सीधा जवाब: किसी लेन-देन में civil remedy उपलब्ध होने से आपराधिक कार्रवाई अपने-आप समाप्त नहीं होती। दूसरी ओर हर अनुबंध-भंग या संपत्ति-विवाद को धोखाधड़ी नहीं कहा जा सकता। महत्वपूर्ण बात यह है कि आरोपित अपराध के आवश्यक तत्व, विशेषकर प्रासंगिक समय का आशय, शिकायत व सामग्री से बनते हैं या नहीं।
घटनाक्रम देखें: विक्रय अनुबंध कब हुआ, धन किस प्रयोजन से लिया, स्वामित्व के बारे में क्या प्रतिनिधित्व किया गया, कब्जा किसके पास था और बाद में कौन-सी घटना हुई। विवाद उत्पन्न होने के बाद का व्यवहार महत्वपूर्ण हो सकता है, पर उसे आरंभिक आशय का स्वतः प्रमाण न मानें।
दस्तावेज: title deeds, agreement, registry/search report, payment proofs, notices, civil suit pleadings, possession documents और लिखित communications। फर्जी दस्तावेज या अलग आपराधिक कृत्य के आरोप हों तो उनका पृथक विश्लेषण करें।
उपाय: मामले के चरण और तथ्यों के अनुसार civil suit, injunction, police investigation defence, bail, discharge या उचित grounds पर BNSS धारा 528 की याचिका। केवल ‘civil case pending है’ लिखकर FIR quashing की गारंटी नहीं दी जा सकती।
कानून के मूल पाठ की जाँच के लिए India Code देखें।