सीधा जवाब: हर दूसरी FIR अवैध नहीं होती। मुद्दा यह है कि क्या दोनों रिपोर्ट सचमुच एक ही घटना और उसी घटना-क्रम को दोहराती हैं, या दूसरी रिपोर्ट में स्वतंत्र घटना, अलग घटना-क्रम या वैध counter-version है।
जाँच का तरीका: दोनों FIR का समय, स्थान, शिकायतकर्ता, आरोपी, कथित कृत्य और घटनाओं का क्रम एक तालिका में रखें। पहली जाँच में कौन-से तथ्य पहले से समाहित हैं, यह दिखाएँ। सामान्य शब्दों में ‘दोनों केस एक जैसे हैं’ लिखने से तथ्यात्मक समानता सिद्ध नहीं होती।
Counter-FIR का अंतर: कई विवादों में दोनों पक्ष एक-दूसरे के विरुद्ध आरोप लगाते हैं। प्रतिपक्ष की स्वतंत्र शिकायत को केवल इस आधार पर समाप्त नहीं किया जा सकता कि पहली FIR पहले दर्ज हुई थी। दूसरी रिपोर्ट अलग घटना से जुड़ी हो तो स्थिति भी बदल सकती है।
उपाय: जाँच अधिकारी/वरिष्ठ अधिकारी के समक्ष रिकॉर्ड के साथ आपत्ति, उपयुक्त procedural relief, और स्पष्ट कानूनी आधार होने पर हाईकोर्ट में BNSS धारा 528 के अंतर्गत चुनौती पर विचार किया जा सकता है। गिरफ्तारी का अलग जोखिम हो तो bail रणनीति स्वतंत्र रहेगी।
उदाहरण: 10 बजे हुए एक झगड़े पर पहली FIR है; दूसरी रिपोर्ट उसी मारपीट का शब्दशः दोहराव है। इसके विपरीत 4 बजे की अलग घटना या विपरीत पक्ष का स्वतंत्र संस्करण अलग विश्लेषण माँगेगा।
कानून के मूल पाठ की जाँच के लिए India Code देखें।