का मूल्यांकन समग्र साक्ष्य के आधार पर होगा।

Court: The Supreme Court of India

Case Name: SHEKAPPA VS. STATE OF KARNATAKA

Case Number: Criminal Appeal No. 2102 of 2011

Bench: माननीय न्यायमूर्ति K. V. Viswanathan और माननीय न्यायमूर्ति Arun Palli

Neutral Citation: 2026 INSC 1189

Decision Date: 2026-11-03

मामला क्या था?

दो व्यक्तियों की हत्या के मामले में विचारण न्यायालय ने अभियोजन के गवाहों पर संदेह करते हुए आरोपियों को बरी किया। उच्च न्यायालय ने बरी किए जाने का निर्णय पलटकर आरोपियों को दोषी ठहराया। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने मृतकों की पत्नियों—दो प्रत्यक्षदर्शियों—की गवाही, चिकित्सकीय साक्ष्य और अभिलेख का परीक्षण किया।

मुख्य कानूनी प्रश्न

क्या विचारण न्यायालय द्वारा दर्ज बरी किए जाने के निर्णय को अपील में पलटकर दोषसिद्धि कायम रखी जा सकती है, और क्या इनक्वेस्ट रिपोर्ट में प्रत्यक्षदर्शियों के नाम न होना, मृतक के पाचन-संबंधी चिकित्सकीय अनुमान या मृतकों से गवाहों का संबंध विश्वसनीय प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्य को अस्वीकार करने का आधार हो सकता है?

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अपील खारिज की और उच्च न्यायालय का दोषसिद्धि संबंधी निर्णय कायम रखा। न्यायालय ने पाया कि दोनों प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही विश्वसनीय थी और विचारण न्यायालय ने महत्वपूर्ण साक्ष्य को अनुचित कारणों से नज़रअंदाज़ किया था। इनक्वेस्ट रिपोर्ट में प्रत्यक्षदर्शियों के नाम न होना उनकी गवाही को खारिज करने का आधार नहीं था; न ही पाचन-संबंधी अनुमान, इस मामले में, स्पष्ट प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्य को अकेले नकार सकता था।

न्यायालय की प्रमुख reasoning

बरी किए जाने के विरुद्ध अपील में अपीलीय न्यायालय साक्ष्य की समीक्षा और पुनर्मूल्यांकन कर सकता है; लेकिन यदि अभिलेख पर दो उचित दृष्टिकोण संभव हों, तो बरी किए जाने के निष्कर्ष में हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। हस्तक्षेप तब उचित है जब वह निष्कर्ष स्पष्ट रूप से विकृत या कानूनन अस्थिर हो। न्यायालय ने मृतकों की पत्नियों की गवाही को स्वाभाविक और भरोसेमंद पाया; केवल रिश्तेदार होने से वे पक्षपाती या अविश्वसनीय नहीं हो जातीं। CrPC की धारा 174 के तहत इनक्वेस्ट का सीमित उद्देश्य मृत्यु के प्रत्यक्ष कारण और परिस्थितियों की जाँच है—प्रत्यक्षदर्शियों या हमलावरों के नाम दर्ज करना इसका आवश्यक हिस्सा नहीं। भोजन के पाचन से मृत्यु-समय का अनुमान अनेक कारकों से प्रभावित होता है, इसलिए उसे निर्णायक मानकर विश्वसनीय प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्य को खारिज नहीं किया जा सकता।

निर्णय के मुख्य बिंदु

  • बरी किए जाने के विरुद्ध अपील में साक्ष्य का पुनर्मूल्यांकन संभव है; लेकिन जहाँ दो उचित निष्कर्ष संभव हों, वहाँ बरी किए जाने में हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए।
  • इनक्वेस्ट रिपोर्ट का उद्देश्य मृत्यु के प्रत्यक्ष कारण और परिस्थितियों की जाँच है; उसमें प्रत्यक्षदर्शियों के नाम न होना उनकी गवाही खारिज करने का पर्याप्त आधार नहीं।
  • मृतक के रिश्तेदार होने मात्र से गवाह की गवाही अविश्वसनीय नहीं हो जाती; उसकी विश्वसनीयता का मूल्यांकन समग्र साक्ष्य के आधार पर होगा।
  • पाचन-संबंधी चिकित्सकीय अनुमान अनेक परिवर्तनीय कारकों से प्रभावित हो सकता है और विश्वसनीय प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्य को अकेले निष्प्रभावी नहीं करता।

इस निर्णय का व्यावहारिक प्रभाव

आपराधिक मुकदमों में इनक्वेस्ट रिपोर्ट में प्रत्यक्षदर्शियों के नाम न होने पर, उस चूक को अपने-आप उनकी गवाही के विरुद्ध निर्णायक नहीं माना जाना चाहिए। इसी तरह, भोजन के पाचन पर आधारित समय-अनुमान को सावधानी से परखना होगा और उसे अकेले विश्वसनीय प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्य को अस्वीकार करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। बरी किए जाने के विरुद्ध अपील में हस्तक्षेप के लिए भी निर्णय के स्पष्ट रूप से विकृत या कानूनन अस्थिर होने का आधार आवश्यक है।

कानूनी अस्वीकरण

यह लेख केवल सामान्य कानूनी जानकारी के लिए है, व्यक्तिगत कानूनी सलाह नहीं। कानून और न्यायिक निर्णय बदल सकते हैं। कार्रवाई से पहले आधिकारिक स्रोत जाँचें और आवश्यकतानुसार अधिवक्ता से सलाह लें। इस लेख से अधिवक्ता-मुवक्किल संबंध स्थापित नहीं होता।

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Advocate Amardeep Jaiswal
लेखक के बारे में

Advocate Amardeep Jaiswal

Advocate, High Court of Madhya Pradesh, Jabalpur। भारतीय कानून, न्यायिक निर्णय और व्यावहारिक कानूनी विषयों पर जानकारीपूर्ण लेख प्रकाशित करते हैं।

संपादकीय टिप्पणी: विश्लेषण और टिप्पणियाँ लेखक की समझ तथा राय दर्शाती हैं। कानून, तथ्य और न्यायिक स्थिति में बदलाव संभव है; किसी कदम से पहले मूल स्रोत और अपने मामले की स्थिति की जाँच करें।